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Mirzapur News: मेस में खाना खत्म हो जाता है, नाश्ता नहीं मिलता, एक कमरे में रहते हैं तीन छात्र, विरोध में मेडिकल कॉलेज के छात्र धरने पर बैठे
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मेडिकल कालेज के बाहर प्रदर्शन करते छात्र। स्रोत- वीडियो
- सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के बाहर किया प्रदर्शन
मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं बिजली, पानी, आवास, भोजन और लाइब्रेरी की समस्याओं के विरोध में रविवार सुबह धरने पर बैठ गए। सैकड़ों विद्यार्थियों के धरने पर बैठने से अफरा तफरी की स्थिति रही। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर मूलभूत सुविधाओं में सुधार नहीं करने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि मेस में खाना खत्म हो जाता है, नाश्ता नहीं मिलता, एक कमरे में तीन छात्रों को रखा जाता है।
छात्रों को समझाने के लिए दोपहर एक बजे सीएमएस और प्रॉक्टर पहुंचे, लेकिन छात्र नहीं माने। सूचना पर देहात और शहर कोतवाली पुलिस भी पहुंची। प्राचार्य को भी सूचना दी गई। इसके बाद प्राचार्य डॉ. संजीव सिंह, सीओ सदर सदानंद सिंह और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। दोपहर करीब एक बजे छात्रों से वार्ता शुरू हुई। अधिकारियों ने छात्रों की समस्याएं सुनकर निराकरण का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया।
एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र श्याम सिंह ने कहा कि सुबह से बिजली नहीं थी। पीने और नहाने के लिए पानी की समस्या हो गई। जनरेटर होने के बावजूद बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि परिसर के बाहर बिजली आपूर्ति हो रही थी। आरोप लगाया कि छात्रावास में एक कमरे में तीन छात्रों को रखा गया है। पांच बैचों के लगभग 500 छात्रों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं है। उनका कहना था कि वर्ष 2026 के नए बैच के आने पर आवास की समस्या और बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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यह भी आरोप लगाया कि मेस में नाश्ता नहीं मिलता और कई बार भोजन भी समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी शाम सात बजे बंद कर दी जाती है। वहां उपलब्ध पुस्तकों की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। छात्रा ऐश्वर्या चौबे ने कहा कि परीक्षा के समय भी बिजली चली जाती है। इंटर्नशिप करने वाले छात्र-छात्राओं को कॉलेज लौटने के बाद भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार समस्याओं से कॉलेज प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
छात्र अमित कुमार पटेल ने कहा कि समस्याओं की जानकारी कई बार दी गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आरोप था कि मेडिकल कॉलेज में पिछले दो वर्षों से बिजली, पानी और मेस में भोजन की समस्या बनी हुई है। जनरेटर होने के बावजूद उसका उपयोग छात्रों के लिए नहीं किया जाता।
प्रमुख समस्याएं
बिजली कटने पर जनरेटर नहीं चलाया जाता।
मेस में नाश्ता नहीं मिलता, कई बार भोजन समाप्त हो जाता है।
लाइब्रेरी शाम सात बजे बंद कर दी जाती है।
लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों की गुणवत्ता पर छात्रों ने सवाल उठाए।
छात्रावास में एक कमरे में तीन छात्रों को रखा गया है।
वर्जन
सभी छात्रों की समस्याएं सुनी गईं। सुबह आठ बजे बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। बिजली आने के बाद परिसर के पैनल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण समस्या उत्पन्न हुई, इसे ठीक करा दिया गया। शाम चार बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। वर्तमान में 300 बेड के छात्रावास का उपयोग किया जा रहा है। 300 बेड का नया छात्रावास बन रहा है। उसके बन जाने से आवास की समस्या दूर हो जाएगी। मेस की समस्या के समाधान के लिए छात्रों को सहकारी (कोऑपरेटिव) मेस संचालित करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. संजीव सिंह,प्राचार्य
जनरेटर के लिए डीजल खपत की जांच की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि छात्रावास में जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद उसे नहीं चलाया जाता। पूछने पर बताया जाता है कि जनरेटर केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए है। छात्रों ने जनरेटर के संचालन में डीजल की खपत और उससे संबंधित लॉगबुक की जांच कराने की मांग की।
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मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं बिजली, पानी, आवास, भोजन और लाइब्रेरी की समस्याओं के विरोध में रविवार सुबह धरने पर बैठ गए। सैकड़ों विद्यार्थियों के धरने पर बैठने से अफरा तफरी की स्थिति रही। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर मूलभूत सुविधाओं में सुधार नहीं करने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि मेस में खाना खत्म हो जाता है, नाश्ता नहीं मिलता, एक कमरे में तीन छात्रों को रखा जाता है।
छात्रों को समझाने के लिए दोपहर एक बजे सीएमएस और प्रॉक्टर पहुंचे, लेकिन छात्र नहीं माने। सूचना पर देहात और शहर कोतवाली पुलिस भी पहुंची। प्राचार्य को भी सूचना दी गई। इसके बाद प्राचार्य डॉ. संजीव सिंह, सीओ सदर सदानंद सिंह और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। दोपहर करीब एक बजे छात्रों से वार्ता शुरू हुई। अधिकारियों ने छात्रों की समस्याएं सुनकर निराकरण का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया।
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एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र श्याम सिंह ने कहा कि सुबह से बिजली नहीं थी। पीने और नहाने के लिए पानी की समस्या हो गई। जनरेटर होने के बावजूद बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि परिसर के बाहर बिजली आपूर्ति हो रही थी। आरोप लगाया कि छात्रावास में एक कमरे में तीन छात्रों को रखा गया है। पांच बैचों के लगभग 500 छात्रों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं है। उनका कहना था कि वर्ष 2026 के नए बैच के आने पर आवास की समस्या और बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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यह भी आरोप लगाया कि मेस में नाश्ता नहीं मिलता और कई बार भोजन भी समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी शाम सात बजे बंद कर दी जाती है। वहां उपलब्ध पुस्तकों की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। छात्रा ऐश्वर्या चौबे ने कहा कि परीक्षा के समय भी बिजली चली जाती है। इंटर्नशिप करने वाले छात्र-छात्राओं को कॉलेज लौटने के बाद भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार समस्याओं से कॉलेज प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
छात्र अमित कुमार पटेल ने कहा कि समस्याओं की जानकारी कई बार दी गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आरोप था कि मेडिकल कॉलेज में पिछले दो वर्षों से बिजली, पानी और मेस में भोजन की समस्या बनी हुई है। जनरेटर होने के बावजूद उसका उपयोग छात्रों के लिए नहीं किया जाता।
प्रमुख समस्याएं
बिजली कटने पर जनरेटर नहीं चलाया जाता।
मेस में नाश्ता नहीं मिलता, कई बार भोजन समाप्त हो जाता है।
लाइब्रेरी शाम सात बजे बंद कर दी जाती है।
लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों की गुणवत्ता पर छात्रों ने सवाल उठाए।
छात्रावास में एक कमरे में तीन छात्रों को रखा गया है।
वर्जन
सभी छात्रों की समस्याएं सुनी गईं। सुबह आठ बजे बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। बिजली आने के बाद परिसर के पैनल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण समस्या उत्पन्न हुई, इसे ठीक करा दिया गया। शाम चार बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। वर्तमान में 300 बेड के छात्रावास का उपयोग किया जा रहा है। 300 बेड का नया छात्रावास बन रहा है। उसके बन जाने से आवास की समस्या दूर हो जाएगी। मेस की समस्या के समाधान के लिए छात्रों को सहकारी (कोऑपरेटिव) मेस संचालित करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. संजीव सिंह,प्राचार्य
जनरेटर के लिए डीजल खपत की जांच की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि छात्रावास में जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद उसे नहीं चलाया जाता। पूछने पर बताया जाता है कि जनरेटर केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए है। छात्रों ने जनरेटर के संचालन में डीजल की खपत और उससे संबंधित लॉगबुक की जांच कराने की मांग की।