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अनाज से लेकर सब्जी तक महंगा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:19 AM IST
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लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। अनाज, तेल हो या फिर सब्जी सभी के दाम आसमान छू रहे हैं। दामों में रोजाना उछाल के चलते घर का बजट बिगड़ा जा रहा है। खास तौर से इसका असर मध्यम वर्गीय परिवार को हलाकान किए है। दिन प्रतिदिन बढ़ रही महंगाई को कोई सूखे का असर तो कोई सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता को इसके लिए जिम्मेदार बता रहा है।
भीषण गर्मी शबाब पर है ऐसे में बढ़ती महंगाई ने लोगों पर दोहरी मार की है। गेहूं, आलू, तेल चीनी और दाल जैसी रसोई में रोजमर्रा की जरूरत वाले अनाज की कीमतों में बेहिसाब बढोत्तरी हुई है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों में परेशानी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि सरकार की नीतियों के चलते कीमतों में आग लग रही है। रमईपट्टी निवासी कंप्यूटर आपरेटर अमित कुमार बताते हैं कि सरकार ने अच्छे दिन दिखाने का वादा किया था लेकिन वादा वादा ही रह गया। अनाज महंगा कर मोबाइल सस्ता करने से किसी गरीब को आखिर कैसे निवाला मिल सकता है। सब्जी और आटा दाल जैसी जरूरी चीजों के दाम पर सरकार को नियंत्रण रखना चाहिए।
साधवाड़ा गली निवासी दुकानदार होरीलाल ने कहा कि सरकार को महंगाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कहा कि जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से घर का खर्च बढ़ता चला जा रहा है जबकि आमदनी उतनी ही है। ऐसे में आदमी अपना जीवनस्तर बराबर कैसे रख सकेगा। सरकार के चाहिए कि व इस पर कुछ करे। बरियाघाट निवासी नीरज खन्ना ने कहा कि महंगाई के लिए सरकार को दोष देना ठीक नहीं है। विगत चार पांच वर्षों से पड़ रहे सूखे की वजह से अनाज के उत्पादन पर असर पड़ा है। खाने वाले अधिक हैं जबकि क उत्पादन कम हो रहा है तो महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। हां सरकार को मुनाफाखोरी करने वालों पर लगाम जरूर कसना चाहिए। तब जाकर कुछ महंगाई पर अंकुश लगेगा अन्यथा महंगाई अपने चरम पर इसी तरह बढ़ती रहेगी और गरीब बेचारा भूखों मरने की कगार पर चला जाएगा। केंद्र सरकार अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए।
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अध्यापक अर्पित श्रीवास्तव ने कहा कि महंगाई पर रोक लगना जरूरी हो गया है। महंगाई ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ना शुरु कर दिया है। ऐसे में गरीबों का क्या हाल होगा समझा जा सकता है। कहा कि सरकार को अपने वादे पर फिर से सोचते हुए महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। अन्यथ्ाा आने वाले चुनाव में जनता ख्ाुद ही इस बात का फैसला कर लेेगी।
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भीषण गर्मी शबाब पर है ऐसे में बढ़ती महंगाई ने लोगों पर दोहरी मार की है। गेहूं, आलू, तेल चीनी और दाल जैसी रसोई में रोजमर्रा की जरूरत वाले अनाज की कीमतों में बेहिसाब बढोत्तरी हुई है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों में परेशानी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि सरकार की नीतियों के चलते कीमतों में आग लग रही है। रमईपट्टी निवासी कंप्यूटर आपरेटर अमित कुमार बताते हैं कि सरकार ने अच्छे दिन दिखाने का वादा किया था लेकिन वादा वादा ही रह गया। अनाज महंगा कर मोबाइल सस्ता करने से किसी गरीब को आखिर कैसे निवाला मिल सकता है। सब्जी और आटा दाल जैसी जरूरी चीजों के दाम पर सरकार को नियंत्रण रखना चाहिए।
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साधवाड़ा गली निवासी दुकानदार होरीलाल ने कहा कि सरकार को महंगाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कहा कि जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से घर का खर्च बढ़ता चला जा रहा है जबकि आमदनी उतनी ही है। ऐसे में आदमी अपना जीवनस्तर बराबर कैसे रख सकेगा। सरकार के चाहिए कि व इस पर कुछ करे। बरियाघाट निवासी नीरज खन्ना ने कहा कि महंगाई के लिए सरकार को दोष देना ठीक नहीं है। विगत चार पांच वर्षों से पड़ रहे सूखे की वजह से अनाज के उत्पादन पर असर पड़ा है। खाने वाले अधिक हैं जबकि क उत्पादन कम हो रहा है तो महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। हां सरकार को मुनाफाखोरी करने वालों पर लगाम जरूर कसना चाहिए। तब जाकर कुछ महंगाई पर अंकुश लगेगा अन्यथा महंगाई अपने चरम पर इसी तरह बढ़ती रहेगी और गरीब बेचारा भूखों मरने की कगार पर चला जाएगा। केंद्र सरकार अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए।
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अध्यापक अर्पित श्रीवास्तव ने कहा कि महंगाई पर रोक लगना जरूरी हो गया है। महंगाई ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ना शुरु कर दिया है। ऐसे में गरीबों का क्या हाल होगा समझा जा सकता है। कहा कि सरकार को अपने वादे पर फिर से सोचते हुए महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। अन्यथ्ाा आने वाले चुनाव में जनता ख्ाुद ही इस बात का फैसला कर लेेगी।