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Mirzapur News: मठ की जमीन पर बोई गई फसल के पैसे के बंदरबांट का आरोप

Sun, 29 Sep 2024 02:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 02:12 AM IST
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Allegations of misappropriation of money from crops sown on monastery land
मड़िहान। कसेरुआ गांव स्थित मठ की 1500 बीघे जमीन पर मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद को देखते हुए कुर्की की कार्रवाई की जानी है। इससे पहले कुछ हिस्से में बोई गई सरसों की फसल का एक पक्ष ने बंदरबांट करने का आरोप लगाया है।
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आरोप है कि 73 बीघे जमीन पर सरसों की फसल थी। जिसे बीते अप्रैल माह में तहसील कर्मचारियों ने कटवाकर मड़ाई करवाकर कब्जे में ले लिया। विपणन अधिकारी राजगढ़ के नेतृत्व में उस फसल को नीलाम कर दिया गया। नीलामी के बाद पैसे का बंदरबांट कर लिया गया। एक पक्ष द्वारा न्यायालय के माध्यम से जानकारी मांगी गई तो बीते 10 सितंबर को नीलाम की गई सरसों की कुछ धनराशि बैंक में जमा करा दी गई। कसेरुआ मौजा स्थित मठ की श्रीमूर्ति श्रीठाकुर मदनमोहनजी के नाम से लगभग 373 हेक्टेयर जमीन तहसील के रिकाॅर्ड में दर्ज है। जमीन के मुंतजिमकार में महंत नरायनदास चेला महंत केशवदास का नाम चला आ रहा है। श्रवण शुक्ला उर्फ पम्पम गुरु द्वारा मुंतजिमकार या पुजारी को लेकर दावा किया गया था। मठ की लगभग 73 बीघे जमीन पर सरसों की फसल बोई गई थी। पुजारी का कहना है कि 73 बीघे में लगभग 150 क्विंटल सरसों की फसल में से सिर्फ 15 क्विंटल सरसों गोपनीय तरीके से नीलम कर दी गई। कटाई मड़ाई आदि खर्च के बाद 40000 रुपये जमा किए गए। इस संबंध में एसडीएम युगांतर त्रिपाठी का कहना है कि श्रवण शुक्ला का आरोप निराधार है। उनके नाम से कसेरुआ में कोई जमीन ही नहीं है तो सरसों की फसल कहां से रहेगी।
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