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वन विभाग की जमीन को अपना बनाने की साजिश नाकाम
Updated Fri, 15 Dec 2017 12:25 AM IST
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कूट रचना कर के खतौनी में फर्जी इंद्राज करा कर 60 बीघा 13 बिस्वा जमीन को 160 बीघा 13 बिस्वा जमीन बना कर वन विभाग की जमीन को अपना बनाने की साजिश नाकाम हो गई। न्यायालय उप संचालक चकबंदी के प्रभारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विजय बहादुर द्वारा फर्जी कागजात के आधार पर मुकदमा लड़ रहे वादकारियों का पर्दाफाश किया गया।
जिले के सदर तहसील के ग्राम बरकछाकला क्षेत्र में स्थित वन विभाग की 60 बीघा 13 बिस्वा भूमि को कूटरचित ढंग से आधार वर्ष की खतौनी में कुछ ग्रामीणों ने 160 बीघा 13 बिस्वा करा लिया था और कुछ भूमि पर काबिज भी हो गए थे। जिसको बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी द्वारा खारिज कर दिया गया था। जिसकी निगरानी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के न्यायालय में की गई थी। जिसकी जांच स्वयं संज्ञान में लेकर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने किया था। जांच में यह मामला प्रकाश में आया कि पत्रावली में फार्म 1990 के दशक का प्रिटेंड है तो वर्ष 1989 में वाद योजित नहीं हो सकता है। इससे सिद्ध हुआ कि कूट रचित तरीके से वाद तैयार कर एक ही दिन 30 मार्च 1996 को गाटा संख्या 1758 पर भिन्न भिन्न व्यक्तियों के नाम और भिन्न भिन्न रकबा दिये जाने का आदेश पारित किया गया है। जिसको बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए खारिज कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ अतिक्रमणकारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं कराजस्व की अदाल में पहुंचे थे जिसकी स्वयं जांच करा के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विजय बहादुर ने बंदोबस्त अधिकारी संजय श्रीवास्तव के आदेश की पुष्टि कर दी। इस आदेश के बाद सरकारी जमीन को पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त करा लिया गया है। पूरे जिले में इस तरह के कई मामले प्रकाश मे आते रहे हैं। खास कर हलिया ड्रमंडगंज, मड़िहान और लालगंज के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में वन विभाग और सरकारी भूमि पर अतिक्रमणकारियों की नजर रहती है। कई स्थानों पर झोपड़ियां डाल कर अतिक्रमण कारी काबिज हो गए हैं।
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जिले के सदर तहसील के ग्राम बरकछाकला क्षेत्र में स्थित वन विभाग की 60 बीघा 13 बिस्वा भूमि को कूटरचित ढंग से आधार वर्ष की खतौनी में कुछ ग्रामीणों ने 160 बीघा 13 बिस्वा करा लिया था और कुछ भूमि पर काबिज भी हो गए थे। जिसको बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी द्वारा खारिज कर दिया गया था। जिसकी निगरानी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के न्यायालय में की गई थी। जिसकी जांच स्वयं संज्ञान में लेकर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने किया था। जांच में यह मामला प्रकाश में आया कि पत्रावली में फार्म 1990 के दशक का प्रिटेंड है तो वर्ष 1989 में वाद योजित नहीं हो सकता है। इससे सिद्ध हुआ कि कूट रचित तरीके से वाद तैयार कर एक ही दिन 30 मार्च 1996 को गाटा संख्या 1758 पर भिन्न भिन्न व्यक्तियों के नाम और भिन्न भिन्न रकबा दिये जाने का आदेश पारित किया गया है। जिसको बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए खारिज कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ अतिक्रमणकारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं कराजस्व की अदाल में पहुंचे थे जिसकी स्वयं जांच करा के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विजय बहादुर ने बंदोबस्त अधिकारी संजय श्रीवास्तव के आदेश की पुष्टि कर दी। इस आदेश के बाद सरकारी जमीन को पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त करा लिया गया है। पूरे जिले में इस तरह के कई मामले प्रकाश मे आते रहे हैं। खास कर हलिया ड्रमंडगंज, मड़िहान और लालगंज के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में वन विभाग और सरकारी भूमि पर अतिक्रमणकारियों की नजर रहती है। कई स्थानों पर झोपड़ियां डाल कर अतिक्रमण कारी काबिज हो गए हैं।
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