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Mirzapur News: स्टील के बड़े बर्तन नहीं मिलते, एल्यूमिनियम के पात्रों में बन रहा एमडीएम

Tue, 06 Oct 2026 01:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:19 AM IST
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Large steel vessels are unavailable; the Mid-Day Meal is being prepared in aluminium containers.
सिटी विकास  खंड के कंपोजिट विद्यालय खजुरी में एमडीएम के​ लिए रखा एल्यूमिनियम का भगौना, संवाद
दो वर्ष पूर्व ही स्टील के बर्तनों के प्रयोग को वरीयता देने का था आदेश
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मिर्जापुर। जिले के अधिकांश परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए एल्यूमिनियम के बर्तनों का ही प्रयोग हो रहा है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। जबकि दो वर्ष पूर्व ही स्कूल महानिदेशक कंचन वर्मा ने इस प्रकार के बर्तनों की जगह स्टील के बर्तनों के प्रयोग को वरीयता देने का आदेश जारी किया था। शिक्षकों एवं डीसी एमडीएम रविंद्र मिश्रा ने बताया कि बड़े बर्तन स्टील के नहीं मिलते कि एक बार में सबका खाना एक बार में बन जाए।
सिटी ब्लॉक का कंपोजिट विद्यालय खजुरी हो या जमालपुर ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय जमालपुर प्रथम, भरुहना कंपोजिट विद्यालय और नगर का बृजकिशोर कंपोजिट विद्यालय समेत अन्य विद्यालयों में भी एल्यूमिनियम के पात्र में ही खाना बन रहा है। वर्ष 2024 के फरवरी में तत्कालीन स्कूल महानिदेशक कंचन वर्मा ने प्रदेश के सभी एमडीएम संचालित विद्यालयों के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को आदेश जारी किया था कि मध्याह्न भोजन में एल्यूमिनियम के बर्तनों की जगह स्टील के बर्तनों का प्रयोग करें। यदि पूरी तरह से संभव न हो तो स्टील के बर्तनों को वरीयता दें।
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स्कूल महानिदेशक ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया था कि इस धातु के बर्तनों के प्रयोग से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके बाद भी अधिसंख्य विद्यालयों में एल्यूमिनियम के बर्तनों का ही प्रयोग हो रहा है। सोमवार को सब्जी-रोटी का मेन्यू था। इसी प्रकार के बर्तनों में सब्जी, चावल या दाल उबालने से एल्यूमिनियम के कुछ अंश आने की संभावना होती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
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5356 रसोइयां बनाती हैं मध्याह्न भोजन
जिले के 1829 परिषदीय विद्यालयों में 5356 रसोइयां भोजन बनाती हैं। वे प्रतिदिन 2,29,568 विद्यार्थियों के लिए भोजन बनाती हैं। भोजन के निरीक्षण की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक या उनके द्वारा निर्धारित प्रभारी की होती है। उनके जांच करने के बाद ही बच्चों को मध्याह्न भोजन का वितरण किया जाता है। इसके लिए विशेष रूप से एक जिला समन्वयक मध्याह्न भोजन की नियुक्ति की गई है, जो सभी प्रकार से मध्याह्न भोजन के लिए जिम्मेदार होता है।


स्टील के इतने बड़े बर्तन नहीं मिलते की सबका एक बार में खाना बने
एल्यूमिनियम और स्टील के बीच फंसे कुछ शिक्षक इसे व्यवहारिक समस्या बता रहे हैं। उनका कहना है कि जहां 200 या उससे अधिक बच्चों का भोजन बनता है, वहां उतना बड़ा स्टील का बर्तन नहीं मिल पाता। यदि छोटे बर्तन में बनाया जाए तो कई बार बनाना पड़ेगा और उसकी सुरक्षा भी करनी होगी, ताकि एक ही समय में सभी बच्चों को एक साथ भोजन परोसा जा सके। दावा किया कि जहां संख्या कम है, वहां स्टील के बर्तन का ही प्रयोग किया जाता है।
वर्जन
स्टील की थाली व कटोरी आदि के लिए आदेश था। वह सभी विद्यालयों में उपयोग में लाया जा रहा है। इतना बड़ा भगोना तो स्टील का मिलता भी नहीं है।
-रविंद्र मिश्रा, डीसी एमडीएम

सिटी विकास  खंड के कंपोजिट विद्यालय खजुरी में एमडीएम के लिए रखा एल्यूमिनियम का भगौना, संवाद

सिटी विकास  खंड के कंपोजिट विद्यालय खजुरी में एमडीएम के लिए रखा एल्यूमिनियम का भगौना, संवाद

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