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गेहूं खरीद में अनियमितता का आरोप, आइजीआरएस पर हुई शिकायत की दोबारा होगी जांच
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मिर्जापुर। हलिया गेहूं क्रय केंद्र पर 2018 में हुई अनियमितताओं का मामला गर्म हो गया है। इससे विभाग में खलबली मची हुई है। शिकायत कर्ता ने आइजीआरएस पर भी शिकायत की। जांच हुई लेकिन आरोप है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई। बहरहाल अब इस मामले पर प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के अपर आयुक्त ने फिर से जांच करने के लिए डीएम को पत्र लिखा है।
हलिया विकास खंड के मंझियार गांव निवासी विमल कुमार दुबे ने जनसुनवाई के तहत भ्रष्टाचार हेतु शिकायत निवारण मंच पर संदर्भ संख्या 99180000001455 के अनुसार शिकायत की थी कि गेहूं क्रय केंद्र पर विपणन निरीक्षक अल्पना चौरसिया द्वारा व्यापक अनियमितता की गई है। उनका आरोप था कि गेहूंक्रय केंद्र पर सरकारी कागज जैसे गेहूं क्रय पंजिका के कई पृष्ठ फाड़कर क्रय केंद्र पर तौल हुए गेहूं का साक्ष्य मिटाया गया है। साथ ही उनका आरोप था कि छोटे- छोटे किसानों से सौ रुपये प्रति क्विंटल कमीशन लिया गया था। इसके साथ ही पीडीएस में गड़बड़ी व अन्य आरोप लगाए गए थे। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो जांच की गई लेकिन उसमें आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन हाल में ही जब अपर आयुक्त अनिल कुमार ने फिर डीएम को पत्र लिखकर जांच करने को कहा तो मामला पुन: गर्मा गया। हालांकि बीच में कतिपय रूप से भ्रम की स्थिति रही जिसमें मामला धान का बताया गया था लेकिन पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मामला गेहूं का ही है।
डीएम सुशील कुमार पटेल का कहना है कि मामले की जांच की गई है और आख्या शासन को भेज दी गई है। अग्रिम कार्रवाई वहां से निर्देश मिलने के बाद होगी।
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हलिया विकास खंड के मंझियार गांव निवासी विमल कुमार दुबे ने जनसुनवाई के तहत भ्रष्टाचार हेतु शिकायत निवारण मंच पर संदर्भ संख्या 99180000001455 के अनुसार शिकायत की थी कि गेहूं क्रय केंद्र पर विपणन निरीक्षक अल्पना चौरसिया द्वारा व्यापक अनियमितता की गई है। उनका आरोप था कि गेहूंक्रय केंद्र पर सरकारी कागज जैसे गेहूं क्रय पंजिका के कई पृष्ठ फाड़कर क्रय केंद्र पर तौल हुए गेहूं का साक्ष्य मिटाया गया है। साथ ही उनका आरोप था कि छोटे- छोटे किसानों से सौ रुपये प्रति क्विंटल कमीशन लिया गया था। इसके साथ ही पीडीएस में गड़बड़ी व अन्य आरोप लगाए गए थे। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो जांच की गई लेकिन उसमें आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन हाल में ही जब अपर आयुक्त अनिल कुमार ने फिर डीएम को पत्र लिखकर जांच करने को कहा तो मामला पुन: गर्मा गया। हालांकि बीच में कतिपय रूप से भ्रम की स्थिति रही जिसमें मामला धान का बताया गया था लेकिन पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मामला गेहूं का ही है।
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डीएम सुशील कुमार पटेल का कहना है कि मामले की जांच की गई है और आख्या शासन को भेज दी गई है। अग्रिम कार्रवाई वहां से निर्देश मिलने के बाद होगी।