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Mirzapur News: एक महीने से मशीन खराब, नहीं हो रहा सीटी स्कैन
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मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में मशीन लगने के एक साल बाद सीटी स्कैन सुविधा शुरू हुई, जो चार दिन में ही चल पाई। मशीन में खराबी आने की वजह से एक महीने से जांच ठप है। मरीजों को बाहर जाकर महंगी दर पर जांच करानी पड़ रही है।
मंडलीय अस्पताल में पांच करोड़ की सीटी स्कैन मशीन एक साल पहले मंगाई गई थी। इसके बाद पांच मई को इससे जांच की सुविधा शुरू की गई थी। चार दिन में सिर्फ 13 लोगों की जांच होने बाद मशीन में खराबी आ गई।
बताया गया कि मशीन में अर्थिंग की समस्या आई है। फिलिप्स कंपनी का इंजीनियर आकर मशीन को खोलकर बनाया, पर समस्या दूर नहीं हो सका। मशीन भले नहीं बनी, पर खराब मशीन न दिखे इसके लिए पर्दा जरूर लगा दिया गया।
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प्रतिदिन चार से पांच केस आते है। जिसमें सिटी स्कैन कराना होता है। मरीज बाहर जाकर दो हजार में जांच कराने को विवश हैं। बाहर जांच कराने पर डाॅक्टर का कमीशन सेट रहता है। मरीजों का आरोप है कि कमीशन के लिए ही मशीन को बनवाने में अस्पताल प्रशासन की ओर से दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है।
अब एक माह बाद भी खराब मशीन न बनने पर सवाल उठने लगा है कि आखिर मशीन न बनने में कोई खेल तो नहीं हो रहा है। मशीन न बनने पर अस्पताल प्रशासन अब दूसरी बात बता रहा है।
पहले अर्थिंग की बात बताई गई थी, अब बताया जा रहा है कि बिजली का लोड नहीं मिल रहा है। अस्पताल के आवासीय परिसर की बिजली सप्लाई बंद करने पर मशीन चल रहा है, पर आवासीय परिसर का बिजली चालू रहने पर सिटी स्कैन मशीन नहीं चल रही है। आवासीय परिसर का बिजली कनेक्शन अलग करने के लिए बिजली विभाग में पैसा जमा करा दिया गया।
सीएमएस सेे लेकर अपर निदेशक तक पत्र लिख चुकी हैं, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो रहा। अस्पताल प्रशासन ने अब कमिश्नर से गुहार लगाई है।
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मंडलीय अस्पताल में पांच करोड़ की सीटी स्कैन मशीन एक साल पहले मंगाई गई थी। इसके बाद पांच मई को इससे जांच की सुविधा शुरू की गई थी। चार दिन में सिर्फ 13 लोगों की जांच होने बाद मशीन में खराबी आ गई।
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बताया गया कि मशीन में अर्थिंग की समस्या आई है। फिलिप्स कंपनी का इंजीनियर आकर मशीन को खोलकर बनाया, पर समस्या दूर नहीं हो सका। मशीन भले नहीं बनी, पर खराब मशीन न दिखे इसके लिए पर्दा जरूर लगा दिया गया।
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प्रतिदिन चार से पांच केस आते है। जिसमें सिटी स्कैन कराना होता है। मरीज बाहर जाकर दो हजार में जांच कराने को विवश हैं। बाहर जांच कराने पर डाॅक्टर का कमीशन सेट रहता है। मरीजों का आरोप है कि कमीशन के लिए ही मशीन को बनवाने में अस्पताल प्रशासन की ओर से दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है।
अब एक माह बाद भी खराब मशीन न बनने पर सवाल उठने लगा है कि आखिर मशीन न बनने में कोई खेल तो नहीं हो रहा है। मशीन न बनने पर अस्पताल प्रशासन अब दूसरी बात बता रहा है।
पहले अर्थिंग की बात बताई गई थी, अब बताया जा रहा है कि बिजली का लोड नहीं मिल रहा है। अस्पताल के आवासीय परिसर की बिजली सप्लाई बंद करने पर मशीन चल रहा है, पर आवासीय परिसर का बिजली चालू रहने पर सिटी स्कैन मशीन नहीं चल रही है। आवासीय परिसर का बिजली कनेक्शन अलग करने के लिए बिजली विभाग में पैसा जमा करा दिया गया।
सीएमएस सेे लेकर अपर निदेशक तक पत्र लिख चुकी हैं, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो रहा। अस्पताल प्रशासन ने अब कमिश्नर से गुहार लगाई है।