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दो साल पहले शक हुआ था गैंगमैन के ऊपर
Updated Sat, 11 Nov 2017 12:10 AM IST
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मिर्जापुर। केबिल कटवा कर रेल यातायात बाधित करने एवं ट्रेन को क्षति पहुुंचाने के मास्टर माइंड गैंगमैन गणेश की कार्यशैली पर पुलिस को करीब डेढ़ वर्ष पहले ही शक हो गया था। तब पक्का सबूत नहीं मिलने के कारण उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। उसके बाद से ही पुलिस लगातार उसकी गतिविधियों पर निगाह बनाए रखी। उसे गुरुवार की रात तब सफलता मिली जब टीम ने गैंगमैन समेत चार लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
इलाहाबाद से मिर्जापुर के गैपुरा तक सिग्नल की केबिल काट कर बार बार रेल यातायात बाधित करने से रेल अधिकारी परेशान हो गए थे। परिचालन बाधित होने से ट्रेनें घंटों लेट होने लगी थीं। इस पर अधिकारियों से जबाब मांगा जाने लगा था। मगर उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा हो क्यों रहा है। सिग्नल की व्यवस्था दुरुस्त करने के पूरी केबिल बदल दी गई। सिग्नल प्रणाली के दूसरे उपकरण भी नए लगवा दिए गए। इसके बावजूद स्थिति नहीं सुधरी। इसी बीच रेल लाइन पर बोल्डर रखने की घटनाएं शुरू हो गईं। एक साथ दो-दो समस्या सामने आ गईं तो अधिकारी और परेशान हो गए। केबिल कटने और पटरियों पर बोल्डर रखने की घटनाएं जारी रहीं। ऐसे में मिर्जापुर एवं नैनी आरपीएफ और खुफिया विभाग को जांच पर लगाया गया। करीब डेढ़ वर्ष पहले गणेश पर पुलिस को तब शक हुआ जब उसने पाया कि हर वारदात के बाद गणेश और उसके साथी मौके पर जरूर मिलते हैं। उसके बाद उन पर निगाह रखी जाने लगी।
अनुकंपा पर मिली थी नौकरी
मिर्जापुर। विंध्याचल थाना क्षेत्र के बिहसड़ा गांव निवासी गणेश प्रसाद को उसकी पिता की मौत के बाद अनुकंपा पर गैनमैन की नौकरी मिली थी। उसकी परिस्थिति को देखते हुए रेल अधिकारियों ने उसे गांव के पास ही तैनाती दिया था। कुछ दिनों बाद उसके नियमित ड्यूटी नहीं करने की शिकायत मिलने लगी तो अफसरों ने उसे हटाने का निर्देश दिया था। स्थानांतरण से बचने के लिए वह अफसरों का ध्यान बंटाने की कोशिश में लग गया। बार-बार रेल परिचालन बाधित कर एवं रेल पटरी पर बोल्डर जैसे काम करता रहा।
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इलाहाबाद से मिर्जापुर के गैपुरा तक सिग्नल की केबिल काट कर बार बार रेल यातायात बाधित करने से रेल अधिकारी परेशान हो गए थे। परिचालन बाधित होने से ट्रेनें घंटों लेट होने लगी थीं। इस पर अधिकारियों से जबाब मांगा जाने लगा था। मगर उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा हो क्यों रहा है। सिग्नल की व्यवस्था दुरुस्त करने के पूरी केबिल बदल दी गई। सिग्नल प्रणाली के दूसरे उपकरण भी नए लगवा दिए गए। इसके बावजूद स्थिति नहीं सुधरी। इसी बीच रेल लाइन पर बोल्डर रखने की घटनाएं शुरू हो गईं। एक साथ दो-दो समस्या सामने आ गईं तो अधिकारी और परेशान हो गए। केबिल कटने और पटरियों पर बोल्डर रखने की घटनाएं जारी रहीं। ऐसे में मिर्जापुर एवं नैनी आरपीएफ और खुफिया विभाग को जांच पर लगाया गया। करीब डेढ़ वर्ष पहले गणेश पर पुलिस को तब शक हुआ जब उसने पाया कि हर वारदात के बाद गणेश और उसके साथी मौके पर जरूर मिलते हैं। उसके बाद उन पर निगाह रखी जाने लगी।
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अनुकंपा पर मिली थी नौकरी
मिर्जापुर। विंध्याचल थाना क्षेत्र के बिहसड़ा गांव निवासी गणेश प्रसाद को उसकी पिता की मौत के बाद अनुकंपा पर गैनमैन की नौकरी मिली थी। उसकी परिस्थिति को देखते हुए रेल अधिकारियों ने उसे गांव के पास ही तैनाती दिया था। कुछ दिनों बाद उसके नियमित ड्यूटी नहीं करने की शिकायत मिलने लगी तो अफसरों ने उसे हटाने का निर्देश दिया था। स्थानांतरण से बचने के लिए वह अफसरों का ध्यान बंटाने की कोशिश में लग गया। बार-बार रेल परिचालन बाधित कर एवं रेल पटरी पर बोल्डर जैसे काम करता रहा।
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