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दस वर्षों में आठ प्रतिशत साक्षरता दर बढ़ी

Sun, 12 Sep 2021 07:41 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 12 Sep 2021 07:41 PM IST
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Literacy rate increased by eight percent in ten years
शासन की ओर से शिक्षा और साक्षरता के लिए चलाई जा रही योजनाओं का असर दिख रहा है। एक दशक में जिले की साक्षरता दर में आठ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण यहां साक्षरता का ग्राफ नीचे था। वर्ष 2011 में जब जनगणना हुई थी तो जिले की साक्षरता 68.48 प्रतिशत थी जो कि अब बढ़कर लगभग 76 प्रतिशत से कुछ अधिक हो गई है। हालांकि जनगणना तो अभी हुई नहीं लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के साक्षरता प्रकोष्ठ के अनुसार इस समय जिले की साक्षरता लगभग 76 प्रतिशत से कुछ अधिक है।
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वर्ष 2001 की जनगणना में हुए सर्वे में साक्षरता 55.3 फीसदी थी। दस वर्ष बाद जनगणना 2011 में बढ़कर 68. 48 फीसदी हो गयी। साक्षरता को बढ़ाने के लिए वर्ष 2002 में सर्व शिक्षा अभियान चलाया गया था। इस अभियान में सात वर्ष के बच्चे से लेकर बूढ़ों तक को शिक्षित करने की योजना तैयार की गई थी। जहां पर बेसिक शिक्षा के लिए स्कूल नहीं है वहां पर स्कूल बनाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने को निर्देश दिया गया था। जनगणना के आंकड़ों पर गौर किया जाय तो जिले में वर्ष 2001 में पुरुष की साक्षरता 69.06 थी, जो जनगणना 2011 में बढ़कर 78.97 हो गयी। वर्ष 2021 में यह बढ़कर 83. 49 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसी प्रकार महिलाओं की साक्षरता दर 39.03 से बढ़कर 58.77 हो गयी थी। वर्तमान में अनुमान है कि इसमें काफी बढ़ोत्तरी हुई है और यह लगभग 69.52 के आसपास पहुंच गई है।
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इनसेट
साक्षर भारत मिशन से बढ़ी साक्षरता
मिर्जापुर। केंद्र सरकार की साक्षर भारत मिशन से साक्षरता पर सकारात्मक असर पड़ा है और इसमें वृद्धि हुई है। प्रतिवर्ष होने वाली इस परीक्षा में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया और साक्षरता का प्रमाणपत्र हासिल किया। हालांकि इधर एक-दो वर्षों से यह परीक्षा स्थगित है। इसका कारण कोविड-19 को बताया जा रहा है। सामुदायिक सहभागिता के जिला समन्वयक चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि साक्षरता को बढ़ाने का भी पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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जिस प्रकार से शिक्षा का प्रसार हो रहा है। वर्तमान में शायद ही कोई ऐसा बच्चा महाविद्यालय में आता होगा जिसके माता-पिता साक्षर न हों।
- डा. भवभूति मिश्र, प्राचार्य केबी कालेज
शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका है। यदि कोई नहीं भी पढ़ा है तो वह पढ़ने लिखने का प्रयास कर रहा है।
- डा. ऋचा शुक्ला
साक्षरता बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। विद्यालय में आने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। अभिभावक भी इसके लिए जागरूक हुए हैं।
- डा. एनके पांडेय, प्रधानाचार्य लायंस स्कूल
बेसिक शिक्षा विभाग का प्रतिवर्ष आउट आफ स्कूल बच्चों को खोजने का जो अभियान चलता है। उससे शिक्षा का प्रसार हुआ है। अभिभावक भी अब शिक्षित हो रहे हैं।
- रीता वर्मा, प्रधानाचार्य, आर्यकन्या इंटर कालेज
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