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WC Fever: फिटकरी गांव की गेंद से फिरकी डाल रहे विश्वभर के क्रिकेट खिलाड़ी, सराकार से प्रोत्साहन की दरकार

Wed, 11 Oct 2023 02:14 PM IST
Dimple Sirohi विपुल सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
विपुल सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 11 Oct 2023 02:14 PM IST
सार

मेरठ से सटे मवाना ब्लॉक के फिटकरी गांव में बनीं लेदर की गेंद से दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ी फिरकी डाल रहे हैं। गांव में तैयार की गई क्रिकेट बॉल की न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी मांग है।

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World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
मेरठ में तैयार हो रही लेदर की बॉल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से 16 किलोमीटर दूर मवाना ब्लॉक के फिटकरी गांव का नाम देश-दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों की जुबां पर छा चुका है। इस गांव में बनीं लेदर की गेंद की मांग देश के अलावा नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, श्रीलंका समेत कई देशों में है।

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गांव में चल रहे सात कारखानों से तैयार करीब 30 हजार लेदर की गेंदें हर माह देश-विदेश तक जाती हैं। इस गांव के करीब 300 लोग गेंद के ही कारखाने पर काम कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। काम करने वालों में 40 फीसदी महिलाएं हैं। 

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World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
मेरठ में तैयार हो रही लेदर की गेंद - फोटो : Amar Ujala

1994 से गेंद बनाने का कार्य कर रहे महेशचंद प्रधान के लेदर की गेंद बनाने के दो कारखाने हैं। महेशचंद बताते हैं कि उन्होंने पहले शहर में गेंद बनाने का काम सीखा। इसके बाद गांव आकर खुद काम शुरू किया।

धीरे-धीरे काम बढ़ा तो कारीगर रखने शुरू किए। इस समय उनके कारखाने में 65 लोग काम करते हैं। इसके अलावा गांव के ही किरण, अंकित, विनीत भी गेंद बनाने के लद्यु उद्योग चला रहे हैं। गांव में 80 मशीनें हैं। इसके अलावा प्रिंट, मॉडल आदि मशीनें भी लगी हैं।

World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
मेरठ में बन रही बॉल - फोटो : Amar Ujala

दक्षिण भारत में भी होती है सप्लाई
गांव के लेदर गेंद की मांग नेपाल में काफी है। इसके अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र हिमाचल प्रदेश, पंजाब में बहुत मांग है। खरीददार सीधा गांव में आकर गेंद की क्वालिटी देखकर ऑर्डर देते हैं। ऑनलाइन बिक्री से इजाफा हुआ है। 

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World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
क्रिकेट बॉल, मेरठ में बॉल - फोटो : Amar Ujala

सरकार से मिले प्रोत्साहन तो और बेहतर होगा काम
लेदर की गेंद बनाने का कारखाना चलाने वाले लघु उद्यमियों का कहना है कि अगर सरकार हमारे लिए सस्ता ऋण उपलब्ध कराने, तकनीकी दक्षता, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माल भेजने के लिए विशेष सुविधा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी होने वाले टेंडर में भागीदारी के लिए विशेष योजना जैसी कुछ सविधाएं मुहैया कराए तो हम और बेहतर करके दिखाएंगे और देश की आर्थिक उन्नति में भागीदार बनेंगे।

World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
मेरठ में तैयार हो रही लेदर की गेंद - फोटो : Amar Ujala

तीन क्वालिटी की गेंद
 कलर     क्वालिटी       वजन        ओवर 

 रेड        फस्ट       5.5 ओंस     60 ओवर से अधिक 
 पिंक        सेकेंड       4.5 ओंस   40 ओवर
 व्हाइट      थर्ड      3.3 ओंस       20 ओवर

World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
मेरठ में तैयार हो रही लेदर की बॉल - फोटो : Amar Ujala

आईपीएल, वर्ल्डकप से बढ़ी मांग
आईपीएल शुरू होने के बाद डिमांड बढ़ी तो गांव में भी गेंद बनाने का काम परवान चढ़ा। अब वर्ल्डकप भारत में हो रहा है तो मांग और भी बढ़ गई है। हर साल गर्मियों की छुट्टियों में मांग बढ़ जाती है। 

World Cup: Cricket players from all around the world are spinning ball made in Fitkari village, Meerut
लेदर की गेंद - फोटो : Amar Ujala

करीब एक सप्ताह की प्रक्रिया के बाद तैयार होती है गुणवत्तापूर्ण गेंद 
चमड़े की धुलाई के बाद उसे एक दिन सुखाया जाता है। फिर रंग और केमिकल डालकर तीन दिन सुखाया जाता है। इसके बाद केमिकल डालकर घिसाई करने के बाद नमी खत्म करने के लिए फिर धूप में सुखाया जाता है। इस प्रकार गेंद बनाने के लिए उपयुक्त चमड़ा तैयार हो जाता है।

चमड़े की कटिंग के बाद अस्तर लगाकर सिलाई की जाती है। इससे यह आधी कटोरी नुमा आकार ले लेता है। इसके बाद मशीन से कटिंग की जाती है। फिर 95 से 100 ग्राम तक का गोला डालकर उसका वजन मापा जाता है।  फिर दो कटोरीनुमा भागों को सिला जाता है। उसके बाद हाथ की मशीनों से गेंद को गोल किया जाता है। फिर पेंट कर क्वालिटी चेक की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद लेदर की गेंद बनकर तैयार होती है। 

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