पकड़े गए साढ़े 10 करोड़
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यातायात प्रभारी देवेंद्र प्रताप सिंह सोमवार की शाम मिर्जापुर चौराहे मार्ग के चील्ह तिराहे पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। शाम करीब सात बजे एक स्कार्पियो को रोकवा कर चेक किया तो उसमें दो बक्से मिले। बक्से रुपये से भरे थे। उनमें 10 करोड़ की नकदी थी। उन्होंेने चील्ह थाने की पुलिस को बुलवा कर गाड़ी समेत रुपये बरामद कर लिए। वहां पूछताछ में वाहन सवार लोगों ने बताया कि पैसे इलाहाबाद बैंक के हैं। यातायात प्रभारी ने मेन ब्रांच डंकीनगंज के प्रबंधक को बुलाकर असलियत का पता लगाया। उसके बाद उनसे एक लिखित प्रमाण पत्र लेते रुपये छोड़ दिए।
इससे पहले दोपहर में कटरा कोतवाली क्षेत्र के पथरहिया के पास एक बोेलेरो पकड़ी गई। उसमें बोरे में रखी नकदी बरामद हुई। इसकी सूचना पाकर तत्काल पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी मौके पर पहुंचे। बोलेरो में पकड़े गए दो गार्ड समेत पांच लोगों को कोतवाली लाकर पूछताछ की। पता चला रुपए इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक का है। जिसे जिले की शाखाओं में वितरण करने के लिए ले जाया जा रहा था। बैंक के ब्रांच मैनेजर केपी सिंह, रिजनल मैनेजर बीएन सिंह को बुलवाया गया। उन्होंने बताया कि दो दिन बंदी के बाद सोमवार को निजी बोलेरो से बैंक अधिकारी सत्येंद्र प्रताप गौड़ और गार्ड संजय पांडेय व विनय मिश्रा रोडवेज स्थित यूपी इलाहाबाद ग्रामीण बैँक के मेन ब्रांच से 44 लाख रुपया लेकर जनपद के 11 शाखाआें त्रिमुहारी, दुबार, मगरहहां, तिलाव, कर्मा, देवपुरवा आदि में वितरण करने जा रहे थे। त्रिमुहारी ब्रांच में पांच लाख रुपया देकर 39 लाख रुपया लेकर आगे बढ़े थे कि पुलिस ने पकड़ लिया।
उधर, कछवां में वाहन चेकिंग के दौरान भैसा चौकी इंचार्ज अजय ओझा ने वाहन चेकिंग के दौरान बरैनीघाट के पास एक इंडिका से 17 लाख रुपया बरामद किया। बरामद नोटों के साथ वाहन में सवार तीन लोगों को पकड़ कर थाने ले गए। पूछताछ किया तो लोगों बताया कि वह मडुवाडीह वाराणसी स्थित इलाहाबाद बैंक के कर्मचारी हैं। जहां से 17 लाख रुपया लेकर मिर्जापुर जनपद के बरकछा स्थित इलाहाबाद बैंक में देने जा रहे थे। जांच में बैंक का रुपया पाए जाने पर उसे छोड़ दिया गया।