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विश्वविद्यालय भी कर सकेंगे कोर्स, सीट और फीस में बदलाव
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 27 Sep 2016 02:46 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना को और भी बेहतर ढंग से लागू करने के लिए शासन ने एक बड़ा फैसला किया है। अब छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर विश्वविद्यालय भी कोर्स, सीट और फीस संबंधी कॉलमों में बदलाव कर सकेंगे। अभी तक लागू व्यवस्था में यह सुविधा नहीं थी, जिससे बड़ी तादाद में विद्यार्थी योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाते थे।
राज्य सरकार दो लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई की सुविधा देती है। अभी तक यह व्यवस्था थी कि वेबसाइट पर उपलब्ध स्वीकृत कोर्स, उसमें सीटों की संख्या और उसकी फीस का ब्यौरा विश्वविद्यालय स्तर से नहीं बदला जा सकता था।
इसके लिए समाज कल्याण विभाग को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता था। अगर मास्टर डाटा में किसी संस्थान में चल रहा कोई कोर्स शामिल होने से रह गया तो उसे विश्वविद्यालय अपने स्तर से शामिल नहीं करा सकते थे। इसी तरह से फीस गलत भरे जाने पर भी विद्यार्थियों को कोई राहत नहीं मिलती थी।
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अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। विश्वविद्यालयों को यह सुविधा दे दी गई है कि वे छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर कोर्स, स्वीकृत सीटें और फीस में बदलाव कर सकते हैं। इस काम केलिए उन्हें हर साल समय सारिणी में एक निश्चित समय दिया जाएगा।
यहां बता दें कि हर साल ही ऐसे तमाम मामले सामने आते थे, जिनमें मास्टर डाटा में कोर्स शामिल न होने से पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई नहीं हो पाती थी। नई व्यवस्था में इस तरह की दिक्कतें नहीं आएंगी। समाज कल्याण विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
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राज्य सरकार दो लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई की सुविधा देती है। अभी तक यह व्यवस्था थी कि वेबसाइट पर उपलब्ध स्वीकृत कोर्स, उसमें सीटों की संख्या और उसकी फीस का ब्यौरा विश्वविद्यालय स्तर से नहीं बदला जा सकता था।
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इसके लिए समाज कल्याण विभाग को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता था। अगर मास्टर डाटा में किसी संस्थान में चल रहा कोई कोर्स शामिल होने से रह गया तो उसे विश्वविद्यालय अपने स्तर से शामिल नहीं करा सकते थे। इसी तरह से फीस गलत भरे जाने पर भी विद्यार्थियों को कोई राहत नहीं मिलती थी।
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अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। विश्वविद्यालयों को यह सुविधा दे दी गई है कि वे छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर कोर्स, स्वीकृत सीटें और फीस में बदलाव कर सकते हैं। इस काम केलिए उन्हें हर साल समय सारिणी में एक निश्चित समय दिया जाएगा।
यहां बता दें कि हर साल ही ऐसे तमाम मामले सामने आते थे, जिनमें मास्टर डाटा में कोर्स शामिल न होने से पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई नहीं हो पाती थी। नई व्यवस्था में इस तरह की दिक्कतें नहीं आएंगी। समाज कल्याण विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।