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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mirzapur News ›   A devotee died after visiting Baba at Bechuveer Dham the couple had come from Mudiari Bhudkuda of Ghazipur

Mirzapur: बेचूवीर धाम में बाबा के दर्शन के बाद श्रद्धालु की मौत, गाजीपुर के मुड़ियारी भुड़कुड़ा से आए थे दंपती

Mon, 11 Nov 2024 07:56 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Mon, 11 Nov 2024 07:56 PM IST
सार

अहरौरा स्थित बेचूबीर बाबा धाम में सोमवार की दोपहर परिवार के साथ मत्था टेक कर बीमारी का इलाज कराने की मन्नत लेकर आये श्रद्धालु की दर्शन के बाद छावनी में जाकर लेटने के बाद मौत हो गई। हादसे की जानकारी होते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

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A devotee died after visiting Baba at Bechuveer Dham the couple had come from Mudiari Bhudkuda of Ghazipur
बाबा बेचूबीर धाम पर दर्शन करते भक्त - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मिर्जापुर के अहरौरा स्थित बेचूबीर बाबा धाम में दर्शन के बाद भक्त की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हृदयाघात से हुई मौत के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई। बताते चलें कि गाजीपुर के भुड़कुड़ा क्षेत्र स्थित मुड़ियारी निवासी हरेंद्र बनवासी (40) कन्हई बनवासी अपनी पत्नी सविता बहन आशा भाई और दो पड़ोसियों के साथ बेचूबीर बाबा धाम में बीमारी का इलाज करने की मन्नत लेकर सोमवार की दोपहर दर्शन के लिये पहुंचा। जैसे ही दर्शन करके पहाड़ी पर बने अपनी छावनी पर पहुंचा और लेट कर आराम कर रहा था कि तभी अचानक हृदय गति रुकने से उसकी मौत हो गई।

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इस संबंध में पत्नी सविता ने रोते हुए बताया कि काफी दिनों से बीमार चल रहे थे इलाज की मन्नत लेकर ठीक होने के लिये बाबा के धाम में दर्शन करने के लिये आये थे। दर्शन के बाद लौटते समय रास्ते में पानी पिया और आकर लेटे। तभी उनकी मौत हो गई। मृतक हरेंद्र बनवासी को कुल चार पुत्र हैं। हादसे की जानकारी होते ही थानाध्यक्ष बृजेश सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। थानाध्यक्ष ने बताया कि परिजनों द्वारा बताया गया कि हरेंद्र बनवासी पहले से बीमार चल रहे थे इलाज के लिए मन्नत लेकर बाबा की चौरी पर आये थे। पानी पीने के बाद लेटे तो उनकी मौत हो गई।
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बताते चलें कि अंध विश्वास पर टिके विश्वास की इस पूजा परंपरा में आस्था हावी रही। बेचूआ रे, बेचूआ की शोर से मेला क्षेत्र गूंजता रहा। ट्रैक्टरों व सवारी गाड़ियों पर सवार दर्शनार्थियों का भारी हुजूम बेचूबीर धाम पर उमड़ पड़ा। भूत-प्रेत बाधाओं, चर्म रोगों से ग्रस्त एवं संतान प्राप्ति की इच्छा लिए महिलाओं का रेला बाबा की चौरी पर पहुंचता रहा।
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पूजा स्थल पर हजारों महिलाओं की भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बावजूद इसके एक लाख से अधिक लोगों ने बेचूबीर बाबा के धाम में पहुंचकर सोमवार को शीश नवाया तथा मन्नतें मांगी।

मान्यताओं के अनुसार पूजा के पूर्व नदी में महिलाओं के स्नान को देखते हुए कपड़े बदलने के लिए अस्थायी टेंट आदि लगाया गया था। नदी के आसपास छोड़े गए वस्त्रों, गंदगी और कूड़े के अंबार से निपटने के लिए प्रशासन ने नगर पालिका से साफ-सफाई की व्यवस्था कराई है। बावजूद इसके नदी के आसपास गंदे कपड़ों का अंबार बिखरा पड़ा रहा। पूजा स्थल तक पहुंचने वाले हजारों श्रद्घालुओं ने बाबा की चौरी पर मत्था टेका। संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होने वाले दंपतियों की भी बाबा के धाम में भारी भीड़ पहुंची। विशाल मेला क्षेत्र में जगह-जगह टेंट लगाकर अस्थाई दुकानें सजाई गई र्हैं जिसके चलते मेला क्षेत्र के रास्तों पर अतिक्रमण का खामियाजा भी दर्शनार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।

मेला क्षेत्र में चौरी के सामने हजारों पीड़ित महिलाओं के खेलने-हबुआने से वीरान पड़ी भूमि दर्शनार्थियों की भीड़ से ठसाठस भर गई है। उनको नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग भी कर रखा है। बावजूद इसके भोर मे मनरी बजने के समय वास्तविक प्रसाद चावल ग्रहण करने के लिए होने वाली परेशानी को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ेगा।

बेचूबीर बाबा के महात्म्य और शक्ति का शब्दों में वर्णन कर पाना संभव नहीं है इस चौरी को लेकर भक्तों में अगाध स्नेह तथा प्रेम है। भगवान शंकर के अनन्य भक्त बाबा रहे हैं जिनसे मांगी गई मुराद पूरी होने की की बातें सैकड़ो वर्षों से भक्तों के श्रद्धा और विश्वास में बनी हुई है। बेचूबीर बाबा की चौरी के प्रति लोगों में श्रद्धा और आस्था कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बाबा के दर्शन मात्र से ही लोगों की मुरादे पूरी हो जाती है तथा संतान प्राप्ति की इच्छा भी फलीभूत होती है। ऐसी मान्यता है। आज के वैज्ञानिक युग में इस अद्वितीय पूजा स्थल की अदृश्य शक्ति का अपना अलग महत्व है।

बाबा बने ओझा सोखा ने भी खोली है दुकान
बेचूबीर बाबा की चौरी के सामने ध्यान मग्न महिलाओं को रिझाने तथा उनकी मनोकामना पूर्ण होने का आश्वासन देकर प्रेत बाधाओं से मुक्ति दिलाने का ढिंढोरा पीट कर ओझाओं तथा बाबाओं ने भी अपनी दुकान खोल रखी है। खेलने हबूआने वाली महिलाओं का बाल पकड़कर ऊपरी फेर बता करके प्रेत बाधाओं को कबूलवाने का खेल भी खेला जा रहा है।

खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश रहे श्रद्धालु
मेला स्थल पर शासन तथा जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विश्राम गृह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिसके चलते हजारों की संख्या में श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे सर्द भरी मौसम में अपने बच्चों को लेकर रात गुजारने को विवश रहे। मेला प्रबंध समिति की तरफ से कुछ स्थानों पर टेंट लगाए गए हैं। जो भीड़ के हिसाब से नाकाफी रहे।

अक्षत रूपी प्रसाद की रहती है श्रद्धालुओं को दरकार
एकादशी की भोर पुजारी द्वारा बेचू बीर बाबा की विशेष पूजा अर्चना के बाद मनरी नामक वाद्य यंत्र बजने के दौरान बांटे जाने वाले अक्षत रूपी विशेष प्रसाद पाने के लिए चौरी के चारों तरफ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। जिसको नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को नाकों चने चबाने पड़ते हैं। तीन दिवसीय मेले में श्रद्धालुओं को प्रसाद रूपी अक्षत का दाना लगातार वितरित किया जाता है। जिसको पाने के लिए बाबा के भक्त लालायित रहते हैं।

चप्पे-चप्पे पर तैनात रही सुरक्षा में जुटी पुलिस
मेले की अप्रत्याशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात की गई है। बावजूद इसके संपूर्ण मेला क्षेत्र पर नजर रख पाना संभव नहीं रहा। परिणाम स्वरुप गाहे-बगाहे बैग झोला के गायब होने से हल्ला मचता रहा तथा तथा पाकेट मारी की घटनाएं भी रुकी नहीं। श्रद्धालुओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

चोरी छुपे मेले में बिकती रही शराब
प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था को धत्ता बताते हुए भारी भीड़ के बीच मेला क्षेत्र में आबकारी शराब की बिक्री रुक नहीं सकी। छोटे-मोटे दुकानों से चोरी छिपे दोगुने दाम में देशी शराब की बिक्री होती रही। हालांकि पुलिस प्रशासन ने शराब की बिक्री पर पैनी नजर रखी। लेकिन मेला क्षेत्र में आबकारी की महक रुक नहीं सकी।

पहाड़ी दुर्गम रास्ते पर बनी रही जाम की स्थिति
बेचूवीर मेला में अनवरत वाहनों का काफिला गुजरने से रास्ते भर जाम की स्थिति बनी रही। जगह जगह तैनात किए गए ट्रैफिक पुलिस के जवान जाम छुड़ाने में लगे रहे। बेतरतीब वाहनों के गुजरने से रास्ते भर जाम लगा रहा। जाम में घंटो तक वाहनों की लंबी लाइन लगी ट्रैक्टर व टेंपो के चालक जल्दबाजी में जाम लगाने से नहीं चुके।


जरगो जलाशय के रास्ते नाव से भी पहुंचे श्रद्धालु
धाम में पहुंचने की जल्दी और बाबा के दर्शन की कामना में जाम के झाम से जूझ रहे श्रद्धालु को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है जिसके चलते कुछ श्रद्धालु इमिलिया चट्टी से जरगो जलाशय होते हुए जलमार्ग से बाबा के धाम पहुंच गए जलाशय मे प्राइवेट नाविकों के द्वारा धन वसूली कर जल के रास्ते श्रद्धालुओं को जलाशय पार कराया जाता है। जहां से श्रद्धालु आसानी से बरही गांव में स्थित बेचू वीर बाबा के मंदिर पहुंचते हैं।




 

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