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देवी दरबार में भक्ति भाव से झुके सिर
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 12 Dec 2015 12:50 AM IST
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मार्ग शीर्ष अमावस्या तिथि पर विंध्य दरबार में दर्शन-पूजन करने के लिए आस्थावानों का तांता लगा रहा। गंगा में डुबकी लगाने के बाद मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धाभाव से दर्शन-पूजन कर मंगल कामना की।
फूलों से किया गया जगत जननी का भव्य श्रृंगार दर्शन कर भक्तजन निहाल हो उठे। विंध्याचल मंदिर के छत पर जहां साधक, साधना करने में तल्लीन दिखे, वहीं शहनाई की धुन पर मुंडन संस्कार भी हुआ।
शुक्रवार की भोर में मंगला आरती के बाद से ही मंदिर में दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक चलता रहा। नारियल-चुनरी, माला-फूल, लाचीदाना, रोरी-रक्षा आदि डलिया में लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, जहां मां विंध्यवासिनी के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भावविह्वल हो उठे।
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मंदिर पहुंचने के बाद किसी ने गर्भगृह से तो किसी ने झांकी से मां का दीदार किया। घंटा-घड़ियाल, शंख, बड़ा एवं मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था।
धाम क्षेत्र की कोतवाली गली, बच्चा पाठक की गली, न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी मार्ग पर कतार में खड़े आस्थावानों के कदम मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे।
भक्तों ने विधिवत मां का दर्शन-पूजन करने के बाद मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जा कर शीश नवाया। मंदिर के गुंबद सहित हवन कुंड का परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजा देवी के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया।
मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते पुलिस-पीएसी के जवान मुस्तैद रहे।
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फूलों से किया गया जगत जननी का भव्य श्रृंगार दर्शन कर भक्तजन निहाल हो उठे। विंध्याचल मंदिर के छत पर जहां साधक, साधना करने में तल्लीन दिखे, वहीं शहनाई की धुन पर मुंडन संस्कार भी हुआ।
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शुक्रवार की भोर में मंगला आरती के बाद से ही मंदिर में दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक चलता रहा। नारियल-चुनरी, माला-फूल, लाचीदाना, रोरी-रक्षा आदि डलिया में लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, जहां मां विंध्यवासिनी के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भावविह्वल हो उठे।
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मंदिर पहुंचने के बाद किसी ने गर्भगृह से तो किसी ने झांकी से मां का दीदार किया। घंटा-घड़ियाल, शंख, बड़ा एवं मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था।
धाम क्षेत्र की कोतवाली गली, बच्चा पाठक की गली, न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी मार्ग पर कतार में खड़े आस्थावानों के कदम मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे।
भक्तों ने विधिवत मां का दर्शन-पूजन करने के बाद मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जा कर शीश नवाया। मंदिर के गुंबद सहित हवन कुंड का परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजा देवी के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया।
मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते पुलिस-पीएसी के जवान मुस्तैद रहे।