{"_id":"57cdc5434f1c1be906317198","slug":"ganga-slit-reverence-reached-chunar","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा को चीरते श्रद्धा पहुंची चुनार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा को चीरते श्रद्धा पहुंची चुनार
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Tue, 06 Sep 2016 12:49 AM IST
विज्ञापन
श्रद्धा चुनार में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तैराक श्रद्धा शुक्ला सोमवार की सुबह नगर के कचहरी घाट से सुबह आठ बजे यात्रा शुरू कर सांय सात बजे चुनार के बालूघाट पर पहुंची, जहां उसका जोरदार स्वागत किया गया। छोटी उम्र में बड़े लक्ष्य को लेकर निकली श्रद्धा गंगा की लहराें को चीरते हुए जब चुनार घाट पहुंची तो पहले से इंतजार कर रही भीड़ ने उसका हौसला आफजाई किया और लक्ष्य प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया।
सोमवार की सुबह आठ बजे नगर के कचहरी घाट से बुलंद हौसलों से लबरेज तैराक श्रद्धा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जब गंगा में तैरने के लिए उतरी तो लोगाें ने हर-हर महादेव के जयकारे के साथ मंगलकामना की। कचहरी घाट से गंगा में तैरते हुए वह जिले के पहाड़ी व सीखड़ ब्लाक को पार करते हुए श्रद्धा सायंकाल सात बजे चुनार के बालूघाट पहुंची। पड़री संवाददाता के अनुसार श्रद्धा शुक्ला सिटी ब्लाक से जब आगे बड़ी पहाड़ ब्लाक की सीमा में पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे पहुंची। उसके बाद वह छीतमपट्टी व बेदौली होते हुए श्रद्धा करार व मोड़ के कारण गंगा के उत्तर तरफ से अपनी यात्रा की।
स्वागत के लिए हजाराें की संख्या में लोग श्रद्धा के स्वागत के लिए जुटे रहे। लोगाें को जब यह खबर लगी कि श्रद्धा गंगा के उत्तर दिशा की तरफ से अपनी यात्रा पूरी कर रही है तो बड़ी संख्या में लोग नाव के सहारे उस पार जाकर उसका स्वागत किए, वहीं श्रद्धा द्वारा गंगा में उत्तर दिशा के रास्ते से जाने से अधिकांश लोग मायूस लौट गए। सीखड़ संवाददाता के अनुसार श्रद्धा शुक्ला सीखड़ ब्लाक की सीमा गोरईयां घाट पर सायंकाल पांच बजे पहुंची, जहां उसका माल्यार्पण कर जोरदार स्वगत किया गया।
विज्ञापन
श्रद्धा गंगा से बाहर नहीं निकली किनारे से ही सभी का अभिवादन किया। चंद मिनट ठहरने के दौरान कई लोगाें ने श्रद्धा का माल्यार्पण कर स्वागत किया। तत्पश्चात श्रद्धा शुक्ला ने गंगा के रास्ते प्रेमापुरघाट होते हुए अगले पड़ाव के निकल पड़ी। चुनार संवाददाता के अनुसार सायंकाल सात बजे श्रद्धा शुक्ला चुनार के बालूघाट पहुंची, जहां उसका जोरदार स्वागत किया गया। बालूघाट स्थित उग्र वाचनालय पहुंची, जहां पर श्रद्धा को मिर्जापुर जिला तैराकी संघ की ओर से अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त तैराक चुनार के कैलाश निषाद व संघ के कोच महेंद्र प्रसाद निषाद ने स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
चुनार के बालूघाट व उग्र वाचनालय में करीब एक घंटे तक विश्राम किया, जहां पर चुनार के साहित्यकाराें की तरफ से कमलेश्वर कमल ने स्मृति चिह्न भेंटकर श्रद्धा का स्वागत किया। बालू घाट स्थित उग्र वाचनालय में एक घंटे के विश्राम के बाद सड़क के रास्ते से शाम साढ़े आठ बजे वाराणसी के लिए निकल गई। श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला ने बताया कि श्रद्धा मंगलवार की सुबह सात बजे चुनार के बालूघाट से अपनी गंगा यात्रा पुन: शुरू कर अपने अंतिम पड़ाव वाराणसी पहुंचेगी।
विज्ञापन
सोमवार की सुबह आठ बजे नगर के कचहरी घाट से बुलंद हौसलों से लबरेज तैराक श्रद्धा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जब गंगा में तैरने के लिए उतरी तो लोगाें ने हर-हर महादेव के जयकारे के साथ मंगलकामना की। कचहरी घाट से गंगा में तैरते हुए वह जिले के पहाड़ी व सीखड़ ब्लाक को पार करते हुए श्रद्धा सायंकाल सात बजे चुनार के बालूघाट पहुंची। पड़री संवाददाता के अनुसार श्रद्धा शुक्ला सिटी ब्लाक से जब आगे बड़ी पहाड़ ब्लाक की सीमा में पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे पहुंची। उसके बाद वह छीतमपट्टी व बेदौली होते हुए श्रद्धा करार व मोड़ के कारण गंगा के उत्तर तरफ से अपनी यात्रा की।
विज्ञापन
स्वागत के लिए हजाराें की संख्या में लोग श्रद्धा के स्वागत के लिए जुटे रहे। लोगाें को जब यह खबर लगी कि श्रद्धा गंगा के उत्तर दिशा की तरफ से अपनी यात्रा पूरी कर रही है तो बड़ी संख्या में लोग नाव के सहारे उस पार जाकर उसका स्वागत किए, वहीं श्रद्धा द्वारा गंगा में उत्तर दिशा के रास्ते से जाने से अधिकांश लोग मायूस लौट गए। सीखड़ संवाददाता के अनुसार श्रद्धा शुक्ला सीखड़ ब्लाक की सीमा गोरईयां घाट पर सायंकाल पांच बजे पहुंची, जहां उसका माल्यार्पण कर जोरदार स्वगत किया गया।
विज्ञापन
श्रद्धा गंगा से बाहर नहीं निकली किनारे से ही सभी का अभिवादन किया। चंद मिनट ठहरने के दौरान कई लोगाें ने श्रद्धा का माल्यार्पण कर स्वागत किया। तत्पश्चात श्रद्धा शुक्ला ने गंगा के रास्ते प्रेमापुरघाट होते हुए अगले पड़ाव के निकल पड़ी। चुनार संवाददाता के अनुसार सायंकाल सात बजे श्रद्धा शुक्ला चुनार के बालूघाट पहुंची, जहां उसका जोरदार स्वागत किया गया। बालूघाट स्थित उग्र वाचनालय पहुंची, जहां पर श्रद्धा को मिर्जापुर जिला तैराकी संघ की ओर से अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त तैराक चुनार के कैलाश निषाद व संघ के कोच महेंद्र प्रसाद निषाद ने स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
चुनार के बालूघाट व उग्र वाचनालय में करीब एक घंटे तक विश्राम किया, जहां पर चुनार के साहित्यकाराें की तरफ से कमलेश्वर कमल ने स्मृति चिह्न भेंटकर श्रद्धा का स्वागत किया। बालू घाट स्थित उग्र वाचनालय में एक घंटे के विश्राम के बाद सड़क के रास्ते से शाम साढ़े आठ बजे वाराणसी के लिए निकल गई। श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला ने बताया कि श्रद्धा मंगलवार की सुबह सात बजे चुनार के बालूघाट से अपनी गंगा यात्रा पुन: शुरू कर अपने अंतिम पड़ाव वाराणसी पहुंचेगी।