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जलकुंभी सोख लेती है पानी का आक्सीजन
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मिर्जापुर। जिला विज्ञान क्लब मिर्जापुर के तत्वाधान में भूजल सप्ताह के संदर्भ में आयोजित गोष्ठी के तीसरे दिन रविवार को 84 लोगों ने वर्चुअल प्रतिभागिता की। इसमें जलकुंभी से खतरे पर चर्चा की गई। कहा गया कि जलकुंभी पानी का पूरा आक्सीजन सोख लेती है।
जिला समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि जल का मुख्य स्रोत बारिश है। चाहे वह नदी हो, नहर या जमीन के अंदर मौजूद पानी का अथाह भंडार। सभी स्रोतों में जल की आपूर्ति बारिश ही करती है। वनस्पति शास्त्री सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉक्टर एसी मिश्रा ने कहा कि हम रोज जहर पानी में घोल रहे हैं और उसका सेवन भी कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर एसवी द्विवेदी ने बताया कि जलकुंभी एक घुसपैठिया पौधा है। जिसे वाटर लिली कहते हैं। जलकुंभी के पौधे धीरे- धीरे पूरे तालाब को ढंक लेते हैं और तब नीचे सूरज की रोशनी नहीं पहुंचने के कारण अन्य जलीय पौधे नष्ट हो जाते है। इसके अलावा जलकुंभी की जड़ें पानी की सारी ऑक्सीजन सोख लेती हैं और इसकी अम्लीयता भी बढ़ जाती है। इसका कोई प्राकृतिक भक्षक नहीं है। जिसके कारण वर्तमान में इसने अनेक तालाबों के इको परितंत्र को प्रभावित कर दिया।
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जिला समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि जल का मुख्य स्रोत बारिश है। चाहे वह नदी हो, नहर या जमीन के अंदर मौजूद पानी का अथाह भंडार। सभी स्रोतों में जल की आपूर्ति बारिश ही करती है। वनस्पति शास्त्री सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉक्टर एसी मिश्रा ने कहा कि हम रोज जहर पानी में घोल रहे हैं और उसका सेवन भी कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर एसवी द्विवेदी ने बताया कि जलकुंभी एक घुसपैठिया पौधा है। जिसे वाटर लिली कहते हैं। जलकुंभी के पौधे धीरे- धीरे पूरे तालाब को ढंक लेते हैं और तब नीचे सूरज की रोशनी नहीं पहुंचने के कारण अन्य जलीय पौधे नष्ट हो जाते है। इसके अलावा जलकुंभी की जड़ें पानी की सारी ऑक्सीजन सोख लेती हैं और इसकी अम्लीयता भी बढ़ जाती है। इसका कोई प्राकृतिक भक्षक नहीं है। जिसके कारण वर्तमान में इसने अनेक तालाबों के इको परितंत्र को प्रभावित कर दिया।
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