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Mirzapur News: गर्मी में आक्रामक हो रहे कुत्ते और बंदर, हमले 50 प्रतिशत बढ़े<bha>;</bha> रोज आ रहे 150 मामले
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मंडलीय अस्पताल में एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगाते फार्मासिस्ट दिनेश। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। जिले में गर्मी बढ़ने के साथ आक्रामक हो रहे कुत्ते और बंदरों के हमले 50 फीसदी तक बढ़े हैं। मंडलीय अस्पताल में हर दिन 150 मामले आ रहे हैं। अप्रैल की तुलना में मई में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचने वाले मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण जानवरों का स्वभाव अधिक आक्रामक हो जाता है, हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं।
मंडलीय अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में प्रतिदिन औसतन 100 मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे थे, जबकि मई में यह संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो गई। इनमें कुत्तों के साथ-साथ बंदरों के काटने के मामले भी शामिल हैं। कुत्ता या बंदर के काटने पर चार बार एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। सिर्फ मंडलीय अस्पताल में मई में 2200 लोगों को रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। इनमें 1050 लोगों को पहली डोज दी गई। पहली डोज पाने वालों में 880 कुत्ते, 100 बंदर और 70 बिल्ली के काटने के बाद एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे।
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि गर्मी में कुत्ते और बंदर भोजन व पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में अधिक पहुंचते हैं। कई बार लोग उन्हें भगाने या छेड़ने का प्रयास करते हैं, इससे वे अक्रामक होकर हमला कर देते हैं। इसके अलावा अत्यधिक तापमान जानवरों में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ा देता है, जिससे उनके आक्रामक व्यवहार की संभावना बढ़ जाती है।
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उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में खुले में फेंका जाने वाला खाद्य पदार्थ और कूड़ा भी बंदरों व आवारा कुत्तों को आबादी की ओर आकर्षित करता है। गर्मी में जलस्रोत सूखने के कारण जानवर इंसानी बस्तियों के आसपास भटकते रहते हैं। इंसानों और जानवरों का संपर्क बढ़ने से ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं।
केस-1
स्कूल से लौटते समय बंदर ने किया हमला
नगर के वासलीगंज निवासी 12 वर्षीय आर्यन स्कूल से घर लौट रहा था। रास्ते में एक बंदर ने अचानक हाथ में लिए टिफिन को छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर बंदर ने काट लिया। परिजन तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई।
केस-2
घर के बाहर खड़ी महिला को कुत्ते ने काटा
देहात कोतवाली क्षेत्र के बरकछा निवासी 32 वर्षीय रीना देवी घर के बाहर खड़ी थीं। इसी दौरान एक कुत्ता अचानक झपट पड़ा और पैर में काट लिया। उपचार के लिए उन्हें अस्पताल पहुंचना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़े मामले
विंध्याचल: मई में 202 मामले आए
जमालपुर: मई में 217 लोगों को एंटी रैबीज लगानी पड़ी। इसमें 81 पालतू कुत्ते, 85 बाहरी कुत्ते, 17 बिल्ली और 37 बंदर काटने के मामले हैं।
पटेहरा: मई में 97 नए मरीजों को रैबीज लगाया गया। इनमें बिल्ली के 20, बंदर का एक और कुत्ते के 76 मरीज शामिल हैं।
सीखड़: मई महीने में 201 लोगों का टीकाकरण किया गया।
राजगढ़: सीएचसी में मई में 204 लोगों को कुत्ता, बिल्ली और बंदर काटने पर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया।
चुनार: सीएचसी चेचरी मोड़ पर मई में कुत्ता, बंदर और बिल्ली काटने के 358 मरीज आए। इनमें 157 कुत्तों के काटने के मामले थे।
मड़िहान: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मई में एंटी रैबीज के 122 वायल में से 52 वायल खर्च हुए।
पड़री: पीएचसी पर मई महीने में कुत्ता, बंदर, बिल्ली व सियार के काटने के 271 मरीज आए। इनमें 232 कुत्ता, 22 बंदर, 13 बिल्ली और चार सियार के मामले थे।
कछवां: सीएचसी पर मई महीने में 405 मामले आए। इनमें कुत्ता काटने के 341, बिल्ली के 53 और बंदर के 10 मामले थे।
हलिया: उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया में मई माह में 173 लोगों को एंटी रैबीज लगाया गया।
लालगंज: सीएचसी में मई में 187 कुत्ता, 20 बिल्ली और 15 बंदर काटने के मामले आए।
चील्ह: पीएचसी में प्रतिदिन 15 से 20 लोगों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
इमिलियाचट्टी: मई में 51 लोगों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया।
विजयपुर पीएचसी में इंजेक्शन नहीं
जिगना। जिगना पीएचसी के विजयपुर सर्रोई में अप्रैल में 1201 और मई माह में 972 लोगों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। मंगलवार को रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गया। फार्मासिस्ट भाई लाल यादव ने बताया कि डिमांड भेजी गई है। बुधवार को इंजेक्शन आ जाएगा।
फ्रीज चोरी होने से नहीं रखे जा रहे एंटी रैबीज
अदलहाट। न्यू पीएचसी अदलहाट के फार्मासिस्ट राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 29 मई 2025 को फ्रीज चोरी हो जाने से आज तक न तो नई फ्रीज मिली और न ही एंटी रैबीज इंजेक्शन आया। इंजेक्शन उपलब्ध न होने से कुत्ता, बंदर आदि के काटने के मरीज यहां नहीं आते हैं। इस क्षेत्र के मरीज जमालपुर अथवा चुनार चले जाते हैं।
वर्जन
अप्रैल की तुलन में मई में मरीजों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ी है। गर्मी में जानवर अधिक आक्रामक हो जाते हैं। लोगों को चाहिए कि वे कुत्तों और बंदरों को न छेड़ें। काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से धोकर अस्पताल पहुंचें। एंटी रैबीज वैक्सीन अवश्य लगवाएं। अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन मौजूद हैं।
— डॉ. सीएल वर्मा, सीएमओ
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मंडलीय अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में प्रतिदिन औसतन 100 मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे थे, जबकि मई में यह संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो गई। इनमें कुत्तों के साथ-साथ बंदरों के काटने के मामले भी शामिल हैं। कुत्ता या बंदर के काटने पर चार बार एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। सिर्फ मंडलीय अस्पताल में मई में 2200 लोगों को रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। इनमें 1050 लोगों को पहली डोज दी गई। पहली डोज पाने वालों में 880 कुत्ते, 100 बंदर और 70 बिल्ली के काटने के बाद एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे।
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संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि गर्मी में कुत्ते और बंदर भोजन व पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में अधिक पहुंचते हैं। कई बार लोग उन्हें भगाने या छेड़ने का प्रयास करते हैं, इससे वे अक्रामक होकर हमला कर देते हैं। इसके अलावा अत्यधिक तापमान जानवरों में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ा देता है, जिससे उनके आक्रामक व्यवहार की संभावना बढ़ जाती है।
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उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में खुले में फेंका जाने वाला खाद्य पदार्थ और कूड़ा भी बंदरों व आवारा कुत्तों को आबादी की ओर आकर्षित करता है। गर्मी में जलस्रोत सूखने के कारण जानवर इंसानी बस्तियों के आसपास भटकते रहते हैं। इंसानों और जानवरों का संपर्क बढ़ने से ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं।
केस-1
स्कूल से लौटते समय बंदर ने किया हमला
नगर के वासलीगंज निवासी 12 वर्षीय आर्यन स्कूल से घर लौट रहा था। रास्ते में एक बंदर ने अचानक हाथ में लिए टिफिन को छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर बंदर ने काट लिया। परिजन तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई।
केस-2
घर के बाहर खड़ी महिला को कुत्ते ने काटा
देहात कोतवाली क्षेत्र के बरकछा निवासी 32 वर्षीय रीना देवी घर के बाहर खड़ी थीं। इसी दौरान एक कुत्ता अचानक झपट पड़ा और पैर में काट लिया। उपचार के लिए उन्हें अस्पताल पहुंचना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़े मामले
विंध्याचल: मई में 202 मामले आए
जमालपुर: मई में 217 लोगों को एंटी रैबीज लगानी पड़ी। इसमें 81 पालतू कुत्ते, 85 बाहरी कुत्ते, 17 बिल्ली और 37 बंदर काटने के मामले हैं।
पटेहरा: मई में 97 नए मरीजों को रैबीज लगाया गया। इनमें बिल्ली के 20, बंदर का एक और कुत्ते के 76 मरीज शामिल हैं।
सीखड़: मई महीने में 201 लोगों का टीकाकरण किया गया।
राजगढ़: सीएचसी में मई में 204 लोगों को कुत्ता, बिल्ली और बंदर काटने पर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया।
चुनार: सीएचसी चेचरी मोड़ पर मई में कुत्ता, बंदर और बिल्ली काटने के 358 मरीज आए। इनमें 157 कुत्तों के काटने के मामले थे।
मड़िहान: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मई में एंटी रैबीज के 122 वायल में से 52 वायल खर्च हुए।
पड़री: पीएचसी पर मई महीने में कुत्ता, बंदर, बिल्ली व सियार के काटने के 271 मरीज आए। इनमें 232 कुत्ता, 22 बंदर, 13 बिल्ली और चार सियार के मामले थे।
कछवां: सीएचसी पर मई महीने में 405 मामले आए। इनमें कुत्ता काटने के 341, बिल्ली के 53 और बंदर के 10 मामले थे।
हलिया: उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया में मई माह में 173 लोगों को एंटी रैबीज लगाया गया।
लालगंज: सीएचसी में मई में 187 कुत्ता, 20 बिल्ली और 15 बंदर काटने के मामले आए।
चील्ह: पीएचसी में प्रतिदिन 15 से 20 लोगों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
इमिलियाचट्टी: मई में 51 लोगों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया।
विजयपुर पीएचसी में इंजेक्शन नहीं
जिगना। जिगना पीएचसी के विजयपुर सर्रोई में अप्रैल में 1201 और मई माह में 972 लोगों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। मंगलवार को रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गया। फार्मासिस्ट भाई लाल यादव ने बताया कि डिमांड भेजी गई है। बुधवार को इंजेक्शन आ जाएगा।
फ्रीज चोरी होने से नहीं रखे जा रहे एंटी रैबीज
अदलहाट। न्यू पीएचसी अदलहाट के फार्मासिस्ट राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 29 मई 2025 को फ्रीज चोरी हो जाने से आज तक न तो नई फ्रीज मिली और न ही एंटी रैबीज इंजेक्शन आया। इंजेक्शन उपलब्ध न होने से कुत्ता, बंदर आदि के काटने के मरीज यहां नहीं आते हैं। इस क्षेत्र के मरीज जमालपुर अथवा चुनार चले जाते हैं।
वर्जन
अप्रैल की तुलन में मई में मरीजों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ी है। गर्मी में जानवर अधिक आक्रामक हो जाते हैं। लोगों को चाहिए कि वे कुत्तों और बंदरों को न छेड़ें। काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से धोकर अस्पताल पहुंचें। एंटी रैबीज वैक्सीन अवश्य लगवाएं। अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन मौजूद हैं।
— डॉ. सीएल वर्मा, सीएमओ