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Mirzapur News: अब राजकीय महिला चिकित्सालय में मुफ्त होगी एचबीए1सी जांच
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पीडीडीयू नगर के राजकीय महिला चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं की HbA1c जांच के लिए आई मशीन के बार
- फोटो : Self
पीडीडीयू नगर। राजकीय महिला चिकित्सालय में आने वाली गर्भवती महिलाओं को अब एचबीए1सी जांच के लिए निजी लैब के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अस्पताल में करीब 46 हजार रुपये की लागत से जांच मशीन स्थापित की गई है। इससे मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और 600 से 700 रुपये तक की बचत होगी। खासकर ऑपरेशन से प्रसव की तैयारी कर रही गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी होगी।
नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 250 से 300 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 100 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं जांच और परामर्श के लिए पहुंचती हैं। चिकित्सकों के अनुसार, ऑपरेशन से प्रसव कराने से पहले कई मामलों में एचबीए1सी जांच कराना जरूरी होता है। इसके माध्यम से गर्भवती महिला के शरीर में पिछले करीब तीन महीने के औसत ब्लड शुगर स्तर की जानकारी मिलती है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में शुगर का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में जांच रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि पिछले कुछ महीनों में रक्त में शुगर का स्तर कितना रहा है। रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक समय रहते शुगर नियंत्रित करने के लिए जरूरी सलाह और उपचार कर सकते हैं। इससे प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिलती है। अब तक इस जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता था। इसके लिए उन्हें 600 से 700 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। अस्पताल में मशीन स्थापित होने से यह सुविधा परिसर में ही उपलब्ध हो सकेगी। राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि एचबीए1सी परीक्षण, जिसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन परीक्षण के रूप में भी जाना जाता है, यह एक रक्त परीक्षण है जो पिछले दो से तीन महीनों में औसत रक्त शर्करा के स्तर को मापता है। यह इस बात की एक बड़ी तस्वीर प्रदान करता है कि रक्त शर्करा को कितनी अच्छी तरह से प्रबंधित किया गया है। उन्होंने बताया कि एचबीए1सी परीक्षण के लिए मशीन लग गई है। शीघ्र ही इससे जांच शुरू हो जाएगी। इससे गर्भवती महिलाओं के रक्त में दो से तीन माह के शर्करा के स्तर को मापने में मदद मिलेगी और उसके हिसाब से दवाएं दी जा सकेंगी।
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नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 250 से 300 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 100 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं जांच और परामर्श के लिए पहुंचती हैं। चिकित्सकों के अनुसार, ऑपरेशन से प्रसव कराने से पहले कई मामलों में एचबीए1सी जांच कराना जरूरी होता है। इसके माध्यम से गर्भवती महिला के शरीर में पिछले करीब तीन महीने के औसत ब्लड शुगर स्तर की जानकारी मिलती है।
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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में शुगर का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में जांच रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि पिछले कुछ महीनों में रक्त में शुगर का स्तर कितना रहा है। रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक समय रहते शुगर नियंत्रित करने के लिए जरूरी सलाह और उपचार कर सकते हैं। इससे प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिलती है। अब तक इस जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता था। इसके लिए उन्हें 600 से 700 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। अस्पताल में मशीन स्थापित होने से यह सुविधा परिसर में ही उपलब्ध हो सकेगी। राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि एचबीए1सी परीक्षण, जिसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन परीक्षण के रूप में भी जाना जाता है, यह एक रक्त परीक्षण है जो पिछले दो से तीन महीनों में औसत रक्त शर्करा के स्तर को मापता है। यह इस बात की एक बड़ी तस्वीर प्रदान करता है कि रक्त शर्करा को कितनी अच्छी तरह से प्रबंधित किया गया है। उन्होंने बताया कि एचबीए1सी परीक्षण के लिए मशीन लग गई है। शीघ्र ही इससे जांच शुरू हो जाएगी। इससे गर्भवती महिलाओं के रक्त में दो से तीन माह के शर्करा के स्तर को मापने में मदद मिलेगी और उसके हिसाब से दवाएं दी जा सकेंगी।
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