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मांडा रजवाहा की नहर टूटी, फसल जलमग्न
Mirzapur
Updated Mon, 17 Nov 2014 05:30 AM IST
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जिगना। उमापुर लिफ्ट कैनाल से निकली मांडा राजवाहा की नहर टूटने से विकास खंड छानबे की सैकड़ों बीघा फसल शनिवार को जलमग्न हो गई। फसल डूबने से हजाराें किसानाें की लाखाें रुपये की क्षति होने की आशंका है।
उमापुर लिफ्ट कैनाल से निकली मांडा राजवाहा नहर में पानी छोड़े जाने से शुक्रवार की दोपहर नरोईया ताल की टूटी नहर से होते हुए पानी आसपास के खेताें में भर गया। इससे खेताें में बोई गई सैकड़ाें बीघे की फसल जलमग्न हो गई। ग्रामीणाें ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व से ही मांडा राजवाहा की नहर नरोईया ताल के पास टूटी है। जिसको ग्रामीण मिट्टी आदि डालकर दुरूस्त करने का प्रयास करते हैं लेकिन जब भी नहर में पानी आता है तो नरोईया ताल के पास नहर टूट जाती है। खेताें में पानी भरने से जहां एक ओर नहर का पानी बर्बाद होता है। वहीं किसानाें की आर्थिक क्षति का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कृषक राजाराम, शांति देवी, लच्छन बिंद, रजय सिंह, कमलेश गिरी, श्रीराम बिंद आदि द्वारा बोई गई धान की फसल जो कटने वाली थी वह डूब गई। वहीं बोई गई मटर की फसल भी जलमग्न हो गई। किसानाें का आरोप है कि विगत तीन वर्षो से टूटी हुई नहर के तट बंद को दुरूस्त करवाने के लिए कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियाें को सूचना दिया गया लेकिन विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। जिससे किसानाें को रबी एवं खरीफ की फसल में जब भी पानी आता है उसमें भी नुकसान उठाना पड़ता है।
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उमापुर लिफ्ट कैनाल से निकली मांडा राजवाहा नहर में पानी छोड़े जाने से शुक्रवार की दोपहर नरोईया ताल की टूटी नहर से होते हुए पानी आसपास के खेताें में भर गया। इससे खेताें में बोई गई सैकड़ाें बीघे की फसल जलमग्न हो गई। ग्रामीणाें ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व से ही मांडा राजवाहा की नहर नरोईया ताल के पास टूटी है। जिसको ग्रामीण मिट्टी आदि डालकर दुरूस्त करने का प्रयास करते हैं लेकिन जब भी नहर में पानी आता है तो नरोईया ताल के पास नहर टूट जाती है। खेताें में पानी भरने से जहां एक ओर नहर का पानी बर्बाद होता है। वहीं किसानाें की आर्थिक क्षति का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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कृषक राजाराम, शांति देवी, लच्छन बिंद, रजय सिंह, कमलेश गिरी, श्रीराम बिंद आदि द्वारा बोई गई धान की फसल जो कटने वाली थी वह डूब गई। वहीं बोई गई मटर की फसल भी जलमग्न हो गई। किसानाें का आरोप है कि विगत तीन वर्षो से टूटी हुई नहर के तट बंद को दुरूस्त करवाने के लिए कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियाें को सूचना दिया गया लेकिन विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। जिससे किसानाें को रबी एवं खरीफ की फसल में जब भी पानी आता है उसमें भी नुकसान उठाना पड़ता है।
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