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हर लहर के साथ सिमट रहा गांव और नदी के बीच का फासला

Wed, 10 Sep 2025 07:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Sep 2025 07:27 PM IST
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With every wave the distance between the village and the river is shrinking
खादर क्षेत्र में गन्ने के खेत में भरा पानी स्रोत संवाद
ग्रामीणों को बाढ़ से मिली राहत, पर अभी भी जिंदगी हो रही प्रभावित
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हस्तिनापुर। चार दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है। जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, परंतु अभी उनकी परेशानी कम नहीं हो रही है। गंगा में उठने वाली हर लहर के साथ गांव और नदी के बीच का फासला सिमट रहा है। गांव के चारों ओर गंगा का पानी अभी भी भरा हुआ है। इस कारण उन्हें अभी खेतों पर जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक सप्ताह पूर्व गंगा नदी के खतरे के निशान पर पहुंच जाने के बाद खादर क्षेत्र में पानी बाहर निकल गया और कई गांव बाढ़ से प्रभावित हुए। बस्तोरा नारंग गांव के समीप गंगा ने भीषण कटान शुरू कर दिया। गंगा नदी और गांव के बीच करीब 100 मीटर फासला बचा है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। चार दिन से लगातार गंगा का जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
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बिजनौर बैराज से अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर 73 हजार क्यूसेक पर चल रहा है। जलस्तर घटते ही कटान तेज हो गया है। नदी का पानी अब सीधे बस्तोरा गांव की ओर बढ़ रहा है। गांव और नदी के बीच का फासला हर लहर के साथ सिमटता जा रहा है। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीणों के होश उड़ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में करीब 70 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नदी की धारा में समाहित हो चुकी है। खेतों के साथ कई पेड़ भी नदी में समा गए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटान की तुरंत रोकथाम नहीं हुई तो जल्द ही गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। किसानों ने बताया कि इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार दी जा रही है, लेकिन अब तक कटान रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया। खेत उजड़ने से उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।


खेतों का आवागमन हो रहा प्रभावित
बस्तोरा नारंग, मखदूमपुर, जलालपुर जोरा, भीमकुंड आदि कई गांवों के किसानों का खेतों पर जाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। खेतों के संपर्क मार्गों पर तीन से चार फीट पानी भरा हुआ है। किसान जोखिम लेते हुए अपने खेतों पर फसलों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकतर किसानों की फसल बाढ़ के पानी में नष्ट हो चुकी है और अब वह मुआवजे की मांग कर रहे हैं।


तीन साल में दो बार आई बाढ़ ने तोड़ दिए हौसले
तीन साल में दो बार खादर क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों को बाढ़ जैसे हालातों का सामना करना पड़ा। कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचा। हजारों किसानों की फसल बर्बाद हो गई। लगातार आई बाढ़ ने किसानों को आर्थिक रूप से हानि पहुंचाई है। इस कारण उनके सपने और आगे बढ़ने के हौसले भी टूट गए। अब उनके सामने आजीविका का भी संकट खड़ा है।



आज प्रभारी मंत्री करेंगे क्षेत्र का दौरा

बृहस्पतिवार को प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह व राज्य मंत्री दिनेश खटीक खादर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे। वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से बातचीत करेंगे। साथ ही जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा भी करेंगे।

खादर क्षेत्र में गन्ने के खेत में भरा पानी स्रोत संवाद

खादर क्षेत्र में गन्ने के खेत में भरा पानी स्रोत संवाद

खादर क्षेत्र में गन्ने के खेत में भरा पानी स्रोत संवाद

खादर क्षेत्र में गन्ने के खेत में भरा पानी स्रोत संवाद

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