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विदेशों में कजली को दिला रहे सम्मान डा. मन्नू यादव
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:47 AM IST
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मिर्जापुर। जनपद की सांस्कृतिक धरोहर कजरी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने वाले जनपद के गायक डा. मन्नू यादव ने बताया कि मिर्जापुरी कजरी के मधुर बोल सीधे आत्मा की आवाज से जुड़े होते हैं। देश-विदेश में कजरी से जनपद का मान बढ़ाने वाले डा. मन्नू का मानना है कि वर्तमान में डीजे कल्चर के उदय होने से कजरी गायन में गिरावट देखने को मिल रही है। तीज-त्योहार, रतजगा तथा सांस्कृतिक उत्सवों में कजरी की मांग जरूर होती है। कई बार तो कजरी सुनकर विदेशी खुशी से गले लगा लेते हैं।
कजरी बरबस लोगों को आकर्षित करती है, जिसका कारण है कि कम शब्दों में अच्छी बातों को समाहित किया जाता है। प्राथमिक विद्यालय सरसा में प्रधानाध्यापक रहते हुए डा. मन्नू ने मिर्जापुरी कजरी को देेश विदेश में सम्मान दिलाने में पूरी तरह से लगे रहते हैं। उनका कहना है कि सावन के महीने में जब डाल पर झूले पड़ जाते हैं तब पेंग मारते समय नायक अपनी नायिका के लिए गाता है कि- गोरी झूल गई झुलवा हजार में सावन के बहार में ना.। मां विंध्यवासिनी के कज्ज्ला देवी के स्वरूप व काले-काले मेघों की आकृति से जनमानस में सावन मास में स्फुटित उमंग व हर खुशी बरबस कजली के बोल बन कर उत्पन्न हो जाते हैं। हरे रामा, हरे हरि, श्याम हरि, मोर कन्हैया, राधा, गोप एवं ग्वाल-बाल आदि की चर्चा होती है। मिर्जापुरी कजली संयोग व वियोग दोनों पक्षों को समाहित करने वाली एक गायन शैली है। उनके गुरु स्व. रामधारी कवि थे, जिन्होंने उन्हें लोक संगीत की बारीकियों से परिचित कराया। आठ साल की उम्र से लोक संगीत के प्रति रुझान रखने वाले मन्नू का कहना है कि कजरी के उत्थान के लिए सरकार द्वारा इसको विषय का दर्जा दिलाना होगा व पूर्व माध्यमिक स्तर पर इसको लोक साहित्य के रूप में पढ़ाए जाने की व्यवस्था करनी होगी।
इनसेट
देश-विदेश में मिर्जापुरी कजली का लहरा रहे परचम
मिर्जापुर। चुनार के काशीपुर-पुरुषोत्तमपुर निवासी डा. मन्नू यादव ने भूटान में हिमालयन लोक संगीत समारोह में कजरी गाई। इसी तरह वर्ष 2012 में मॉरीशस में ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन के लिए कजली गाई। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव नई दिल्ली सहित गुवाहाटी व वाराणसी में भी कजरी गाई। इन्होंने ताज महोत्सव, गंगा महोत्सव, भोजपुरी साहित्य एकेडमी भोपाल के आयोजन में कजली गायन करकेे जनपद का परचम लहराया। एमकॉम, एलटी, एलएलबी, एमएड, पीएचडी, संगीत प्रभाकर व लोक संगीत से पीजी डिप्लोमा करने वाले डा. यादव भारत सरकार द्वारा उस्ताद बिसमिल्लाह खां युवा पुरस्कार, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बिलासा कला सम्मान, पूर्वांचल प्रेस क्लब द्वारा कैमूर अलंकरण सम्मान तथा वर्ष 2012 में मॉरीशस वीरारलो गांववासियों की ओर से लोक भूषण सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। वे हिंदी फिल्म मुहल्ला अस्सी में पार्श्व गायन तथा भोजपुरी फिल्म रखवाना में सह अभिनेता भी रह चुके हैं।
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कजरी बरबस लोगों को आकर्षित करती है, जिसका कारण है कि कम शब्दों में अच्छी बातों को समाहित किया जाता है। प्राथमिक विद्यालय सरसा में प्रधानाध्यापक रहते हुए डा. मन्नू ने मिर्जापुरी कजरी को देेश विदेश में सम्मान दिलाने में पूरी तरह से लगे रहते हैं। उनका कहना है कि सावन के महीने में जब डाल पर झूले पड़ जाते हैं तब पेंग मारते समय नायक अपनी नायिका के लिए गाता है कि- गोरी झूल गई झुलवा हजार में सावन के बहार में ना.। मां विंध्यवासिनी के कज्ज्ला देवी के स्वरूप व काले-काले मेघों की आकृति से जनमानस में सावन मास में स्फुटित उमंग व हर खुशी बरबस कजली के बोल बन कर उत्पन्न हो जाते हैं। हरे रामा, हरे हरि, श्याम हरि, मोर कन्हैया, राधा, गोप एवं ग्वाल-बाल आदि की चर्चा होती है। मिर्जापुरी कजली संयोग व वियोग दोनों पक्षों को समाहित करने वाली एक गायन शैली है। उनके गुरु स्व. रामधारी कवि थे, जिन्होंने उन्हें लोक संगीत की बारीकियों से परिचित कराया। आठ साल की उम्र से लोक संगीत के प्रति रुझान रखने वाले मन्नू का कहना है कि कजरी के उत्थान के लिए सरकार द्वारा इसको विषय का दर्जा दिलाना होगा व पूर्व माध्यमिक स्तर पर इसको लोक साहित्य के रूप में पढ़ाए जाने की व्यवस्था करनी होगी।
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देश-विदेश में मिर्जापुरी कजली का लहरा रहे परचम
मिर्जापुर। चुनार के काशीपुर-पुरुषोत्तमपुर निवासी डा. मन्नू यादव ने भूटान में हिमालयन लोक संगीत समारोह में कजरी गाई। इसी तरह वर्ष 2012 में मॉरीशस में ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन के लिए कजली गाई। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव नई दिल्ली सहित गुवाहाटी व वाराणसी में भी कजरी गाई। इन्होंने ताज महोत्सव, गंगा महोत्सव, भोजपुरी साहित्य एकेडमी भोपाल के आयोजन में कजली गायन करकेे जनपद का परचम लहराया। एमकॉम, एलटी, एलएलबी, एमएड, पीएचडी, संगीत प्रभाकर व लोक संगीत से पीजी डिप्लोमा करने वाले डा. यादव भारत सरकार द्वारा उस्ताद बिसमिल्लाह खां युवा पुरस्कार, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बिलासा कला सम्मान, पूर्वांचल प्रेस क्लब द्वारा कैमूर अलंकरण सम्मान तथा वर्ष 2012 में मॉरीशस वीरारलो गांववासियों की ओर से लोक भूषण सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। वे हिंदी फिल्म मुहल्ला अस्सी में पार्श्व गायन तथा भोजपुरी फिल्म रखवाना में सह अभिनेता भी रह चुके हैं।
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