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कोरोना महामारी: बड़े मूर्तियों की मांग घटने से मूर्तिकारों के आमदनी पर ग्रहण
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मिर्जापुर।कोरोना महामारी के चलते मूर्तिकारों की आमदनी पर ग्रहण लगा हुआ है। बड़ी मूर्तियों पर लगी रोक के चलते मूर्तिकार मिले आर्डर के मुताबिक मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करने में जुटे हुए हैं। पहले की तरह आर्डर न मिलने से कलाकार मायूस हैं।
कोलाकाता से आए ज्यादातर कलाकार जिले के विभिन्न स्थानों पर रहकर मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करते हैं। कोरोनाकाल से पहले जहां 50 से 60 मूर्तियों के आर्डर मिल जाया करते रहे वहीं दो वर्षों से इस ग्रहण लगा हुआ है। बड़ी मूर्तियों के बजाय छोटी मूर्तियों के ही ज्यादातर मिल रहे आर्डर से इस पेशे से जुड़े लोगों की आय घट गयी है। मां दुर्गा के मूर्तियों के रेट 20 हजार रुपये से शुरू होकर 35 हजार रुपये तक हैं। अभी तक महज आठ से दस मूर्तियों के ही आर्डर मिले हुए हैं। ऐसे में इस पेशे से जुड़े मूर्तिकारों के खर्च भी निकालने मुश्किल हो गया है।
इनसेट
कोरोना के चलते पिछले वर्ष ज्यादातर स्थानों पर मूर्तियां नहीं बैठाए जाने से काफी नुकसान उठाना पड़ा। इस वर्ष उम्मीद तो जगी है लेकिन अभी तक अपेक्षा के अनुरूप मूर्तियों के आर्डर नहीं मिले हैं।
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-टी पाल, मूर्ति कलाकार।
घर, परिवार छोड़कर यहां पिछले कई वर्षो से इस पेशे में लगे हुए हैं। इधर दो वर्षो से फायदा को कौन कहे खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
-गौतम, मूर्ति कलाकार।
कभी मां दुर्गा की बड़ी से बड़ी मूर्तियों की मांग रहती थी। कोरोना गाइड लाइन में छोटी से छोटी मूर्तियां बैठाए जाने के फरमान से इस व्यवसाय पर ग्रहण सा लग गया है।
-संजय पाल, मूर्ति कलाकार।
कोरोना महामारी की रफ्तार कम है। इस वर्ष के नवरात्र में आय की उम्मीद जगी हुई है। सब कुछ ठीकठाक रहा तो पहले की तरह कई स्थानों पर पूजा-पंडाल लगाए जाएंगे।
-विवलय पाल, मूर्ति कलाकार।
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कोलाकाता से आए ज्यादातर कलाकार जिले के विभिन्न स्थानों पर रहकर मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करते हैं। कोरोनाकाल से पहले जहां 50 से 60 मूर्तियों के आर्डर मिल जाया करते रहे वहीं दो वर्षों से इस ग्रहण लगा हुआ है। बड़ी मूर्तियों के बजाय छोटी मूर्तियों के ही ज्यादातर मिल रहे आर्डर से इस पेशे से जुड़े लोगों की आय घट गयी है। मां दुर्गा के मूर्तियों के रेट 20 हजार रुपये से शुरू होकर 35 हजार रुपये तक हैं। अभी तक महज आठ से दस मूर्तियों के ही आर्डर मिले हुए हैं। ऐसे में इस पेशे से जुड़े मूर्तिकारों के खर्च भी निकालने मुश्किल हो गया है।
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इनसेट
कोरोना के चलते पिछले वर्ष ज्यादातर स्थानों पर मूर्तियां नहीं बैठाए जाने से काफी नुकसान उठाना पड़ा। इस वर्ष उम्मीद तो जगी है लेकिन अभी तक अपेक्षा के अनुरूप मूर्तियों के आर्डर नहीं मिले हैं।
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-टी पाल, मूर्ति कलाकार।
घर, परिवार छोड़कर यहां पिछले कई वर्षो से इस पेशे में लगे हुए हैं। इधर दो वर्षो से फायदा को कौन कहे खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
-गौतम, मूर्ति कलाकार।
कभी मां दुर्गा की बड़ी से बड़ी मूर्तियों की मांग रहती थी। कोरोना गाइड लाइन में छोटी से छोटी मूर्तियां बैठाए जाने के फरमान से इस व्यवसाय पर ग्रहण सा लग गया है।
-संजय पाल, मूर्ति कलाकार।
कोरोना महामारी की रफ्तार कम है। इस वर्ष के नवरात्र में आय की उम्मीद जगी हुई है। सब कुछ ठीकठाक रहा तो पहले की तरह कई स्थानों पर पूजा-पंडाल लगाए जाएंगे।
-विवलय पाल, मूर्ति कलाकार।