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घाटों पर गंदगी, पालिका प्रशासन बेफिक्र

Fri, 04 Nov 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर Updated Fri, 04 Nov 2016 12:02 AM IST
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Dirt on the ghats, municipal administration unperturbed
छठ पूजा के बावजूद गंगा घाट की सीढ़ियांे की मरम्मत नहीं हुई।

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सूर्य उपासना का महापर्व डाला छठ चार नवंबर से शुरू हो रहा है, लेकिन गंगा घाटों पर फैली गंदगी को हटवाने की कोई कवायद नहीं की जा रही है। 
  गंगा घाटों की साफ-सफाई को लेकर पालिका प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। पहले दिन शुक्रवार को नहाय खाय के साथ ही पर्व आरंभ हो जाएगा और दूसरे दिन खरना है। नगर क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर दुर्व्यवस्थाओं का आलम है, जिससे व्रती महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। 

  महापर्व डाला छठ के मद्देनजर  महिलाओं ने तैयारियां आरंभ कर दी हैं। पर्व की महत्ता को देखते हुए पूरी साफ सफाई के साथ खरीददारी शुरु कर दी है। सूप दौरी और अन्य जरूरी सामानों की खरीददारी करने महिलाएं नगर के बाजारो में पहुंचने लगी हैं।
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उधर नगर के गंगा घाटों की अभी तक न तो साफ-सफाई शुरू हो पाई है और न ही कपड़े बदलने के स्थान को दुरुस्त कराया जा सका है। गंगा घाटों पर फैला कूड़ा सड़ रहा है, वहीं चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है, ऐसे में गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान करने में व्रती महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।  व्रत के दौरान महिलाएं गंगा में स्नान करके सूर्य उपासना करतीं हैं। नगर के बरियाघाट, कचहरी घाट, फतहां घाट, सुंदरघाट, बाबाघाट, बदलीघाट, दाऊजी घाट, पक्काघाट, संकठाघाट, नारघाट सहित विंध्याचल के गंगा घाटों पर तमाम प्रकार की दुर्व्यवस्थाओं का आलम बना हुआ है। 
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   गंगा घाटों पर पर्व की तैयारियों को लेकर गुरुवार तक कोई भी कार्य शुरू नहीं हो पाया था। गंगा घाटों पर बैरिकेडिंग आदि की भी अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है, वहीं टूटी हुई सीढ़ियों के चलते व्रती महिलाओं को स्नान-ध्यान के साथ ही सीढ़ियों से आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। नगर सहित विंध्याचल के कई गंगा घाटों पर अभी भी सिल्ट जमा हुआ है, वहीं घाटों पर उचित प्रकाश की व्यवस्था भी नदारद है। इस पर्व की सभी पूजा गंगा तटों पर की जाती है, चाहे उगते सूर्य को अर्घ्य देना हो या डूबते सूर्य को। अर्घ्य देने के समय अंधेरा होने के कारण घाटों पर प्रकाश व्यवस्था नहीं होने व्रती महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
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