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खतरे के निशान से डेढ़ मीटर नीचे गंगा
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sun, 14 Aug 2016 12:53 AM IST
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खतरे के निशान से डेढ़ मीटर नीचे गंगा
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कई दिनाें से बढ़ रही गंगा शनिवार सुबह खतरे के निशान से महज डेढ़ मीटर नीचे बह रही है और प्रतिघंटा दो सेंटीमीटर की दर से बढ़ाव हो रहा है। नदी का विकराल रूप देखकर तटवर्तीय गांवों के निवासी सहमे हुए हैं। तमाम लोग ऊंचाई वाले सुरक्षित जगहों पर पहुंचने लगे हैं। इस दौरान लगातार हो रही बारिश ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मूसलाधार बारिश के बाद मध्य प्रदेश एवं उत्तरांचल की नदियाें से गंगा में पानी आ रहा है। इससे नदी उफान पर हैं। खतरे का निशान 77.724 मीटर है। जो अभी करीब डेढ़ मीटर दूर है। तटवर्तीय इलाके के किसानाें व ग्रामीणों जलस्तर के बढ़ते देख चिंतित नजर आने लगे हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखने गंगा घाटों नगर के लोग पहुंचने लगे हैं। घाटों की सीढ़ियां गंगा में समाहित होने लगी हैं। कटान का भी खतरा बढ़ता जा रहा है। जनपद के छानबे, चुनार, नरायनपुर आदि के तटवर्तीय इलाकों में बसे विभिन्न गांवाें के समीप पानी पहुंच गया है। इससे ग्रामीणाें व किसानाें की राताें की नींद उड़ गई है।
नगर के चौबेघाट स्थित श्मशान घाट डूबने से अंतिम संस्कार कराने में लोगों को परेशानी होने लगी है, वहीं घाटों की सीढ़ियां व प्राचीन मंदिरों पर भी खतरे का बादल मंडराने लगे है। चेतगंज व चील्ह संवाददाता के अनुसार गंगा का जलस्तर बढ़ने से विकास खंड कोन के हरसिंगपुर, मल्लेपुर, तिलठी, धौरहरा, मझलीपट्टी, सेमरा, मुजेहरा, कुलहूआं, गड़गेड़ी, चील्ह, मलाधरपुर सहित कई अन्य गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, जिससे निपटने की लोग तैयारी शुरू कर दिए हैं। पड़री संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के गंगा काजलस्तर बढ़ने से धौरहरा, कठिनई, सिंधोरा, चंडिका, नान्हूपुर, धर्मदेवा, पकरी का पुरा, छीतमपट्टी, चौहानपट्टी, माधोपुर सहित कई अन्य गांवों के लोगाें को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। गंगा सहित कई अन्य नदियाें के पानी में उफान के चलते लोग परेशान दिखे। उधर, राजगढ़ में बकहर नाले का पानी गई गांवों में घुस गया है। बाढ़ में दो लोगों का कच्चा मकान गिर गया।
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राजगढ़ के गढ़ी मौर्य व कूड़ी गांव के राजेश आदिवासी का कच्चा मकान गिर गया। बकहर नाले में उफान से निकरिका, धनसीरिया, दूबेपुर, कोन गढ़वा, नदिहार, कूड़ी आदि गावों में पानी प्रवेश कर गया, जिससे ग्रामीणाें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार की रात से गुरुवार की शाम तक लगातार बारिश होने से नदी के किनारे बसे लोग अपना घर छोड़कर ऊंचाई वाली जगहों पर चले गए हैं। शुक्रवार को बरसात थमने के बाद लोग अपने घरों में लौटे।
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मूसलाधार बारिश के बाद मध्य प्रदेश एवं उत्तरांचल की नदियाें से गंगा में पानी आ रहा है। इससे नदी उफान पर हैं। खतरे का निशान 77.724 मीटर है। जो अभी करीब डेढ़ मीटर दूर है। तटवर्तीय इलाके के किसानाें व ग्रामीणों जलस्तर के बढ़ते देख चिंतित नजर आने लगे हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखने गंगा घाटों नगर के लोग पहुंचने लगे हैं। घाटों की सीढ़ियां गंगा में समाहित होने लगी हैं। कटान का भी खतरा बढ़ता जा रहा है। जनपद के छानबे, चुनार, नरायनपुर आदि के तटवर्तीय इलाकों में बसे विभिन्न गांवाें के समीप पानी पहुंच गया है। इससे ग्रामीणाें व किसानाें की राताें की नींद उड़ गई है।
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नगर के चौबेघाट स्थित श्मशान घाट डूबने से अंतिम संस्कार कराने में लोगों को परेशानी होने लगी है, वहीं घाटों की सीढ़ियां व प्राचीन मंदिरों पर भी खतरे का बादल मंडराने लगे है। चेतगंज व चील्ह संवाददाता के अनुसार गंगा का जलस्तर बढ़ने से विकास खंड कोन के हरसिंगपुर, मल्लेपुर, तिलठी, धौरहरा, मझलीपट्टी, सेमरा, मुजेहरा, कुलहूआं, गड़गेड़ी, चील्ह, मलाधरपुर सहित कई अन्य गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, जिससे निपटने की लोग तैयारी शुरू कर दिए हैं। पड़री संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के गंगा काजलस्तर बढ़ने से धौरहरा, कठिनई, सिंधोरा, चंडिका, नान्हूपुर, धर्मदेवा, पकरी का पुरा, छीतमपट्टी, चौहानपट्टी, माधोपुर सहित कई अन्य गांवों के लोगाें को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। गंगा सहित कई अन्य नदियाें के पानी में उफान के चलते लोग परेशान दिखे। उधर, राजगढ़ में बकहर नाले का पानी गई गांवों में घुस गया है। बाढ़ में दो लोगों का कच्चा मकान गिर गया।
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राजगढ़ के गढ़ी मौर्य व कूड़ी गांव के राजेश आदिवासी का कच्चा मकान गिर गया। बकहर नाले में उफान से निकरिका, धनसीरिया, दूबेपुर, कोन गढ़वा, नदिहार, कूड़ी आदि गावों में पानी प्रवेश कर गया, जिससे ग्रामीणाें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार की रात से गुरुवार की शाम तक लगातार बारिश होने से नदी के किनारे बसे लोग अपना घर छोड़कर ऊंचाई वाली जगहों पर चले गए हैं। शुक्रवार को बरसात थमने के बाद लोग अपने घरों में लौटे।