राम मंदिर निर्माण पर वसीम रिजवी का बड़ा बयान, मुसलमानों से की ये अपील
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उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भेजे प्रस्ताव में कहा कि इस्लाम ने कई अहम मामलों में समझौते किए हैं।
एक छोटी से जमीन की लड़ाई में हिंदुस्तान के 20 करोड़ से ज्यादा मुसलमानों को खतरे में डालना समझदारी नहीं है। अगर हम एक छोटी सी जमीन हिंदू समाज की आस्था के अनुसार मंदिर बनाए जाने के मकसद से छोड़कर पीछे हट जाएंगे तो हम समझते हैं कि हिंदुस्तान की 99 प्रतिशत आबादी का हम दिल जीत सकते हैं।
शुक्रवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी को भेजे प्रस्ताव में सैयद वसीम रिजवी ने कहा कि आप अच्छी तरह जानते हैं कि अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का मामला पिछले डेढ़ सौ सालों से अदालत में एक झगड़े की वजह बना हुआ है। बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में यह झगड़ा 1528 ई. में कायम किया था।
अयोध्या पिछले हजारों सालों से हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र है। रिजवी ने प्रस्ताव में यह भी कहा कि अयोध्या में मुसलमानों के लिए नमाज अदा करने के लिए कई मस्जिदें मौजूद हैं। जिस पर हिंदू समाज के लोगों द्वारा कोई आपत्ति कभी नहीं की गई, लेकिन मीर बाकी द्वारा बनाई गई बाबरी मस्जिद जिसके सिलसिले में हिंदुओं का कहना है कि उक्त मस्जिद श्रीराम के मंदिरों को तोड़कर बनवाई गई हैं।
अयोध्या में दर्जनभर से अधिक मस्जिदों में एक विवादित मस्जिद है जिसको बाबरी के नाम से जाना जाता है। जो हिंदू और मुस्लिमों के बीच नफरत की वजह बनी हुई है। वसीम रिजवी ने प्रस्ताव में बोर्ड को सुझाव देते हुए कहा गया है कि बोर्ड इस मामले में हिंदू समाज से समझौता करके श्रीराम मंदिर बनाए जाने के लिए अयोध्या में स्थित पूरी भूमि हिंदुओं के लिए छोड़ दे।
यह हिंदुस्तान के हित में भी होगा और जो हिंदू मुस्लिमों के बीच नफरत की खाई पैदा हो गई है वह भी कुछ हद तक भर सकेगी। रिजवी ने मौलाना राबे हसन नदवी से उनके प्रस्ताव को बोर्ड की बैठक में रखकर इस पर फैसला लेने की अपील की है।
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