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Mirzapur News: पिछले साल के मुकाबले एक दिन पहले ही 73.66 मीटर पार कर गया जलस्तर

Thu, 08 Aug 2024 05:29 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2024 05:29 AM IST
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Compared to last year, the water level crossed 73.66 meters a day earlier
मिर्जापुर। गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला बुधवार को जारी रहा। जलस्तर में प्रति घंटे छह सेमी की वृद्धि हो रही है। पिछले साल आठ अगस्त को अधिकतम जलस्तर 73.66 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था। इस बार एक दिन पहले बुधवार को ही गंगा का जलस्तर पिछले साल के अधिकतम जलस्तर को पार कर 74.43 मीटर पर पहुंच गया।
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गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उधर, गंगा के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए गंगा के तटवर्ती गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए ग्रामीण बुधवार को सुबह से ही पशुओं के चालिए चारा, भूसा आदि सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए। जिले में चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर तथा खतरे का निशान 77.724 मीटर पर है। बुधवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 73.960 मीटर था। जलस्तर सुबह 8.416 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। वहीं दोपहर में जलस्तर 5.75 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ते हुए 74.190 मीटर तक पहुंच गया। शाम चार बजे तक जलस्तर 74.43 मीटर पर पहुंच गया। गंगा के जलस्तर में शाम चार बजे छह सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। वर्ष 2023 में अधिकतम जलस्तर 73.66 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था।
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वर्ष 2019 में गंगा का अधिकतम जलस्तर 77.980 मीटर, 2020 में 74.100 मीटर, 2021 में 78.400 मीटर, 2022 में 78.110 मीटर तथा 2023 में 73.607 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। इस साल बुधवार को शाम चार बजे तक जलस्तर 74.43 मीटर दर्ज किया गया है। मिर्जापुर में अभी तक अधिकतम जलस्तर नौ सितंबर 1978 को 80.34 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था। उधर, गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रहे वृद्धि को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। प्रशासन की तरफ से सदर तथा चुनार तहसील क्षेत्र में गंगा के तटवर्ती गांवों में कुल 37 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। मिर्जापुर नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार का कहना है कि जिले में अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। अन्य प्रदेशों में हुई बारिश तथा कानपुर बैराज से गंगा में पानी छोड़ा गया है। इसके चलते गंगा में पानी बढ़ रहा है। पानी अभी बढ़ाव पर है और धीरे-धीरे कम हो जाएगा।
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उधर, गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रहे वृद्धि को देखते हुए कोन ब्लॉक के गंगा के तटवर्ती गांवों के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। किसान खेतों में बोई फसलों को लेकर चिंतित हैं। यह भी कहा जा रहा है कि जलस्तर में इसी रफ्तार से वृद्धि होती रही तो जल्दी ही पानी रिहायशी इलाकों में पहुंच सकता है। बाढ़ की आशंका से ग्रामीण अपने मवेशियों के लिए चारा, भूसा आदि सुरक्षित करने में जुट गए हैं। हरसिंगपुर, मल्लेपुर, बल्ली परवा गांव में सबसे पहले बाढ़ का पानी प्रवेश करता है। उधर, सीखड़ क्षेत्र में बाढ़ का पानी मेड़िया बाहा के रास्ते सोनवर्षा ताल की तरफ बढ़ रहा है। बाढ़ की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने बाढ़ चौकियों का निरीक्षण कर मातहतों को बाढ़ चौकियों पर मौजूदगी बनाए रखने का निर्देश दिया। एडीएम वित्त व राजस्व शिव प्रताप शुक्ल ने मंगलवार को बाढ़ चौकी पसियाही का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से प्रभावित लोगों को पशुओं आदि को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का निर्देश दिया। इस दौरान एडीएम ने अधिकारियों को खाद्य सामग्री व पशुओं के लिए भूसा आदि की पर्याप्त व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए लंच पैकेट, नाव और दवाओं आदि का प्रबंध करने के लिए निर्देश दिया।
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