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दस साल में भी पूरा नहीं हो सका भवन निर्माण
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Mon, 20 Jun 2016 12:36 AM IST
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जिला चिकित्सालय परिसर में निर्माणाधीन 145 बेड का भवन।
- फोटो : mirzapur
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जिला चिकित्सालय परिसर में दस सालों से बनाया जा रहा 145 बेड का भवन 16 करोड़ रुपया खर्च होने के बावजूद अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसे पूर्ण करने के लिए अभी भी एक करोड़ रुपये की दरकार है। अधिकारी इसका कारण बजट का मुहैया न होना मान रहे हैं। उधर, भवन हैंडओवर नहीं हो पाने से मरीजों को भर्ती करने में चिकित्सालय प्रशासन को दिक्कतें आ रही हैं।
जिला चिकित्सालय को मंडलीय चिकित्सालय का दर्जा मिलने के बाद शासन से इसकी सुविधा बढ़ाने का निर्णय लिया। 155 बेड के इस चिकित्सालय को 300 बेड करने का निर्देश दिया। ताकि मंडलीय चिकित्सालय में तीनों जिलों से आने वाले मरीजों को असुविधा नहीं हो। इसके लिए जिला चिकित्सालय में ही 145 बेड के भवन निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम को जिम्मेदारी सौंपी गई। सर्वे के बाद वर्ष 2003-04 में भवन निर्माण की लागत तीन करोड़ बताई गई। जिसकी 50 प्रतिशत धनराशि मुहैया करा दी गई। भवन का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। शेष धनराशि न मिलने पर निर्माण कार्य रूक गया। धनराशि नहीं मिलने पर वर्ष 2006 में इसकी लागत बढ़कर पांच करोड़ रुपये हो गई। इससे अधिकारियों व ठेकेदोरों को लूट खसोट करने का मौका मिल गया।
2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण करते समय पूछताछ किया तो इसकी लागत 12 करोड़ बताया गया। इसपर उन्होंने सारी धनराशि देकर दो वर्ष के अदंर निर्माण कार्य पूर्णकर भवन को हैंडओवर करने का निर्देश दिया था। फिर भी अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही से यह पूरा नहीं हो सका। तत्काल प्रमुख सचिव नवतेज सिंह ने निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। जिसकी जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया था। ना जांच हुई ना ही निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और वर्ष 2016 आ गया। अबतक इस भवन पर 16 करोड़ से अधिक रुपया खर्च हो चुका है। निमार्ण कार्य को पूर्ण होने के लिए लगभग एक करोड़ रुपया मांगा जा रहा है।
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जिला चिकित्सालय को मंडलीय चिकित्सालय का दर्जा मिलने के बाद शासन से इसकी सुविधा बढ़ाने का निर्णय लिया। 155 बेड के इस चिकित्सालय को 300 बेड करने का निर्देश दिया। ताकि मंडलीय चिकित्सालय में तीनों जिलों से आने वाले मरीजों को असुविधा नहीं हो। इसके लिए जिला चिकित्सालय में ही 145 बेड के भवन निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम को जिम्मेदारी सौंपी गई। सर्वे के बाद वर्ष 2003-04 में भवन निर्माण की लागत तीन करोड़ बताई गई। जिसकी 50 प्रतिशत धनराशि मुहैया करा दी गई। भवन का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। शेष धनराशि न मिलने पर निर्माण कार्य रूक गया। धनराशि नहीं मिलने पर वर्ष 2006 में इसकी लागत बढ़कर पांच करोड़ रुपये हो गई। इससे अधिकारियों व ठेकेदोरों को लूट खसोट करने का मौका मिल गया।
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2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण करते समय पूछताछ किया तो इसकी लागत 12 करोड़ बताया गया। इसपर उन्होंने सारी धनराशि देकर दो वर्ष के अदंर निर्माण कार्य पूर्णकर भवन को हैंडओवर करने का निर्देश दिया था। फिर भी अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही से यह पूरा नहीं हो सका। तत्काल प्रमुख सचिव नवतेज सिंह ने निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। जिसकी जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया था। ना जांच हुई ना ही निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और वर्ष 2016 आ गया। अबतक इस भवन पर 16 करोड़ से अधिक रुपया खर्च हो चुका है। निमार्ण कार्य को पूर्ण होने के लिए लगभग एक करोड़ रुपया मांगा जा रहा है।
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