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छुट्टियों में जंगल सफारी पर जाना चाहते हैं तो हो जाएं सावधान, गर्मी में आक्रामक हो रहे वन्यजीव
Mon, 13 May 2019 02:33 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कालागढ़/बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कालागढ़/बिजनौर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Mon, 13 May 2019 02:33 PM IST
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कार्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी से वन्यजीव भी परेशान हैं। गर्मी के मौसम में वन्यजीवों का व्यवहार आक्रामक हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे में वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें। क्योंकि गर्मी के कारण वन्यजीवों के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में हाथी, बाघ और भालू जैसे जीव गर्मी के कारण सबसे अधिक परेशान होते हैं। बिजरानी रेंज में एक हाथी ने तो वैज्ञानिकों के एक दल पर हमला भी कर दिया है। इसके अलावा कालागढ़ में बाघ सक्रिय हो गए हैं। पानी की तलाश में बाघ वनों के बाहर आ रहे हैं। कालागढ़, झिरना, ढेला के वनों में भालू भी नजर आने लगे हैं। जिससे आबादी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नागरिक चिंतित हैं।
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इस विषय में कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकाकरी आरके तिवारी का कहना है कि मई के महीने में गर्मी में वनों को आग का खतरा रहता है। आग लगने के बाद तो जीव के व्यवहार में कई कारणों से परिवर्तन आने की संभावना होती है।
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जैसे उसका चारा कम हो जाता है, उसका विचरण क्षेत्र बदल जाता है, वह अपने जाने पहचाने रास्तों को छोड़कर नए रास्ते तलाशता है। पानी की तलाश और पेड़ों की छाया की तलाश करता है। उसका व्यवहार है कि सुबह और दोपहर को वह अपने स्थानों को बदलता भी है। गर्मी से सबसे अधिक बेहाल भालू होता है। ऐसे में आवश्यक है कि वनों से दूरी बनाए रखें। गश्ती दलों को सतर्क होकर गश्त करने को कहा गया है।
वाटर होल पर सबसे अधिक जोर
एके तिवारी का कहना है कि कालागढ़, ढेला, झिरना में वाटर होल हर समय लबालब भरे रहने के आदेश वन क्षेत्राधिकारियों को दिए गए हैं। वाटर होल में सभी जगह पानी है। यदि जीव को वाटर होल में पानी मिलता है तो वह जंगल से बाहर नहीं जाता है।
फिर भी यदि जीव आबादी की ओर आ रहा है तो जनता को चाहिए कि वह उससे दूर रहे। साथ ही इसकी सूचना विभाग को दे। उन्होंने कहा कि वनों में आग लगाना या वनों के आसपास ज्वलनशील पदार्थ लेकर जाना अपराध है। पकड़े जाने पर कठोर कार्रवाई का प्राविधान है।
मुर्गा फार्म कर्मी पर कुत्तों का हमला
गजरौला शिव के मुकीमपुर धर्मसी खेड़ा निवासी शेखर ने अपने खेतों पर मुर्गी फार्म खोल रखा है। मुर्गी फार्म का उसी गांव के निवासी जमीर अहमद फार्म की रखवाली करता है। रविवार दोपहर दो बजेजमीर अहमद मुर्गी फार्म के बाहर पेड़ की छाय में बैठा था, तभी कुत्तों में उस पर हमला बोल दिया। जमीर के शोर मचाने पर जंगल में काम कर रहे किसान लाठी-डंडे लेकर मुर्गी फार्म की ओर दौड़ पड़े और उसे कुत्तों से बचाया।
एके तिवारी का कहना है कि कालागढ़, ढेला, झिरना में वाटर होल हर समय लबालब भरे रहने के आदेश वन क्षेत्राधिकारियों को दिए गए हैं। वाटर होल में सभी जगह पानी है। यदि जीव को वाटर होल में पानी मिलता है तो वह जंगल से बाहर नहीं जाता है।
फिर भी यदि जीव आबादी की ओर आ रहा है तो जनता को चाहिए कि वह उससे दूर रहे। साथ ही इसकी सूचना विभाग को दे। उन्होंने कहा कि वनों में आग लगाना या वनों के आसपास ज्वलनशील पदार्थ लेकर जाना अपराध है। पकड़े जाने पर कठोर कार्रवाई का प्राविधान है।
मुर्गा फार्म कर्मी पर कुत्तों का हमला
गजरौला शिव के मुकीमपुर धर्मसी खेड़ा निवासी शेखर ने अपने खेतों पर मुर्गी फार्म खोल रखा है। मुर्गी फार्म का उसी गांव के निवासी जमीर अहमद फार्म की रखवाली करता है। रविवार दोपहर दो बजेजमीर अहमद मुर्गी फार्म के बाहर पेड़ की छाय में बैठा था, तभी कुत्तों में उस पर हमला बोल दिया। जमीर के शोर मचाने पर जंगल में काम कर रहे किसान लाठी-डंडे लेकर मुर्गी फार्म की ओर दौड़ पड़े और उसे कुत्तों से बचाया।
मांस नहीं मिलने से हिंसक हो रहे कुत्ते
गांव खुशहालपुर में पानी की तलाश में आई नीलगाय को आवारा कुत्तों ने हमलाकर उसे मार डाला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दे दी है। ग्रामीण खुर्शीद, अबरार, सद्दाम, राशिद, रिषिपाल रतन सिंह, तुलाराम करन सिंह, हरपाल सिंह आदि का कहना है कि कि गांव में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है।
रविवार को जैसे ही नील गाय जंगल से पानी की तलाश में गांव की ओर आई तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने दौड़कर उसे बचाने का प्रयास किया। लेकिन कुत्तों ने उसे नहीं छोड़ा। कुद देर बाद नीलगाय ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग के डिप्टी रेंजर श्यामलाल यादव ने टीम भेजकर शीघ्र समस्या का समाधान कराने की बात कही है।
गांव खुशहालपुर में पानी की तलाश में आई नीलगाय को आवारा कुत्तों ने हमलाकर उसे मार डाला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दे दी है। ग्रामीण खुर्शीद, अबरार, सद्दाम, राशिद, रिषिपाल रतन सिंह, तुलाराम करन सिंह, हरपाल सिंह आदि का कहना है कि कि गांव में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है।
रविवार को जैसे ही नील गाय जंगल से पानी की तलाश में गांव की ओर आई तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने दौड़कर उसे बचाने का प्रयास किया। लेकिन कुत्तों ने उसे नहीं छोड़ा। कुद देर बाद नीलगाय ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग के डिप्टी रेंजर श्यामलाल यादव ने टीम भेजकर शीघ्र समस्या का समाधान कराने की बात कही है।
पशुओं के शव को गड्ढे में दबाएं
गांव मुकीमपुर धर्मसी के आसपास कई पोलट्री फार्म वाले मरी हुई मुर्गी को खुले में ही फेंकते थे। ग्रामीण भी पशुओं के शव को खुले में डाल देते थे। मुर्दा जानवरों के शव खाकर ही वहां कुत्ते हिंसक हो गए। पशुपालन विभाग की टीम ने गांव वालों से पशुओं के शव दबाने को कहा है। छह मई को गांव मुकीमपुर धर्मसी में कुत्तों ने भूसे की रखवाली कर रहे गांव के राधेश्याम को नोंच नोंचकर मार डाला था।
दो बार कुत्ते गांव वालों पर हमला कर चुके हैं। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों ने घटनास्थल के आसपास का दौरा किया था। जांच में सामने आया कि क्षेत्र में कई पोलट्री फार्म हैं। वहां मरने वाली मुर्गियों को खुले में ऐसे ही डाल दिया जाता है। मुख्य पशुधन चिकित्साधिकारी भूपेंद्र सिंह के अनुसार मांस खाने के बाद कुत्ते हिंसक हो गए हैं। ग्रामीणों को पशुओं के शव गड्ढे में दबाने के निर्देश दिए गए हैं।
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गांव मुकीमपुर धर्मसी के आसपास कई पोलट्री फार्म वाले मरी हुई मुर्गी को खुले में ही फेंकते थे। ग्रामीण भी पशुओं के शव को खुले में डाल देते थे। मुर्दा जानवरों के शव खाकर ही वहां कुत्ते हिंसक हो गए। पशुपालन विभाग की टीम ने गांव वालों से पशुओं के शव दबाने को कहा है। छह मई को गांव मुकीमपुर धर्मसी में कुत्तों ने भूसे की रखवाली कर रहे गांव के राधेश्याम को नोंच नोंचकर मार डाला था।
दो बार कुत्ते गांव वालों पर हमला कर चुके हैं। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों ने घटनास्थल के आसपास का दौरा किया था। जांच में सामने आया कि क्षेत्र में कई पोलट्री फार्म हैं। वहां मरने वाली मुर्गियों को खुले में ऐसे ही डाल दिया जाता है। मुख्य पशुधन चिकित्साधिकारी भूपेंद्र सिंह के अनुसार मांस खाने के बाद कुत्ते हिंसक हो गए हैं। ग्रामीणों को पशुओं के शव गड्ढे में दबाने के निर्देश दिए गए हैं।
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