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मौत का कारण जाने बिना डेथ सर्टिफिकेट जारी  

Tue, 29 Mar 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Tue, 29 Mar 2016 12:45 AM IST
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Without the death certificate the cause of death released
मेडिकल कॉलेज लोगो - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल कॉलेज में नया कारनामा सामने आया है। जहां मौत का कारण जाने बिना ही सफाई कर्मी का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। सर्टिफिकेट से पहले भरे जाने वाले फार्म पर चिकित्सक के फर्जी हस्ताक्षर तक कर दिए गए। अभी बिसरा रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह ने डेथ सर्टिफिकेट निरस्त करते हुए इसे जारी कराने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
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मामला मेडिकल कॉलेज में सफाई कर्मचारी ताराचंद से जुड़ा है, जिसकी करीब डेढ़ सप्ताह पहले संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। मौत का कारण जहर खाना बताया गया। मौत का असल कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित रखा गया था। जिसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है।

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बताया गया कि सीएमएस के सामने अचानक से सर्टिफिकेट जारी करने संबंधी फार्म रखा गया, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर भी कर दिए। इस बीच कुछ जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों (जेआर) ने सीएमएस को जानकारी दी कि डेथ सर्टिफिकेट जारी करने संबंधी कागजात पर हस्ताक्षर कराने के लिए कुछ कर्मचारी उन पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। सोमवार दोपहर सीएमएस ने वह फार्म मंगाकर जांच की तो खुलासा होने पर अपने स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई।  

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जल्दबाजी में हो गई गड़बड़
सीएमएस
को फार्म की जांच में कागजात पूरे नहीं मिले। मरीज की मौत होने के बाद जारी होने वाली रसीद भी नहीं थी। गहराई से जांच हुई तो उसमें चिकित्सक द्वारा किए गए हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से बनाए गए थे। जबकि नियम है कि डेथ सर्टिफिकेट जारी करने संबंधी फार्म को भरने का अधिकार चिकित्सक के पास है और चिकित्सक उस पर मौत का कारण बताते हुए सभी प्रमाणपत्र संलग्न करता है। उसके बाद सीएमएस की तरफ से हस्ताक्षर किए जाते हैं। मामला पकड़ में आने पर सर्टिफिकेट को निरस्त कर दिया गया। सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह का कहना है कि यह गंभीर मामला है। जल्दबाजी में हस्ताक्षर कराए गए। इस कारण कई बिंदु देखने से छूट गए, लेकिन अब उन लोगों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने सर्टिफिकेट जारी कराया।   

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