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Mirzapur News: देखते ही देखते बन गईं कोठियां, दरवाजे पर खड़ी हो गई कार
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मिर्जापुर। देश भर में साइबर ठगी के करोड़ों रुपयों को मिर्जापुर के विभिन्न बैंकों में सुरक्षित करने और उन्हें ठिकाने लगाने के आरोपियों ने कुछ सालों में ही कोठियां खड़ी कर लीं। घर के सामने पिछले कुछ सालों में कारें खड़ी हो गईं। इतना ही नहीं रईसी ऐसी कि एक कार की दुर्घटनाग्रस्त हुई तो उसे वहीं छोड़ दिया दो नई कार ले ली। देश में साइबर ठगी से प्राप्त पैसों को ठिकाने लगाने का सुरक्षित स्थान मिर्जापुर बन गया है। साइबर ठगी मामले में पुलिस की तफ्तीश में फिलहाल ऐसे ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मामले की जांच कर रहे देहात कोतवाल अमित मिश्रा ने बताया कि साइबर ठगी मामले में आरोपी बनाए गए लोगों ने कुछ सालों में ही घर, जमीन, जायदाद बनाई। पिछले कुछ सालों में रजनीश मिश्रा ने घर बनवाने के साथ ही दो चार पहिया वाहन खरीदे। इतना ही नहीं ग्रामीणों से पूछताछ में पता चला है कि जरूरतमंदों का फायदा उठाकर लाखों रुपये उधार देकर उनके खेत रेहन पर रख लिए। इसी प्रकार सामान्य आरा मशीन चलाने वाले ने नई कोठी खड़ी कर ली। पिछले कुछ सालों में कई चार पहिया वाहन खरीद लिए। सामान्य आरा मशीन मालिक संदीप सिंह पटेल के खाते में 13 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन देन हुआ। पिछले चार-पांच सालों में आरोपियों के रहन सहन में जमीन आसमान का अंतर आया। एक आरोपी की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई तो उसे वहीं छोड़ दिया। दो नई कार निकलवा ली।
गेमिंग ऐप का बना रहे क्लोन-आरोपियों में कुछ ऐसे भी युवा है जो न केवल गेमिंग ऐप बनाने बल्कि उसका क्लोन तक तैयार करने की महारथ हासिल कर चुके हैं। जैसे ही ऑनलाइन गेम खेलने वाला व्यक्ति पैसे जीतता उसका पैसा साइबर ठग उड़ा देते। बाद में विभिन्न खातों के माध्यम से यह पैसे निकाल लिए जाते। एटीएम, ऑनलाइन पर्चेज इत्यादि के माध्यम से पैसों को निकाला जाता।
यह है पूरा मामला-- -- --
साइबर ठगी के आरोपियों की प्राथमिक जांच में 20 करोड़ से ज्यादा का हेरफेर सामने आया है। 100 से ज्यादा खातों की जांच चल रही है। गिरोह में ऐसे लोग भी हैं जिनपर मिर्जापुर के अलावा दूसरे जिलों, प्रदेशों में शिकायत हो चुकी है। कुछ ने पैसे जो कुछ मामले में पुलिस कार्रवाई भी कर चुकी है। करोड़ों रुपये खातों में आए और फिर उनकी निकासी की गई है। साइबर अपराध से अर्जित पैसे को दूसरे के खाते में जमा कराने वाले गिरोह के सात लोगों के खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इसी प्रकार मड़िहान, चुनार, कछवां और वाराणसी के कुछ इलाकों में सक्रिय सदस्य और उनके बैंक खाते भी पुलिस की राडार पर हैं।
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गेमिंग ऐप का बना रहे क्लोन-आरोपियों में कुछ ऐसे भी युवा है जो न केवल गेमिंग ऐप बनाने बल्कि उसका क्लोन तक तैयार करने की महारथ हासिल कर चुके हैं। जैसे ही ऑनलाइन गेम खेलने वाला व्यक्ति पैसे जीतता उसका पैसा साइबर ठग उड़ा देते। बाद में विभिन्न खातों के माध्यम से यह पैसे निकाल लिए जाते। एटीएम, ऑनलाइन पर्चेज इत्यादि के माध्यम से पैसों को निकाला जाता।
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यह है पूरा मामला
साइबर ठगी के आरोपियों की प्राथमिक जांच में 20 करोड़ से ज्यादा का हेरफेर सामने आया है। 100 से ज्यादा खातों की जांच चल रही है। गिरोह में ऐसे लोग भी हैं जिनपर मिर्जापुर के अलावा दूसरे जिलों, प्रदेशों में शिकायत हो चुकी है। कुछ ने पैसे जो कुछ मामले में पुलिस कार्रवाई भी कर चुकी है। करोड़ों रुपये खातों में आए और फिर उनकी निकासी की गई है। साइबर अपराध से अर्जित पैसे को दूसरे के खाते में जमा कराने वाले गिरोह के सात लोगों के खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इसी प्रकार मड़िहान, चुनार, कछवां और वाराणसी के कुछ इलाकों में सक्रिय सदस्य और उनके बैंक खाते भी पुलिस की राडार पर हैं।
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