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धड़ल्ले से खुल रहे होटल, लाॅज
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Thu, 21 Apr 2016 12:20 AM IST
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- फोटो : toptenz
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जिले में मानकों की अनदेखी कर धड़ल्ले से होटल और लाज खोले जा रहे हैं। कई होटलों में तो आग लगने के दौरान बचाव के उपकरण भी नहीं लगाए गए हैं। नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन मानकों की अनदेखी कर बनाए गए इन होटलों और लाजों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। होटल मालिक नगर पालिका परिषद से न तो लाइसेंस ले रहे और न ही फायर व्रिगेड विभाग से एनओसी हासिल कर रहे। किया जा रहा है।
जिले और नगर पालिका परिषद क्षेत्र मेें मानकों और नियमों की अनदेखी करके कई लाज, होटल और मैरेज हालों का निर्माण किया गया हैं। वहीं कुछ लोग तो बाकायदा घरों को ही लाज और होटल में परिवर्तित कर इसका संचालन कर रहे हैँ। विंध्याचल में तो प्राय: सभी घर होटल और लाज में परिवर्तित हो गए हैं। विंध्याचल में खोले गए सैकड़ों होटल और लाज का विवरण जिला प्रशासन और पालिका के पास नहीं है।
नगर पालिका के कर अधीक्षक सुनील त्रिपाठी की मानें तो नगर पालिका क्षेत्र में मात्र 20 होटल और लाजों ने ही पंजीकरण कराया है, शेष होटल और लाज गैर कानूनी तरीके से संचालित हो रहे हैं। नगर पालिका क्षेत्र में बने होटलों में प्राय: आने जाने का एक ही रास्ता दिया गया है। सौंदर्यीकरण के चक्कर में संचालकों ने होटल को आगे से पूरी तरह पैक कर दिया है। ऐसे में आग लग जाए तो फायर बिग्रेड वहां पहुंच नहीं सकती हैं।
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सबसे ज्यादा परेशानी तो नगर में होटलों में परिवर्तित हो चुके घरों और विंध्याचल के होटलों में है। विंध्याचल में तो हर गली में लोगों ने अपने घरों को होटल और लाज का रुप दे दिया है। ऐसे में यदि अग्निकांड में बचाव मुश्किल है
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जिले और नगर पालिका परिषद क्षेत्र मेें मानकों और नियमों की अनदेखी करके कई लाज, होटल और मैरेज हालों का निर्माण किया गया हैं। वहीं कुछ लोग तो बाकायदा घरों को ही लाज और होटल में परिवर्तित कर इसका संचालन कर रहे हैँ। विंध्याचल में तो प्राय: सभी घर होटल और लाज में परिवर्तित हो गए हैं। विंध्याचल में खोले गए सैकड़ों होटल और लाज का विवरण जिला प्रशासन और पालिका के पास नहीं है।
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नगर पालिका के कर अधीक्षक सुनील त्रिपाठी की मानें तो नगर पालिका क्षेत्र में मात्र 20 होटल और लाजों ने ही पंजीकरण कराया है, शेष होटल और लाज गैर कानूनी तरीके से संचालित हो रहे हैं। नगर पालिका क्षेत्र में बने होटलों में प्राय: आने जाने का एक ही रास्ता दिया गया है। सौंदर्यीकरण के चक्कर में संचालकों ने होटल को आगे से पूरी तरह पैक कर दिया है। ऐसे में आग लग जाए तो फायर बिग्रेड वहां पहुंच नहीं सकती हैं।
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सबसे ज्यादा परेशानी तो नगर में होटलों में परिवर्तित हो चुके घरों और विंध्याचल के होटलों में है। विंध्याचल में तो हर गली में लोगों ने अपने घरों को होटल और लाज का रुप दे दिया है। ऐसे में यदि अग्निकांड में बचाव मुश्किल है