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आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे जानवर
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Sat, 21 May 2016 01:02 AM IST
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शादी समारोह के लिए सरकारी और निजी भूमि से पेड़ न काटने वाले परिवार को पंचायत अपनी ओर से मुफ्त में दो या तीन गैस सिलेंडर देगी।
- फोटो : Demo pic
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प्रचंड गर्मी में अपनी हलक की प्यास बुझाने के लिए इंसानों के साथ ही जंगली जानवर भी परेशान हैं। नदी-नालों, तालाबों, झरनों के सूखने से जंगली जानवर अब जंगलों से सटे आबादी बाहुल्य इलाकों में पलायन करने लगे हैं। हलिया, ड्रमंडगंज, राजगढ़, अहरौरा एवं लालगंज सहित कई अन्य इलाकों में जंगली जानवर पानी की तलाश में दस्तक देने लगे हैं, जिससे ग्रामीण जनता में भय व्याप्त हो गया है।
इंसानों की प्यास बुझाने के लिए पहाड़ाें व जंगलों से सटे गांवों में पेयजल आपूर्ति पानी के टैंकराें से कराई जा रही है, लेकिन जंगलों के सभी जलस्रोत सूख जाने से जंगली जानवरों के हलक की प्यास नहीं बुझ पा रही है और वह पानी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
बता दें कि जंगलों में नदी-नाले, झरने-तालाब सूखने से भालू, तेंदुआ, हिरण, सियार, लकड़बग्घा सहित अन्य जंगली जानवर पानी की तलाश में गांवों की बस्तियों में पहुंच रहे हैं। जल्द ही बारिश नहीं हुई तो स्थिति और भी विकट हो जाएगी।
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जंगलों में जलावनी लकड़ी के नाम पर हरे पेड़ाें की हो रही कटान से जहां पशु-पक्षियों का आशियाना उजड़ता चला जा रहा है, वहीं भीषण गर्मी में नदी-नालों, तालाबों, झरनों की तलहटियों से धूल उड़ने से जंगली जानवरों की प्यास नहीं बुझ पा रही है, जिसके कारण वह बस्तियाें की तरफ रुख करने लगे हैं। एक सप्ताह पूर्व लालगंज इलाके में जंगली सियारों सहित खरगोश का झुंड पानी की तलाश में आए थे, जिसमें से अधिकांश जानवरों की पानी के अभाव में जान भी जा चुकी थी।
ड्रमंडगंज इलाके में दो दिन पूर्व एक भालू अपने दो बच्चों के साथ सोनगझ़ा गांव स्थित पटेहरा नदी पर पानी पीने आया था। ग्रामीणों के शोर मचाने पर भालू अपने बच्चे को लेकर चला गया, बावजूद इसके ग्रामीणों में भय बना हुआ है।
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इंसानों की प्यास बुझाने के लिए पहाड़ाें व जंगलों से सटे गांवों में पेयजल आपूर्ति पानी के टैंकराें से कराई जा रही है, लेकिन जंगलों के सभी जलस्रोत सूख जाने से जंगली जानवरों के हलक की प्यास नहीं बुझ पा रही है और वह पानी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
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बता दें कि जंगलों में नदी-नाले, झरने-तालाब सूखने से भालू, तेंदुआ, हिरण, सियार, लकड़बग्घा सहित अन्य जंगली जानवर पानी की तलाश में गांवों की बस्तियों में पहुंच रहे हैं। जल्द ही बारिश नहीं हुई तो स्थिति और भी विकट हो जाएगी।
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जंगलों में जलावनी लकड़ी के नाम पर हरे पेड़ाें की हो रही कटान से जहां पशु-पक्षियों का आशियाना उजड़ता चला जा रहा है, वहीं भीषण गर्मी में नदी-नालों, तालाबों, झरनों की तलहटियों से धूल उड़ने से जंगली जानवरों की प्यास नहीं बुझ पा रही है, जिसके कारण वह बस्तियाें की तरफ रुख करने लगे हैं। एक सप्ताह पूर्व लालगंज इलाके में जंगली सियारों सहित खरगोश का झुंड पानी की तलाश में आए थे, जिसमें से अधिकांश जानवरों की पानी के अभाव में जान भी जा चुकी थी।
ड्रमंडगंज इलाके में दो दिन पूर्व एक भालू अपने दो बच्चों के साथ सोनगझ़ा गांव स्थित पटेहरा नदी पर पानी पीने आया था। ग्रामीणों के शोर मचाने पर भालू अपने बच्चे को लेकर चला गया, बावजूद इसके ग्रामीणों में भय बना हुआ है।