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सड़क पर शिक्षा लेने को विवश बच्चे
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Tue, 17 Mar 2015 12:26 AM IST
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रेलवे और बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते रेलवे के मनोरंजन सदन में शिक्षा पा रहे दो विद्यालय के लगभग 200 छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। बच्चे सड़क पर शिक्षा लेने को विवश है। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का यह फरमान उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के महाप्रबंधक के आगामी निरीक्षण को देखते हुए जारी किया गया है।
1968 में तरकापुर, पड़री और बरौधा कचार के विद्यालय का समायोजन कर रेलवे कालोनी के मनोरंजन सदन में संचालित किया जाने लगा। इसे प्राथमिक विद्यालय रेलवे कालोनी के नाम से जाना जाता है। विगत एक दशक पूर्व सीताराम राम द्विवेदी समन्वयी बेसिक प्राथमिक पाठशाला जो पहले पीली कोठी में संचालित होता था, उसका शिक्षण कार्य भी मनोरंजन सदन में संचालित होने लगा।
इसी के साथ 1999 में वहां पर एबीएसए का कार्यालय भी खुल गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने आठ माह पूर्व एबीएसए कार्यालय को राजगढ़ में स्थानांतरित कर दिया। पर वर्षों से रेलवे भवन में शिक्षा पा रहे बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका खामियाजा अब बच्चे भुगत रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय रेलवे कालोनी में 82 बच्चे, दो शिक्षक, एक शिक्षामित्र और एक दाई और सीताराम राम द्विवेदी समन्वयी बेसिक प्राथमिक पाठशाला में 83 बच्चे, दो शिक्षक, एक शिक्षा मित्र और दो दाई हैं।
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उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक 23 मार्च को निरीक्षण के लिए आ रहे हैं, 12 मार्च को उनके पूर्व कार्यक्रम के तहत रेलवे सिनियर सेक्शन इंजीनियर ने 26 फरवरी को स्कूल के प्रधानाचार्य को पत्र लिख कर मनोरंजन सदन को खाली करने का आदेश दिया। पत्र में कहा कि मनोरंजन सदन में स्कूल चलाए जाने का कोई लेखा-जोखा व लाइसेंस नहीं है। जीएम के निरीक्षण कार्यक्रम को देखते हुए एक से 15 मार्च तक स्कूल बंद कर दें और परिसर को खाली कर अवगत कराएं।
जिसके बाद से दोनाें स्कूल के करीब 200 बच्चे रेलवे कालोनी के सड़क पर शिक्षा पाने को विवश हैं। प्रधानाध्यापिका सरोज श्रीवास्तव का कहना है कि रेल अधिकारियों ने स्कूल भवन को अन्यत्र ले जाने का आदेश दिया है। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई तो अधिकारियों ने कहा कि इन विद्यालयों को रतनगंज या विसुंदरपुर के विद्यालयों से संबद्ध कर दिया जाय।
यदि ऐसा हुआ तो विद्यार्थियाें को पढ़ने के लिए पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। डा. पारसनाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस बारे में मुझे कोई जानकारी अब तक नहीं है। खंड शिक्षा अधिकारी से बात कर विद्यालयों को अन्य विद्यालय से अटैच किया जाएगा।
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1968 में तरकापुर, पड़री और बरौधा कचार के विद्यालय का समायोजन कर रेलवे कालोनी के मनोरंजन सदन में संचालित किया जाने लगा। इसे प्राथमिक विद्यालय रेलवे कालोनी के नाम से जाना जाता है। विगत एक दशक पूर्व सीताराम राम द्विवेदी समन्वयी बेसिक प्राथमिक पाठशाला जो पहले पीली कोठी में संचालित होता था, उसका शिक्षण कार्य भी मनोरंजन सदन में संचालित होने लगा।
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इसी के साथ 1999 में वहां पर एबीएसए का कार्यालय भी खुल गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने आठ माह पूर्व एबीएसए कार्यालय को राजगढ़ में स्थानांतरित कर दिया। पर वर्षों से रेलवे भवन में शिक्षा पा रहे बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका खामियाजा अब बच्चे भुगत रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय रेलवे कालोनी में 82 बच्चे, दो शिक्षक, एक शिक्षामित्र और एक दाई और सीताराम राम द्विवेदी समन्वयी बेसिक प्राथमिक पाठशाला में 83 बच्चे, दो शिक्षक, एक शिक्षा मित्र और दो दाई हैं।
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उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक 23 मार्च को निरीक्षण के लिए आ रहे हैं, 12 मार्च को उनके पूर्व कार्यक्रम के तहत रेलवे सिनियर सेक्शन इंजीनियर ने 26 फरवरी को स्कूल के प्रधानाचार्य को पत्र लिख कर मनोरंजन सदन को खाली करने का आदेश दिया। पत्र में कहा कि मनोरंजन सदन में स्कूल चलाए जाने का कोई लेखा-जोखा व लाइसेंस नहीं है। जीएम के निरीक्षण कार्यक्रम को देखते हुए एक से 15 मार्च तक स्कूल बंद कर दें और परिसर को खाली कर अवगत कराएं।
जिसके बाद से दोनाें स्कूल के करीब 200 बच्चे रेलवे कालोनी के सड़क पर शिक्षा पाने को विवश हैं। प्रधानाध्यापिका सरोज श्रीवास्तव का कहना है कि रेल अधिकारियों ने स्कूल भवन को अन्यत्र ले जाने का आदेश दिया है। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई तो अधिकारियों ने कहा कि इन विद्यालयों को रतनगंज या विसुंदरपुर के विद्यालयों से संबद्ध कर दिया जाय।
यदि ऐसा हुआ तो विद्यार्थियाें को पढ़ने के लिए पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। डा. पारसनाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस बारे में मुझे कोई जानकारी अब तक नहीं है। खंड शिक्षा अधिकारी से बात कर विद्यालयों को अन्य विद्यालय से अटैच किया जाएगा।