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बलात्कार करने में बड़ों के भी 'बाप' हैं नाबालिग
इलाहाबाद/योगेन्द्र मिश्र
Updated Sun, 21 Apr 2013 01:06 AM IST
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दिल्ली का दामिनी कांड हो या पांच साल की मासूम से दरिंदगी, दुराचार की घटनाएं बेलगाम होती जा रहीं हैं।
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इनमें बड़ी भागीदारी ऐसे लोगों की सामने आ रही है जो खुद अभी अवयस्क हैं।
बाल अपराधियों के खिलाफ गंभीर अपराधों में दर्ज मुकदमों में बड़ी संख्या दुराचार, अपहरण और हत्या के मामलों की हैं।
इसमें दुराचार का अपराध सबसे ज्यादा है। यह घटनाएं केंद्र और राज्य की सरकारों की नींद भी उड़ा रही हैं।
यही वजह है कि हाल ही में शासन ने दुराचार के मुकदमों से निपटने के लिए अलग रणनीति बनाई है।
जिला न्यायालयों के अभियोजन अधिकारियों को निर्देश भेजा गया है कि दुराचार के लंबित मुकदमों के निस्तारण में तेजी लाई जाए ताकि पीड़ितों को न्याय शीघ्र मिल सके।
सिर्फ बाल अपराधियों पर ही गंभीर मुकदमों की फेहरिस्त देखें तो एक जनवरी 2012 से 31 मार्च 2013 तक करीब 350 मुकदमों में ट्रायल शुरू हुआ। इनमें 42 मुकदमे दुराचार, अपहरण और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के हैं।
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शेष मामले चोरी, मारपीट, लूट, राहजनी जैसे अपराधों के हैं। वर्ष 2012 के 274 मुकदमों में से करीब 142 में निर्णय हो चुका है।
करीब 31 में सजा भी हुई है। कचहरी में गैंगरेप के करीब 12 और दुराचार के 350 से अधिक मुकदमे लंबित हैं।
अभियोजन इनमें अब कसी हुई पैरवी करने की तैयारी में हैं। अभियोजन निदेशालय से इस आशय का आदेश भी प्राप्त हुआ है कि मुकदमों के निस्तारण में तेजी लाई जाए। निदेशालय ने आंकड़े भी मांगे हैं।
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डीजीसी क्रिमिनल रणेंद्र सिंह का कहना है कि अभियोजन निदेशालय ने विशेषकर गैंगरेप और रेप के मुकदमों पर जानकारी मांगी है। निर्देश के अनुसार मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
इसमें सफलता भी मिल रही है और तमाम लंबित मामलों में गवाहियां कराई जा रही हैं। सभी एडीजीसी क्रिमिनल को अदालतों का सहयोग करने के लिए कहा गया है ताकि निस्तारण में तेजी आए।
मुकदमों में जल्द तारीखें लगवाई जाएं। गवाहों को अदालत तक लाने के लिए पुलिस अधिकारियों की मदद ली जा रही है।