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अव्यवस्थाओं से घिरी रही मतगणना, हर तरफ समस्या, लगते रहे आरोप
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मिर्जापुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए तैयार किया गया मतगणना व्यवस्था पूरी तरह से फेल साबित हुई। मतगणना केंद्र दुर्व्यवस्था पर प्रशासनिक तंत्र और उनके तरीकों पर भी जमकर सवाल उठे।
कोविड- 19 जैसी महामारी के दौर में भी जिस प्रकार कोविड प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ायी गई। उसका भी खामियाजा भविष्य में भुगतना पड़ सकता है। मतगणना की गति तो इतनी धीमी रही कि तीसरी शिफ्ट भी देर शाम तक चलती रही। वहीं प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। जिला पंचायत सदस्यों की जीत हार का फैसला घंटों अधर में लटका रहा। पूरी व्यवस्था ही छिन्न भिन्न रही।
रविवार से मतगणना शुरू की गई। शुरुआत में ही कई जगह समुचित व्यवस्था न होने से मतगणना शुरू होने में विलंब हुआ। किसी प्रकार धीरे- धीरे मतगणना ने गति पकड़ी तो रविवार को देर शाम से परिणाम आने शुरू हुए। लेकिन इस बार सूचनाओं के आदान प्रदान में इतनी गोपनीयता बरती गई कि लोगों को समझ में नहीं आया कि ऐसा क्यों किया गया। आम तौर पर मतगणना विकास खंड मुख्यालयों पर होती है और वहीं से इसकी घोषणा कर दी जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कई विकास खंडों पर तो प्रत्याशियों को प्रमाणपत्र लेने के लिए जूझना पड़ा। वहीं ब्लाकों पर जो आरओ बनाए गए थे वे कोई भी सूचना देने से मना कर दिए। इससे लोगों में यह आशंका होने लगी कि कहीं कोई गड़बड़ी की कोशिश तो नहीं हो रही है। इस पूरे प्रकरण में जिला सूचनाधिकारी की भूमिका भी शून्य ही रही। मतगणना के दौरान किसी भी जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया। हद तो तब हो गई जब मतगणना कार्मिकों को अपने मानदेय के लिए प्रदर्शन करना पड़ा।
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प्रमाण पत्र के लिए बिना नाश्ता पानी के घंटों बैठे रहे प्रत्याशी
प्रमाण पत्र के लिए बिना नाश्ता पानी के घंटों प्रत्याशी बैठे रहे। सिटी ब्लाक के अघवार की क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रत्याशी महिला रविवार की शाम से सोमवार दोपहर तक भूखे बैठी रही। आरोप है कि अधिकारी उसका प्रमाण पत्र देने में आनाकानी कर रहे थे। सोमवार की दोपहर बाद दो बजे उसका प्रमाण पत्र दिया गया। इसी तरह कई अन्य प्रत्याशी प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे।
जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों को करना पड़ा लंबा इंतजार
मिर्जापुर। मतगणना के बाद ब्लाक मुख्यालयों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के नाम तक की जानकारी नहीं दी गई। हालांकि उनको प्रमाणपत्र जिला मुख्यालय से ही मिलता था लेकिन नामों की घोषणा ब्लाक पर कर दी जाती थी। लोगों का आरोप था कि इस बार कई दिग्गज राजनेताओं के परिजन भी चुनाव मैदान में थे और कई तो भारी शिकस्त भी पाए। कहीं उनको बचाने का तो प्रयास नहीं किया जा रहा था। इसके चलते जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों को सूचना के नाम पर घुमाया जाता रहा। कभी ब्लाक तो कभी जिला मुख्यालय पर सूचना देने की बात कही जाती रही। गिनती हो जाने के बावजूद दूसरे दिन शाम तक भी लोगों को जीत हार की जानकारी नहीं दी गई।
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कोविड- 19 जैसी महामारी के दौर में भी जिस प्रकार कोविड प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ायी गई। उसका भी खामियाजा भविष्य में भुगतना पड़ सकता है। मतगणना की गति तो इतनी धीमी रही कि तीसरी शिफ्ट भी देर शाम तक चलती रही। वहीं प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। जिला पंचायत सदस्यों की जीत हार का फैसला घंटों अधर में लटका रहा। पूरी व्यवस्था ही छिन्न भिन्न रही।
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रविवार से मतगणना शुरू की गई। शुरुआत में ही कई जगह समुचित व्यवस्था न होने से मतगणना शुरू होने में विलंब हुआ। किसी प्रकार धीरे- धीरे मतगणना ने गति पकड़ी तो रविवार को देर शाम से परिणाम आने शुरू हुए। लेकिन इस बार सूचनाओं के आदान प्रदान में इतनी गोपनीयता बरती गई कि लोगों को समझ में नहीं आया कि ऐसा क्यों किया गया। आम तौर पर मतगणना विकास खंड मुख्यालयों पर होती है और वहीं से इसकी घोषणा कर दी जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कई विकास खंडों पर तो प्रत्याशियों को प्रमाणपत्र लेने के लिए जूझना पड़ा। वहीं ब्लाकों पर जो आरओ बनाए गए थे वे कोई भी सूचना देने से मना कर दिए। इससे लोगों में यह आशंका होने लगी कि कहीं कोई गड़बड़ी की कोशिश तो नहीं हो रही है। इस पूरे प्रकरण में जिला सूचनाधिकारी की भूमिका भी शून्य ही रही। मतगणना के दौरान किसी भी जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया। हद तो तब हो गई जब मतगणना कार्मिकों को अपने मानदेय के लिए प्रदर्शन करना पड़ा।
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प्रमाण पत्र के लिए बिना नाश्ता पानी के घंटों बैठे रहे प्रत्याशी
प्रमाण पत्र के लिए बिना नाश्ता पानी के घंटों प्रत्याशी बैठे रहे। सिटी ब्लाक के अघवार की क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रत्याशी महिला रविवार की शाम से सोमवार दोपहर तक भूखे बैठी रही। आरोप है कि अधिकारी उसका प्रमाण पत्र देने में आनाकानी कर रहे थे। सोमवार की दोपहर बाद दो बजे उसका प्रमाण पत्र दिया गया। इसी तरह कई अन्य प्रत्याशी प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे।
जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों को करना पड़ा लंबा इंतजार
मिर्जापुर। मतगणना के बाद ब्लाक मुख्यालयों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के नाम तक की जानकारी नहीं दी गई। हालांकि उनको प्रमाणपत्र जिला मुख्यालय से ही मिलता था लेकिन नामों की घोषणा ब्लाक पर कर दी जाती थी। लोगों का आरोप था कि इस बार कई दिग्गज राजनेताओं के परिजन भी चुनाव मैदान में थे और कई तो भारी शिकस्त भी पाए। कहीं उनको बचाने का तो प्रयास नहीं किया जा रहा था। इसके चलते जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों को सूचना के नाम पर घुमाया जाता रहा। कभी ब्लाक तो कभी जिला मुख्यालय पर सूचना देने की बात कही जाती रही। गिनती हो जाने के बावजूद दूसरे दिन शाम तक भी लोगों को जीत हार की जानकारी नहीं दी गई।