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पानी के लिए रतजगा

Sun, 29 May 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Sun, 29 May 2016 11:58 PM IST
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Increases water crisis
पानी की समस्‍या - फोटो : अमर उजाला
पटेहरा और राजगढ़ ब्लॉक में नक्सल क्षेत्र के पठारी इलाकों में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण करता जा रहा है। कुएं सूख चुके हैं, तालाबों में पानी नदारद है, बारिश नहीं होने से नालों और झरनों में भी पानी आना बंद हो चुका है। ग्रामीण पेयजल के लिए बाल्टी व डिब्बा लेकर परेशान हो रहे हैं। कई गांवों में तो पानी के लिए ग्रामीण रात भर पहले पानी लेने के चक्कर में रात भर जाग रहे हैं। सुबह तक मारामारी हो जाती है।
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मड़िहान तहसील क्षेत्र में शुद्ध पेयजल के लिए ग्रामीण जनता को दर-दर भटकना पड़ रहा है। भूमिगत जलस्तर तेजी से नीचे जाने से क्षेत्र के नब्बे प्रतिशत हैंडपंप पानी नहीं उगल रहे हैं। जहां 10 प्रतिशत हैंडपंपों से पानी निकल भी रहा है, वहां पानी लेने के लिए ग्रामीणों की लंबी कतार लग जा रही है।
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क्षेत्र के शीतलगढ़, शेरुआ, गजरिया, चिक्सी, रैकरा, जुड़िया, बगहवां, कलवारी, पचोखरा, पड़रिया, मड़रिया, खचहां, मलुआ, करौंदा, मुस्किरा, कमलापुर, पिउरी, गोढ़ा, ककरद, अमोई, पुरवा, खंडवर, मझारी आदि गांवाें में पानी के लिए नक्सल प्रभावित गांवों की जनता पहले पानी लेने के लिए रात भर जाग रहे हैं।
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जल स्रोतों में जैसे ही पानी जुट जाता है, भीड़ मच जाती है। सुबह तक आने वाले लोगों को कभी पानी मिलता है तो कभी नहीं। प्रचंड गर्मी में नदी-नालाें व तालाबाें की तलहटियों से धूल उड़ने से पशुपालकों को अपने मवेशियाें की प्यास बुझाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


तहसील क्षेत्र के ढाई लाख से ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र में विकास व राजस्व विभाग के सहयोग से मात्र 10 पानी के टैंकर लगाए गए हैं, जो नाकाफी हैं। जंगलों और पहाड़ से सटे गांवों में जलस्तर काफी नीचे चले जाने से सटे गांवों में लगे हैंडपंप शोपीस बन कर रह गए हैं। शासन के निर्देश के बावजूज सूखे तालाबों में भी पानी नहीं भरवाया जा रहा है। समय रहते यदि पेयजल समस्या के समाधान के प्रति प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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