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मिर्जापुर: 15 करोड़ खर्च कर लगेगा कूड़ा निस्तारण संयंत्र
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नगर पालिका क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन-दो के तहत एक अन्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है। लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च कर इस संयंत्र की शीघ्र ही स्थापना की जाएगी। इसके बाद नगर में निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की समस्या का स्थायी तौर पर समाधान होने की उम्मीद है।
नगर पालिका मिर्जापुर में 38 वार्ड हैं। तकरीबन पांच लाख की आबादी इस क्षेत्र में निवास करती है। वर्तमान में प्रतिदिन नगर पालिका क्षेत्र से लगभग 70 टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण की समस्या गंभीर बनी हुई है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 15 करोड़ की योजना को स्वीकृति दी है। उधर, प्रस्ताव तो स्वीकृत हो गया है, लेकिन अब इसके लिए एक हेक्टेयर अथवा चार बीघा जमीन की दरकार है।
इसके लिए जिला प्रशासन व मंडलायुक्त के स्तर से आगे की प्रक्त्रिस्या पूरी की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह संयंत्र भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लगाया जा रहा है। यहां दोगुना क्षमता की मशीनें लगाई जाएंगी। इस समय तो 70 टन कूड़ा निकल रहा है, जबकि इसकी प्रस्तावित क्षमता 140 टन प्रतिदिन की होगी। इससे नगर से निकलने वाले कूड़ा के निस्तारण की समस्या का स्थायी रूप से समाधान होने की उम्मीद है।
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स्वच्छ भारत मिशन की जिला प्रबंधक संजय सिंह का कहना है कि योजना स्वीकृत है। केंद्र सरकार की इस योजना के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। एक-दो वर्ष के अंदर सफाई व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन हो सकेगा।
कार्यस्थल पर कूड़ा निस्तारण के लिए तीन संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। इसमें से एक संयंत्र गीला कूड़ के लिए, दूसरा सूखा कूड़ा के लिए और तीसरा सेनेटरी नैपकीन व बच्चों की नैपी के निस्तारण लगाए जाने का प्रस्ताव है। इसको इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि किसी भी प्रकार का कूड़ा निस्तारण के लिए शेष न रह जाय। जो भी कचरा आए, उसका प्रबंधन शत प्रतिशत हो।
उधर, नगर के पास टांड़ गांव में जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र लगाया जा रहा था, वह कानूनी लड़ाई के चलते अधर में लटक गया है। जो मशीनें वहां लगाई गई थीं, वे भी अब खराब हो रही हैं। इस संयंत्र को साढ़े 11 करोड़ की स्वीकृत योजना के तहत लगाया जा रहा था। इसके लिए साढ़े छह करोड़ रुपये जारी भी हो गए थे, लेकिन अब पूरी योजना अधर में लटक गई है। इसको देखते हुए नए संयंत्र की जरूरत महसूस की जा रही है।
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नगर पालिका मिर्जापुर में 38 वार्ड हैं। तकरीबन पांच लाख की आबादी इस क्षेत्र में निवास करती है। वर्तमान में प्रतिदिन नगर पालिका क्षेत्र से लगभग 70 टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण की समस्या गंभीर बनी हुई है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 15 करोड़ की योजना को स्वीकृति दी है। उधर, प्रस्ताव तो स्वीकृत हो गया है, लेकिन अब इसके लिए एक हेक्टेयर अथवा चार बीघा जमीन की दरकार है।
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इसके लिए जिला प्रशासन व मंडलायुक्त के स्तर से आगे की प्रक्त्रिस्या पूरी की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह संयंत्र भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लगाया जा रहा है। यहां दोगुना क्षमता की मशीनें लगाई जाएंगी। इस समय तो 70 टन कूड़ा निकल रहा है, जबकि इसकी प्रस्तावित क्षमता 140 टन प्रतिदिन की होगी। इससे नगर से निकलने वाले कूड़ा के निस्तारण की समस्या का स्थायी रूप से समाधान होने की उम्मीद है।
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स्वच्छ भारत मिशन की जिला प्रबंधक संजय सिंह का कहना है कि योजना स्वीकृत है। केंद्र सरकार की इस योजना के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। एक-दो वर्ष के अंदर सफाई व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन हो सकेगा।
कार्यस्थल पर कूड़ा निस्तारण के लिए तीन संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। इसमें से एक संयंत्र गीला कूड़ के लिए, दूसरा सूखा कूड़ा के लिए और तीसरा सेनेटरी नैपकीन व बच्चों की नैपी के निस्तारण लगाए जाने का प्रस्ताव है। इसको इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि किसी भी प्रकार का कूड़ा निस्तारण के लिए शेष न रह जाय। जो भी कचरा आए, उसका प्रबंधन शत प्रतिशत हो।
उधर, नगर के पास टांड़ गांव में जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र लगाया जा रहा था, वह कानूनी लड़ाई के चलते अधर में लटक गया है। जो मशीनें वहां लगाई गई थीं, वे भी अब खराब हो रही हैं। इस संयंत्र को साढ़े 11 करोड़ की स्वीकृत योजना के तहत लगाया जा रहा था। इसके लिए साढ़े छह करोड़ रुपये जारी भी हो गए थे, लेकिन अब पूरी योजना अधर में लटक गई है। इसको देखते हुए नए संयंत्र की जरूरत महसूस की जा रही है।