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उड़ंतुआ, तैरंतुआ व घूमंतुआ की जम रही तिकड़ी
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मिर्जापुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सरगर्मी अब जोरों पर है। माना जा रहा है कि मार्च-अप्रैल तक चुनाव हो जाएगा। इसके चलते प्रत्याशियों ने अपनी चहलकदमी तेज कर दी है। वे प्रत्याशियों से तो मिल ही रहे हैं। दावतों का भी दौर शुरू हो गया है। हालांकि अभी सब कुछ हल्के- फुल्के तौर पर ढंके तौर पर चल रहा है।
पंचायत चुनाव में विशेषकर ग्राम प्रधान पद के संभावित प्रत्याशी अभी से ही अपनी तैयारी शुरू कर रहे हैं। गांव में वह लोगों से मिलजुलकर बाबा, दादा व चाचा कहकर पैलगी तो कर ही रहे हैं। चौराहों पर दिन- दिन भर खड़े होकर एक प्रकार से ड्यूटी दे रहे हैं। चाय की दुकानों पर बैठकर लोगों को चाय भी पिला रहे हैं। इतना ही नहीं समाज के कुछ प्रमुख लोगों को अब प्राय: संभावित प्रत्याशी उनको अपने जाल में फांसना चाहते हैं। इसके लिए पैलगी से लेकर उड़ंतुआ( मुर्गा), तैरंतुआ (मछली )व घूमंतुआ (दारू) तक की व्यवस्था हो रही है। हालांकि अभी यह सब चोरी- छिपे हो रहा है। मतदाता के वर्ग के अनुसार उनका आंकलन हो रहा है। उसी के अनुसार उनकी व्यवस्था हो रही है। इसी के साथ ही पुराने- पुराने मामले निकालकर उनकी जांच के लिए सक्षम अधिकारी को आवेदन भी किया जा रहा है।
पंचायतों का आरक्षण निर्धारित न होने से बढ़ी परेशानी
मिर्जापुर। इस प्रकार के उम्मीदवारों को एक सबसे बड़ी समस्या परेशान कर रही है। प्रधान पद के लिए संख्यावार आरक्षण तो घोषित कर दिया गया है लेकिन ग्राम पंचायत वार आरक्षण निश्चित न होने से वह उहापोह में पड़ गए हैं। कई लोग इसलिए शांत पड़ गए हैं कि कहीं आरक्षण उल्टा हो गया तो उनका किया धरा सब बेकार हो जाएगा। जो पैसा खर्च हो रहा है। वह व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए अभी सब कुछ हल्के तौर पर ढंके छिपे चल रहा है।
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पंचायत चुनाव में विशेषकर ग्राम प्रधान पद के संभावित प्रत्याशी अभी से ही अपनी तैयारी शुरू कर रहे हैं। गांव में वह लोगों से मिलजुलकर बाबा, दादा व चाचा कहकर पैलगी तो कर ही रहे हैं। चौराहों पर दिन- दिन भर खड़े होकर एक प्रकार से ड्यूटी दे रहे हैं। चाय की दुकानों पर बैठकर लोगों को चाय भी पिला रहे हैं। इतना ही नहीं समाज के कुछ प्रमुख लोगों को अब प्राय: संभावित प्रत्याशी उनको अपने जाल में फांसना चाहते हैं। इसके लिए पैलगी से लेकर उड़ंतुआ( मुर्गा), तैरंतुआ (मछली )व घूमंतुआ (दारू) तक की व्यवस्था हो रही है। हालांकि अभी यह सब चोरी- छिपे हो रहा है। मतदाता के वर्ग के अनुसार उनका आंकलन हो रहा है। उसी के अनुसार उनकी व्यवस्था हो रही है। इसी के साथ ही पुराने- पुराने मामले निकालकर उनकी जांच के लिए सक्षम अधिकारी को आवेदन भी किया जा रहा है।
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पंचायतों का आरक्षण निर्धारित न होने से बढ़ी परेशानी
मिर्जापुर। इस प्रकार के उम्मीदवारों को एक सबसे बड़ी समस्या परेशान कर रही है। प्रधान पद के लिए संख्यावार आरक्षण तो घोषित कर दिया गया है लेकिन ग्राम पंचायत वार आरक्षण निश्चित न होने से वह उहापोह में पड़ गए हैं। कई लोग इसलिए शांत पड़ गए हैं कि कहीं आरक्षण उल्टा हो गया तो उनका किया धरा सब बेकार हो जाएगा। जो पैसा खर्च हो रहा है। वह व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए अभी सब कुछ हल्के तौर पर ढंके छिपे चल रहा है।
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