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Mirzapur News: कछवां के लाल ने बंगाल के विस चुनाव में लहराया परचम, चांपदानी से बने भाजपा के विधायक
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दिलीप सिंह की फ़ोटोपरिवार में जश्न
कछवां/मिर्जापुर। क्षेत्र के कटका गांव के रहने वाले दिलीप सिंह उर्फ मुन्ना ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर जिले की चांपदानी सीट से तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी एवं मौजूदा विधायक अरविंदम गुईन को लगभग 3200 मतों से पराजित किया।ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया और पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। सोमवार की शाम जैसे ही चुनाव परिणाम घोषित हुए, कटका स्थित पैतृक आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग रहा। गांव के लोग अपने लाल की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
कटका गांव से की पढ़ाई
दिलीप सिंह के भतीजे धीरेंद्र सिंह उर्फ पंकज ने बताया कि कटका गांव निवासी स्वर्गीय राम आधार सिंह के छोटे पुत्र दिलीप की प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय कटका में हुई। उन्होंने बाबूसराय इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की। रोजगार की तलाश में पश्चिम बंगाल के डांकुनी चले गए, जहां लगभग 10 वर्षों तक नौकरी की। कंपनी बंद होने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद का कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया, जो आगे चलकर सफल रहा।
दिलीप सिंह का राजनीतिक जीवन
उन्होंने वर्ष 2004 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर की। समाजसेवा के साथ उन्होंने भाजपा से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2021 में उन्होंने चांपदानी सीट से भाजपा के चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें 30 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कड़ी मेहनत और जनसंपर्क के बल पर शानदार वापसी की। दिलीप सिंह की दो संतान है। एक पुत्र अमन सिंह और एक पुत्री पूजा सिंह। दो भाइयों में वे छोटे हैं जबकि उनके बड़े भाई राजेश्वर सिंह गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते हैं। 30 वर्षों से पश्चिम बंगाल के डांकुनी में रह रहे दिलीप सिंह की जीत क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
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कटका गांव से की पढ़ाई
दिलीप सिंह के भतीजे धीरेंद्र सिंह उर्फ पंकज ने बताया कि कटका गांव निवासी स्वर्गीय राम आधार सिंह के छोटे पुत्र दिलीप की प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय कटका में हुई। उन्होंने बाबूसराय इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की। रोजगार की तलाश में पश्चिम बंगाल के डांकुनी चले गए, जहां लगभग 10 वर्षों तक नौकरी की। कंपनी बंद होने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद का कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया, जो आगे चलकर सफल रहा।
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दिलीप सिंह का राजनीतिक जीवन
उन्होंने वर्ष 2004 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर की। समाजसेवा के साथ उन्होंने भाजपा से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2021 में उन्होंने चांपदानी सीट से भाजपा के चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें 30 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कड़ी मेहनत और जनसंपर्क के बल पर शानदार वापसी की। दिलीप सिंह की दो संतान है। एक पुत्र अमन सिंह और एक पुत्री पूजा सिंह। दो भाइयों में वे छोटे हैं जबकि उनके बड़े भाई राजेश्वर सिंह गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते हैं। 30 वर्षों से पश्चिम बंगाल के डांकुनी में रह रहे दिलीप सिंह की जीत क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
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