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मोक्ष दिलाता है मोतिया और गेरुआ तालाब में स्नान-ध्यान
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 13 Apr 2016 12:25 AM IST
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विंध्य धाम की महत्ता
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विंध्य धाम पर अवस्थित मोतिया तालाब और गेरुआ तालाब के प्रति भी लोगों की अगाध आस्था है। मान्यता है कि तालाबों में स्नान, ध्यान के बाद पास बने मंदिरों में पूजन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। नवरात्र के समय जिले में आने वाले हजारों श्रद्धालु इसमें स्नान करते हैं। दोनों ही तालाब विंध्य पर्वत के प्राकृतिक सौंदर्य की अनुपम भेंट हैं। बिंदु की अधिष्ठात्री मां विंध्यवासिनी विंध्य पर्वत पर तीन बिंदु पर अपनी तीन महाशक्तियों के साथ विराजमान हैं।
त्रिकोण यात्रा में दूसरे बिंदु पर विराजमान महाकाली मंदिर से एक किलोमीटर की दूरी पर गेरुआ तालाब है। यहां पर मां के लाडले भाई श्रीकृष्ण विराजते हैं। यहां पर त्रिभुवन मोहिनी भगवाती राधा के साथ ब्रजनंदन श्रीकृष्ण नित्य रासलीला रचाते हैं। भक्ताें को आज भी उनकी मुरली की मधुर तान कोयल, पपीहा, मोर आदि पक्षियों की बोलियाें में सुनाई पड़ती है। गेरुआ तालाब से एक रास्ता मोतिया तालाब की ओर जाता है।
मोतिया तालाब सरोवर के उत्तरी तट पर मुक्तेश्वर नाथ का शिवलिंग भी स्थापित है, जिनके दर्शन और सरोवर में स्नान मात्र से मुक्ति मिल जाती है। सरोवर की ऐसी मान्यता है कि कुत्ता काटने पर यहां स्नान कर लेने मात्र से विष तत्काल समाप्त हो जाता है। तालाब के विषय में पुराणों में लिखा है कि जो भी भक्त इस सरोवर में स्नान कर मुक्तेश्वर नाथ जी की पूजा करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है।
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इस सरोवर के जल स्पर्श मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। विंध्याचल के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पं. त्रियोगी नारायण मिश्र ने बताया कि गेरुआ तालाब ही विंध्य पर्वत पर वह स्थान है, जहां पर ब्रह्म के उपासक आदिगुरु शंकराचार्य जी को मां विंध्यवासिनी की शक्ति की अनुभूति हुई थी। आदिगुरु शंकराचार्य जी ने लिखा था कि किसी भी साधक की साधना तब तक पूर्ण नहीं मानी जाएगी, जब तक वह विंध्याचल की इस धरा पर आकर मां विंध्यवासिनी के चरण रज को प्राप्त नहीं कर लेगा। गेरुआ तालाब जहां ब्रह्म शक्ति के साथ जुड़ा है, वहीं मोतिया तालाब मुक्ति के साथ जुड़ा है।
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त्रिकोण यात्रा में दूसरे बिंदु पर विराजमान महाकाली मंदिर से एक किलोमीटर की दूरी पर गेरुआ तालाब है। यहां पर मां के लाडले भाई श्रीकृष्ण विराजते हैं। यहां पर त्रिभुवन मोहिनी भगवाती राधा के साथ ब्रजनंदन श्रीकृष्ण नित्य रासलीला रचाते हैं। भक्ताें को आज भी उनकी मुरली की मधुर तान कोयल, पपीहा, मोर आदि पक्षियों की बोलियाें में सुनाई पड़ती है। गेरुआ तालाब से एक रास्ता मोतिया तालाब की ओर जाता है।
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मोतिया तालाब सरोवर के उत्तरी तट पर मुक्तेश्वर नाथ का शिवलिंग भी स्थापित है, जिनके दर्शन और सरोवर में स्नान मात्र से मुक्ति मिल जाती है। सरोवर की ऐसी मान्यता है कि कुत्ता काटने पर यहां स्नान कर लेने मात्र से विष तत्काल समाप्त हो जाता है। तालाब के विषय में पुराणों में लिखा है कि जो भी भक्त इस सरोवर में स्नान कर मुक्तेश्वर नाथ जी की पूजा करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है।
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इस सरोवर के जल स्पर्श मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। विंध्याचल के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पं. त्रियोगी नारायण मिश्र ने बताया कि गेरुआ तालाब ही विंध्य पर्वत पर वह स्थान है, जहां पर ब्रह्म के उपासक आदिगुरु शंकराचार्य जी को मां विंध्यवासिनी की शक्ति की अनुभूति हुई थी। आदिगुरु शंकराचार्य जी ने लिखा था कि किसी भी साधक की साधना तब तक पूर्ण नहीं मानी जाएगी, जब तक वह विंध्याचल की इस धरा पर आकर मां विंध्यवासिनी के चरण रज को प्राप्त नहीं कर लेगा। गेरुआ तालाब जहां ब्रह्म शक्ति के साथ जुड़ा है, वहीं मोतिया तालाब मुक्ति के साथ जुड़ा है।