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क्रय केंद्राें की जांच की उठाई मांग
संवाददाता, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 24 Dec 2014 01:14 AM IST
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किसानाें ने मंगलवार की दोपहर प्रमुख सचिव रेशम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम मड़िहान को सौंपा। आरोप लगाया कि क्षेत्र में किसानाें की सुविधा के लिए खोले गए क्रय केंद्र के कर्मचारी उनका धान नहीं खरीद रहे हैं।
इससे वह निजी मिलराें के यहां कम कीमत पर बेचने के लिए विवश हैं। इसका फायदा उठाते हुए क्रय केंद्र के कर्मचारी मिलराें से मिलीभगत कर कागजाें पर खरीदारी दिखाते हुए गोलमाल करने में लगे हैं।
किसान नेता देवशरण के नेतृत्व में मंगलवार की दोपहर काफी संख्या में किसान मड़िहान तहसील पहुंचे। किसानाें ने प्रमुख सचिव रेशम नवतेज सिंह को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी मड़िहान राजकुमार को सौंपा।
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किसानों ने कहा सूखे के चलते धान की पैदावार काफी कम हुई है। इसके बावजूद किसानाें को धान का उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। क्रय केंद्र के कर्मचारी किसानाें का धान नहीं खरीद रहे हैं।
इससे किसान निजी मिलराें के यहां धान निर्धारित मूल्य से 250 रुपये कम दाम पर बेचनेे को विवश हैं। इसका फायदा उठाते हुए क्रय केंद्रों के कर्मचारी निजी मिलराें द्वारा कम दाम पर खरीदे गए धान की सूची
लेकर अपने यहां चढ़ाते हुए कागजाें पर खरीददारी करने का काम कर रहे हैं। किसानाें ने यह भी बताया कि सहकारी समितियाें पर खाद की उपलब्धता न होने के कारण उन्हें 70 से 100 रुपये अधिक मूल्य पर निजी दूकानाें से खाद खरीदना पड़ रहा है।
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इससे वह निजी मिलराें के यहां कम कीमत पर बेचने के लिए विवश हैं। इसका फायदा उठाते हुए क्रय केंद्र के कर्मचारी मिलराें से मिलीभगत कर कागजाें पर खरीदारी दिखाते हुए गोलमाल करने में लगे हैं।
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किसान नेता देवशरण के नेतृत्व में मंगलवार की दोपहर काफी संख्या में किसान मड़िहान तहसील पहुंचे। किसानाें ने प्रमुख सचिव रेशम नवतेज सिंह को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी मड़िहान राजकुमार को सौंपा।
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किसानों ने कहा सूखे के चलते धान की पैदावार काफी कम हुई है। इसके बावजूद किसानाें को धान का उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। क्रय केंद्र के कर्मचारी किसानाें का धान नहीं खरीद रहे हैं।
इससे किसान निजी मिलराें के यहां धान निर्धारित मूल्य से 250 रुपये कम दाम पर बेचनेे को विवश हैं। इसका फायदा उठाते हुए क्रय केंद्रों के कर्मचारी निजी मिलराें द्वारा कम दाम पर खरीदे गए धान की सूची
लेकर अपने यहां चढ़ाते हुए कागजाें पर खरीददारी करने का काम कर रहे हैं। किसानाें ने यह भी बताया कि सहकारी समितियाें पर खाद की उपलब्धता न होने के कारण उन्हें 70 से 100 रुपये अधिक मूल्य पर निजी दूकानाें से खाद खरीदना पड़ रहा है।