{"_id":"589b6f1a4f1c1bc15537a82d","slug":"burning-imprisoned-wife","type":"story","status":"publish","title_hn":"पत्नी को जलाने वाले को कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पत्नी को जलाने वाले को कैद
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Thu, 09 Feb 2017 12:48 AM IST
विज्ञापन
court shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट देवकांत शुक्ला ने पत्नी को जला कर मारने वाले मोनू प्रजापति को बुधवार को दस वर्ष सश्रम कैद की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की धनराशि नहीं चुकाने पर छह माह की अतिरिक्त सजा का आदेश दिया है। जुर्माने की 75 प्रतिशत रकम उनके पुत्र को पालन-पोषण के लिए दी जाएगी।
शुक्लहा निवासी पंचदेव ने कटरा कोतवाली में 16 अगस्त 2014 को मुकदमा दर्ज कराया था कि शुक्लहा के मोनू प्रजापति से उसकी बेटी बेबी ने ढाई वर्ष पूर्व प्रेम विवाह किया था। दोनों से एक बेटा है। मोनू ने उसके बेटी पर दूसरे से संबंध होने का शक जताते हुए 16 अगस्त 2014 को मिट्टी तेल डाल कर जला दिया। जिसकी उपचार के दौरान जिला चिकित्सालय में मौत हो गई थी।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी मोनू प्रजापति के खिलाफ धारा 304 समेत अन्य आरोप में मुकदमा पंजीकृत करते हुए विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश कुमार यादव ने सभी गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कराया। जिसकी सुनवाई बुधवार को न्यायालय ने की। अधिवक्ताओे की दलील, गवाहों के बयान तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने आरोपी का दोष सिद्ध पाते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया।
शुक्लहा निवासी पंचदेव ने कटरा कोतवाली में 16 अगस्त 2014 को मुकदमा दर्ज कराया था कि शुक्लहा के मोनू प्रजापति से उसकी बेटी बेबी ने ढाई वर्ष पूर्व प्रेम विवाह किया था। दोनों से एक बेटा है। मोनू ने उसके बेटी पर दूसरे से संबंध होने का शक जताते हुए 16 अगस्त 2014 को मिट्टी तेल डाल कर जला दिया। जिसकी उपचार के दौरान जिला चिकित्सालय में मौत हो गई थी।
विज्ञापन
पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी मोनू प्रजापति के खिलाफ धारा 304 समेत अन्य आरोप में मुकदमा पंजीकृत करते हुए विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश कुमार यादव ने सभी गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कराया। जिसकी सुनवाई बुधवार को न्यायालय ने की। अधिवक्ताओे की दलील, गवाहों के बयान तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने आरोपी का दोष सिद्ध पाते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया।
विज्ञापन