{"_id":"60e1f95e8ebc3ebb4e4ec315","slug":"mirzapur-thyroid-test-machine-defective-for-one-year-even-cbc-is-not-being-tested-mirzapur-news-vns598652882","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिर्जापुरः एक वर्ष से खराब थायरायड जांच मशीन, सीबीसी से भी नहीं हो रही जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिर्जापुरः एक वर्ष से खराब थायरायड जांच मशीन, सीबीसी से भी नहीं हो रही जांच
विज्ञापन
मिर्जापुर। अस्पताल में नए उपकरणों को लगाने की कौन कहे, साल भर से खराब पड़े उपकरण की भी मरम्मत नहीं हो पा रही। यह हाल शहर के मंडलीय अस्पताल का ही नहीं बल्कि सीएचसी-पीएचसी का भी है। मायावती शासन काल में शुरू हुई सचल दल एंबुलेंस सेवा की वैन तो और भी जर्जर हाल हैं। इनकी मरम्मत कर उपयोग में लाया जा सकता था, पर वह सीएचसी-पीएचसी पर पड़े-पड़े सड़ रही हैं।
मंडलीय अस्पताल की बात करें तो यहां 155 बेड हैं। लेकिन जांच और इलाज के लिए लगे उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही सामने आती है। इसमें डिजीटल एक्सरे मशीन बार-बार खराब होती रहती है। इसे सही करने में महीनों का समय लग जाता है, फिलहाल मशीन सही है। पैथालाजी में जांच के लिए लगभग 10 से अधिक मशीनें लगी हैं। इसमें थायराइड और सीबीसी की मशीन खराब है। थायरायड की मशीन पिछले एक वर्ष से खराब है। इसकी मरम्मत नहीं हो पा रही। वहीं सीबीसी मशीन की बात करें तो वह भी दो-तीन सप्ताह से खराब पड़ी है। सीबीसी मशीन आए दिन खराब होती रहती है। थोड़ी सी मरम्मत से वह सही हो सकती है, पर मरम्मत में समय लगता है। बात सीएचसी-पीएचसी की करें तो हलिया उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया में दो ऑटोक्लेव व दो बीपी रेस्टोरेंट व कुछ कुर्सियां खराब पड़ी हैं। इसके अलावा करीब 10 वर्षों से मायावती के शासनकाल से सचल दल एंबुलेंस सेवा की गाड़ी परिसर में निष्क्रिय स्थिति में पड़े सड़ रही है। जिगना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई उपकरण खराब नहीं है, पर मायावती सरकार में शुरू हुई सेवा की एंबुलेंस वैन गाड़ी खा रही हैं।
हाल में बना है आटोक्लेव व डीप फ्रिजर
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में और सीएचसी-पीएचसी मेें जो उपकरण खराब होते है, उसकी मरम्मत कराई जाती है। हाल ही में मंडलीय अस्पताल में आपरेशन थियेटर में आटोक्लेव मशीन और ब्लड बैंक का डीपफ्रिजर बनाया गया है।
विज्ञापन
खराब स्ट्रेचर की नहीं हो पाती मरम्मत
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में बेड और अन्य उपकरण की कमी तो नहीं है, पर काफी संख्या में बेड, उपकरण समेत अन्य सामान कंडम में पड़ा है। इसमें पुराने सामान के साथ नया सामान भी है। काफी समय से सामान की निलामी न किए जाने से सामान में जंग लग रहा है। अस्पताल में सबसे अधिक स्ट्रेचर और व्हील चेयर की कमी आती है। अस्पताल में कई जगहों पर रखे सामान में पूूराने स्ट्रेचर भी रखे हैं। जिनकी मरम्मत होने के बाद उनको इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
सामानों की मरम्मत और कंडम घोषित करने का तरीका
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. कमल कुमार ने बताया कि अस्पताल में छोटे से लेकर बड़े उपकरण की मरम्मत के लिए शासन से एजेंसी तय है। जिसका एक कर्मचारी अस्पताल में तैनात है। कर्मचारी उसकी मरम्मत करता है या फिर वारंटी है तो उपकरण को भेजकर उसकी मरम्मत कराया जाता है। अस्पताल में सामान को कंडम घोषित करने के दो तरीके हैं। पहला सामान बनने लायक नहीं है, उसके बनने में ज्यादा खर्च आएगा। दूसरा हर सामान की एक मीयाद समय होता है। उसकी मीयाद पूरी हो जाती है तो उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है। विभाग में सामान की मरम्मत आदि के लिए एक इंजीनियर है। खराब स्ट्रेचर और व्हील चेयर की मरम्मत कराई जाती है।
उपकरण की मरम्मत के लिए शासन से एजेंसी का कर्मचारी रखा है। अस्पताल में सामान की एक्सपायरी होने और बनने में अधिक खर्च आने पर उसे कंडम घोषित किया जाता है। अस्पताल परिसर में जो सामान रखे है। किसी सामान की कमी नहीं है। जो सामान अधिक है वो स्टोर में रखा है।
डॉ. कमल कुमार, एसआईसी
थायरायड मशीन को सीओसीटी नाम की एजेंसी ने लगाया था। पिछले वर्ष कंपनी का टेंडर खत्म हो गया। अब सैरिक्स नाम की कंपनी का टेंडर है। थायरायड मशीन डीजी लेवल पर सैरिक्स को हैंडओवर करने के लिए पत्र लिखा गया था। हैंडओवर हो गया है। एक सप्ताह में उसकी मरम्मत हो जाएगी। अस्पताल में सभी मशीनें सही हैं।
- अनुज ठाकुर, मैनेजर, मंडलीय अस्पताल
विज्ञापन
मंडलीय अस्पताल की बात करें तो यहां 155 बेड हैं। लेकिन जांच और इलाज के लिए लगे उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही सामने आती है। इसमें डिजीटल एक्सरे मशीन बार-बार खराब होती रहती है। इसे सही करने में महीनों का समय लग जाता है, फिलहाल मशीन सही है। पैथालाजी में जांच के लिए लगभग 10 से अधिक मशीनें लगी हैं। इसमें थायराइड और सीबीसी की मशीन खराब है। थायरायड की मशीन पिछले एक वर्ष से खराब है। इसकी मरम्मत नहीं हो पा रही। वहीं सीबीसी मशीन की बात करें तो वह भी दो-तीन सप्ताह से खराब पड़ी है। सीबीसी मशीन आए दिन खराब होती रहती है। थोड़ी सी मरम्मत से वह सही हो सकती है, पर मरम्मत में समय लगता है। बात सीएचसी-पीएचसी की करें तो हलिया उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया में दो ऑटोक्लेव व दो बीपी रेस्टोरेंट व कुछ कुर्सियां खराब पड़ी हैं। इसके अलावा करीब 10 वर्षों से मायावती के शासनकाल से सचल दल एंबुलेंस सेवा की गाड़ी परिसर में निष्क्रिय स्थिति में पड़े सड़ रही है। जिगना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई उपकरण खराब नहीं है, पर मायावती सरकार में शुरू हुई सेवा की एंबुलेंस वैन गाड़ी खा रही हैं।
विज्ञापन
हाल में बना है आटोक्लेव व डीप फ्रिजर
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में और सीएचसी-पीएचसी मेें जो उपकरण खराब होते है, उसकी मरम्मत कराई जाती है। हाल ही में मंडलीय अस्पताल में आपरेशन थियेटर में आटोक्लेव मशीन और ब्लड बैंक का डीपफ्रिजर बनाया गया है।
विज्ञापन
खराब स्ट्रेचर की नहीं हो पाती मरम्मत
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में बेड और अन्य उपकरण की कमी तो नहीं है, पर काफी संख्या में बेड, उपकरण समेत अन्य सामान कंडम में पड़ा है। इसमें पुराने सामान के साथ नया सामान भी है। काफी समय से सामान की निलामी न किए जाने से सामान में जंग लग रहा है। अस्पताल में सबसे अधिक स्ट्रेचर और व्हील चेयर की कमी आती है। अस्पताल में कई जगहों पर रखे सामान में पूूराने स्ट्रेचर भी रखे हैं। जिनकी मरम्मत होने के बाद उनको इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
सामानों की मरम्मत और कंडम घोषित करने का तरीका
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. कमल कुमार ने बताया कि अस्पताल में छोटे से लेकर बड़े उपकरण की मरम्मत के लिए शासन से एजेंसी तय है। जिसका एक कर्मचारी अस्पताल में तैनात है। कर्मचारी उसकी मरम्मत करता है या फिर वारंटी है तो उपकरण को भेजकर उसकी मरम्मत कराया जाता है। अस्पताल में सामान को कंडम घोषित करने के दो तरीके हैं। पहला सामान बनने लायक नहीं है, उसके बनने में ज्यादा खर्च आएगा। दूसरा हर सामान की एक मीयाद समय होता है। उसकी मीयाद पूरी हो जाती है तो उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है। विभाग में सामान की मरम्मत आदि के लिए एक इंजीनियर है। खराब स्ट्रेचर और व्हील चेयर की मरम्मत कराई जाती है।
उपकरण की मरम्मत के लिए शासन से एजेंसी का कर्मचारी रखा है। अस्पताल में सामान की एक्सपायरी होने और बनने में अधिक खर्च आने पर उसे कंडम घोषित किया जाता है। अस्पताल परिसर में जो सामान रखे है। किसी सामान की कमी नहीं है। जो सामान अधिक है वो स्टोर में रखा है।
डॉ. कमल कुमार, एसआईसी
थायरायड मशीन को सीओसीटी नाम की एजेंसी ने लगाया था। पिछले वर्ष कंपनी का टेंडर खत्म हो गया। अब सैरिक्स नाम की कंपनी का टेंडर है। थायरायड मशीन डीजी लेवल पर सैरिक्स को हैंडओवर करने के लिए पत्र लिखा गया था। हैंडओवर हो गया है। एक सप्ताह में उसकी मरम्मत हो जाएगी। अस्पताल में सभी मशीनें सही हैं।
- अनुज ठाकुर, मैनेजर, मंडलीय अस्पताल