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Meerut News: नए कानून से किसी भी थाने में दर्ज करा सकेंगे रिपोर्ट
Wed, 03 Jul 2024 02:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 03 Jul 2024 02:42 AM IST
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शामली। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हो चुका है। पुराने तीन कानूनों में बदलाव से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब पीड़ित कहीं भी एफआईआर दर्ज करा सकेंगे। पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच दो माह में पूरी हो सकेगी।
अभियोजन के संयुक्त निदेशक संतोष कुमार उपाध्याय ने बताया कि अब कोई भी व्यक्ति अपने साथ होने वाले अपराध के संबंध में मुकदमा किसी भी थाने में दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए थाने जाने की जरूरत नहीं होगी। थानेदार के सीयूजी नंबर पर फोन करके या ईमेल के माध्यम से मुकदमा दर्ज करा सकेंगे। फोन तथा ईमेल पर मुकदमा लिखाने के बाद के तीन दिनों के भीतर थाने जाकर उस रिपोर्ट पर दस्तखत करने होंगे। एक जगह घटी घटना की रिपोर्ट किसी दूसरे थाने में भी लिखवाई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पुलिस जीरो एफआईआर दर्ज कर संबंधित थाने को केस ट्रांसफर करेगी। विदेश में बैठकर अपराध करने वालों के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखवाई जा सकेगी।
पॉक्सो एक्ट के मामलों की जांच दो माह में पूरी की जाएगी
दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामलों की जांच दो माह में पूरी की जाएगी। साथ ही, पीड़ित को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति की जानकारी लेने का अधिकार प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि अपराध में लिप्त होने पर विदेश में रहने वालों को भी आरोपी बनाया जा सकेगा। किसी बच्चे को अपराध में लिप्त कराने वाले को तीन से 10 वर्ष तक की सजा की व्यवस्था की गई है।
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एफआइआर की प्रति अब पीड़ित को भी निशुल्क दी जाएगी
भीड़ द्वारा जाति, समुदाय, लिंग व अन्य आधार पर किसी व्यक्ति की हत्या पर आजीवन कारावास से मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। वहीं एक से ज्यादा बार चोरी करने वालों को पांच वर्ष तक की सजा की व्यवस्था की गई है। एफआइआर की प्रति अब पीड़ित को भी निशुल्क दी जाएगी। दुष्कर्म व एसिड अटैक के मामलों में पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा।
नए कानूनों के बारे में यह भी जाने....
: तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी जरूरी
: घटनास्थल की वीडियोग्राफी डिजिटल लॉकर में होगी सुरक्षित
: 90 दिन में शिकायतकर्ता को जांच रिपोर्ट देना अनिवार्य
: गिरफ्तारी व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी
: इलेक्ट्रानिक माध्यम से शिकायत के बाद थाने जाकर कर सकेंगे हस्ताक्षर
: 60 दिन के भीतर आरोप होंगे तय, मुकदमा समाप्त होने के 45 दिन में निर्णय
: डिजिटल और तकनीकी रिकॉर्ड दस्तावेजों में शामिल
: वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हो सकेंगी न्यायालयों में पेशी
: छोटे और कम गंभीर मामलों के लिए समरी ट्रायल अनिवार्य
: पहली बार अपराध पर हिरासत अवधि कम, एक तिहाई सजा पूरी करने पर जमानत
सभी पुलिसकर्मियों को नई धाराओं के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लोगों को भी धाराओं के बारे में गोष्ठी आयोजित कर जानकारी दी जा रही है।
अभिषेक, एसपी शामली
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अभियोजन के संयुक्त निदेशक संतोष कुमार उपाध्याय ने बताया कि अब कोई भी व्यक्ति अपने साथ होने वाले अपराध के संबंध में मुकदमा किसी भी थाने में दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए थाने जाने की जरूरत नहीं होगी। थानेदार के सीयूजी नंबर पर फोन करके या ईमेल के माध्यम से मुकदमा दर्ज करा सकेंगे। फोन तथा ईमेल पर मुकदमा लिखाने के बाद के तीन दिनों के भीतर थाने जाकर उस रिपोर्ट पर दस्तखत करने होंगे। एक जगह घटी घटना की रिपोर्ट किसी दूसरे थाने में भी लिखवाई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पुलिस जीरो एफआईआर दर्ज कर संबंधित थाने को केस ट्रांसफर करेगी। विदेश में बैठकर अपराध करने वालों के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखवाई जा सकेगी।
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पॉक्सो एक्ट के मामलों की जांच दो माह में पूरी की जाएगी
दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामलों की जांच दो माह में पूरी की जाएगी। साथ ही, पीड़ित को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति की जानकारी लेने का अधिकार प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि अपराध में लिप्त होने पर विदेश में रहने वालों को भी आरोपी बनाया जा सकेगा। किसी बच्चे को अपराध में लिप्त कराने वाले को तीन से 10 वर्ष तक की सजा की व्यवस्था की गई है।
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एफआइआर की प्रति अब पीड़ित को भी निशुल्क दी जाएगी
भीड़ द्वारा जाति, समुदाय, लिंग व अन्य आधार पर किसी व्यक्ति की हत्या पर आजीवन कारावास से मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। वहीं एक से ज्यादा बार चोरी करने वालों को पांच वर्ष तक की सजा की व्यवस्था की गई है। एफआइआर की प्रति अब पीड़ित को भी निशुल्क दी जाएगी। दुष्कर्म व एसिड अटैक के मामलों में पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा।
नए कानूनों के बारे में यह भी जाने....
: तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी जरूरी
: घटनास्थल की वीडियोग्राफी डिजिटल लॉकर में होगी सुरक्षित
: 90 दिन में शिकायतकर्ता को जांच रिपोर्ट देना अनिवार्य
: गिरफ्तारी व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी
: इलेक्ट्रानिक माध्यम से शिकायत के बाद थाने जाकर कर सकेंगे हस्ताक्षर
: 60 दिन के भीतर आरोप होंगे तय, मुकदमा समाप्त होने के 45 दिन में निर्णय
: डिजिटल और तकनीकी रिकॉर्ड दस्तावेजों में शामिल
: वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हो सकेंगी न्यायालयों में पेशी
: छोटे और कम गंभीर मामलों के लिए समरी ट्रायल अनिवार्य
: पहली बार अपराध पर हिरासत अवधि कम, एक तिहाई सजा पूरी करने पर जमानत
सभी पुलिसकर्मियों को नई धाराओं के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लोगों को भी धाराओं के बारे में गोष्ठी आयोजित कर जानकारी दी जा रही है।
अभिषेक, एसपी शामली
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