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चिकित्सको ने एनएमसी बिल का किया विरोध
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:01 PM IST
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मिर्जापुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के तत्वावधान में मंगलवार को निजी डाक्टरों ने नगर के रामबाग स्थित एक पैथालॉजी के हाल में बैठक कर नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का विरोध किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को चार सूत्री मांग पत्र भेजते हुए जिलाधिकारी को भी पत्रक सौंपा।
बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. एके गर्ग ने कहा कि सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के तहत होम्योपैथिक, प्राकृतिक यूनानी, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के डाक्टरों को अंग्रेजी दवाएं लिखने की स्वतंत्रता देने की तैयारी कर रही है। बिना गहन अध्ययन किए केवल छह महीने का कोर्स करके अंग्रेजी डाक्टर बनने वाला क्या करेगा। सचिव डा. एसएन पाठक ने कहा कि विदेशी मेडिकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त ग्रेजुएट भारत में निर्बाध प्रैक्टिस कर सकता है, जबकि भारत में शिक्षा प्राप्त डाक्टर को लाइसेंसिंग परीक्षा देनी होगी। कहा कि इस बिल पास होने से जो चाहे वो मेडिकल कॉलेज खोल सकता है और मनमानी फीस ले सकता है। 60 प्रतिशत सीटें कॉलेज अपने हिसाब से समायोजित कर सकता है। बताया कि 21 राज्यों में से केवल पांच राज्यों की भागीदारी एनएमसी बिल में होगी। विश्वविद्यालयों की कोई भागीदारी नहीं होगी। केवल केवल एडवाईजरी काउंसिल में विश्वविद्यालयों की राय रखी जाएगी। कुल मिलाकर मनमानी होगी। भारतीय चिकित्सा संघ ने इस बिल का विरोध किया है। इस मौके पर डा. एसके मुसददी, डा.एके जैन, डा. नीरज त्रिपाठी, डा.सीबी जायसवाल, डा.जेसी गुप्ता, डा. अमित अग्रवाल, डा.अनिल श्रीवास्तव, डा.एचपी सिंह, डा. आईएन तिवारी, डा.अंजनी श्रीवास्तव, डा.प्रज्ञा कसेरा, डा. टी भाटिया, डा. सीपी सिंह, डा.भारत कुमार, डा.साधना जायसवाल, डा.पीसी वर्मा, डा.मीना विश्वकर्मा, डा.एसएन विश्वकर्मा, डा. मृदला जायसवाल, डा.एके सिंह, डा.आनंद मौजूद रहे।
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बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. एके गर्ग ने कहा कि सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के तहत होम्योपैथिक, प्राकृतिक यूनानी, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के डाक्टरों को अंग्रेजी दवाएं लिखने की स्वतंत्रता देने की तैयारी कर रही है। बिना गहन अध्ययन किए केवल छह महीने का कोर्स करके अंग्रेजी डाक्टर बनने वाला क्या करेगा। सचिव डा. एसएन पाठक ने कहा कि विदेशी मेडिकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त ग्रेजुएट भारत में निर्बाध प्रैक्टिस कर सकता है, जबकि भारत में शिक्षा प्राप्त डाक्टर को लाइसेंसिंग परीक्षा देनी होगी। कहा कि इस बिल पास होने से जो चाहे वो मेडिकल कॉलेज खोल सकता है और मनमानी फीस ले सकता है। 60 प्रतिशत सीटें कॉलेज अपने हिसाब से समायोजित कर सकता है। बताया कि 21 राज्यों में से केवल पांच राज्यों की भागीदारी एनएमसी बिल में होगी। विश्वविद्यालयों की कोई भागीदारी नहीं होगी। केवल केवल एडवाईजरी काउंसिल में विश्वविद्यालयों की राय रखी जाएगी। कुल मिलाकर मनमानी होगी। भारतीय चिकित्सा संघ ने इस बिल का विरोध किया है। इस मौके पर डा. एसके मुसददी, डा.एके जैन, डा. नीरज त्रिपाठी, डा.सीबी जायसवाल, डा.जेसी गुप्ता, डा. अमित अग्रवाल, डा.अनिल श्रीवास्तव, डा.एचपी सिंह, डा. आईएन तिवारी, डा.अंजनी श्रीवास्तव, डा.प्रज्ञा कसेरा, डा. टी भाटिया, डा. सीपी सिंह, डा.भारत कुमार, डा.साधना जायसवाल, डा.पीसी वर्मा, डा.मीना विश्वकर्मा, डा.एसएन विश्वकर्मा, डा. मृदला जायसवाल, डा.एके सिंह, डा.आनंद मौजूद रहे।
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