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Dussehra 2023: विंध्याचल में जलाने से पहले ही लूट लिया जाता है रावण का पुतला, बहुत खास इसकी मान्यता

Sat, 21 Oct 2023 01:23 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 21 Oct 2023 01:23 PM IST
सार

देशभर में बुराई के प्रतीक रावण पुतले का दहन किया जाता है। अलग-अलग स्थान पर रावण से जुड़ी भिन्न-भिन्न मान्यताएं हैं। देशभर में बुराई के प्रतीक रावण पुतले का दहन किया जाता है। अलग-अलग स्थान पर रावण से जुड़ी भिन्न-भिन्न मान्यताएं हैं। 

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Dussehra 2023 Ravana effigy is looted even before being burnt in Vindhyachal Mirzapur
रावण दहण की तैयारी - फोटो : amar ujala

विस्तार

धर्मनगरी काशी एवं तीर्थराज प्रयाग के मध्य बसे मिर्जापुर जिले का विंध्याचल एक मात्र ऐसी जगह है जहां रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि उसे लूट लिया जाता है।  मान्यता है कि रावण के पुतले से निकले अंश को घर में रखने से सुख समृद्धि आती है। पुतले के अंश को रखने से घर से दरिद्रता दूर होती है और सुख समृद्धि का आगमन होता है।

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विंध्य नगरी में रावण से जुड़ी ऐसी एक दिलचस्प मान्यता है जो सैकड़ों वर्ष पुरानी है। विगत कई वर्षों से विन्ध्याचल धाम क्षेत्र के बंगाली चौराहे पर विजयादशमी पर्व मनाया जाता है। राष्ट्रीय विन्ध्य पर्यावरण सुरक्षा एवं धर्मोत्थान समिति द्वारा आयोजित किया जाता है। धार्मिक परंपराओं में ऐसे अजीबोगरीब रीति रिवाज और मान्यताओं का भी समावेश है, जिन पर विश्वास करने का अपनी वजह है।
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देशभर में बुराई के प्रतीक रावण पुतले का दहन किया जाता है। अलग-अलग स्थान पर रावण से जुड़ी भिन्न-भिन्न मान्यताएं हैं। कहीं रावण के पुतले को जलाया जाता है।
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ये भी पढ़ें: विंध्याचल मंदिर में पुलिस और पंडे भिड़े, सप्तमी तिथि पर उमड़ा मां के दर्शनार्थियों का रेला

कहीं तलवार से धड़ अलग किया जाता है तो कहीं पुतले को ना जलने की भी अपनी धारणा है लेकिन मां विंध्यवासिनी धाम में रावण से जुड़ी ऐसी मान्यताएं बताते हैं जो आप को हैरान कर देगी। यहां रावण के पुतले का दहन नहीं होता बल्कि उसे लूट कर लोग अपने-अपने घर में रखते हैं। तीर्थ पुरोहित अजय त्रिपाठी ने बताया कि ये बहुत पुरानी परंपरा है जो आज भी चली आ रही है। 

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