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आवास विकास की जमीन पर खड़ा है विशाल मेगा मार्ट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 May 2017 02:40 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गढ़ रोड स्थित विशाल मेगा मार्ट आवास विकास की जमीन पर बना है। एमडीए ने यहां शमन शुल्क वसूली करने के लिए प्रशासन से जांच कराई तो यह खुलासा हो गया। अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट एमडीए तथा आवास विकास को भेजकर साफ कर दिया है कि जिस जमीन पर विशाल मेगा मार्ट बना है वह भू अभिलेखों में आवास विकास परिषद के नाम दर्ज है।
विशाल मेगा मार्ट पर पिछले माह एमडीए की टीम ने सील लगा दी थी। कहा गया था कि यहां 741.73 वर्ग मीटर क्षेत्र पर निर्माण हो रहा है जो पूरी तरह से अवैध है। इसका नक्शा ही स्वीकृत नहीं कराया गया है। एमडीए ने अलसुबह ही यह कार्रवाई कर दी थी। जब कर्मचारी यहां काम करने पहुंचे तो मार्ट सील था।
एडवांस शुल्क लेकर खोली सील
इस बाबत मार्ट स्वामियों ने एमडीए ने दावा पेश किया वह शमन शुल्क जमा कर संशोधित नक्शा पास कराने को तैयार हैं। इस बाबत एमडीए ने एडवांस शुल्क के रूप में दस लाख रुपये जमा करा लिये। साथ ही कुल शमन शुल्क का आंकलन शुरू कर दिया। यह आंकलन लगभग 93 लाख रुपये बन रहा है, जिसे वसूलकर एमडीए नया नक्शा पास करने की तैयारी में था।
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एनओसी मांगी तो खुल गई पोल
इस बाबत एमडीए ने प्रशासन से एनओसी मांगी। यह जानने के लिए जहां यह जमीन वहां किसी तरह की कोई सरकारी, परिषद अथवा नजूल भूमि तो नहीं है। इस पर प्रशासन ने जांच कराई तो कुछ और ही मामला निकला। यह जमीन आवास विकास परिषद के नाम है। एसडीएम ने डीएम को जो रिपोर्ट भेजी उसके मुताबिक विशाल मेगा मार्ट खसरा नंबर 5863 पर बना है। इसका समस्त क्षेत्रफल 0.898 हेक्टेयर है। यह समस्त खसरा नंबर ही भू अभिलेखों में अकृषि भूमी की श्रेणी में आवास विकास परिषद लखनऊ के नाम दर्ज है। साथ ही लेखपालों ने रिपोर्ट लगाई यह खसरा नंबर आवास विकास केनाम दर्ज है और यहां विशाल मेगा मार्ट में व्यवसायिक गतिविधियां चल रही है। आवासीय गतिविधियां भी यहां संचालित हैँ।
अब कैसे होगा शमन
इस रिपोर्ट के बाद अब साफ हो गया है कि विशाल मेगा मार्ट पर अब शमन की कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे में जहां एमडीए को 93 लाख रुपये का फटका लगेगा तो वहीं इस पर अब एक्शन लेना होगा। हालांकि ध्वस्तीकरण या सीलिंग जैसी कार्रवाई तो एमडीए को ही करनी होगी पर आवास विकास परिषद भी इस पर अब अलर्ट है।
आवास विकास में भी जांच शुरू
यह रिपोर्ट आवास विकास में जाने के बाद आवास विकास अधिकारियों ने भी अपने दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। दरअसल, आवास विकास अधिकारी अभी तक जानबूझकर अनजान ही बने थे। अब यहां कार्रवाई की तैयारी है।
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विशाल मेगा मार्ट पर पिछले माह एमडीए की टीम ने सील लगा दी थी। कहा गया था कि यहां 741.73 वर्ग मीटर क्षेत्र पर निर्माण हो रहा है जो पूरी तरह से अवैध है। इसका नक्शा ही स्वीकृत नहीं कराया गया है। एमडीए ने अलसुबह ही यह कार्रवाई कर दी थी। जब कर्मचारी यहां काम करने पहुंचे तो मार्ट सील था।
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एडवांस शुल्क लेकर खोली सील
इस बाबत मार्ट स्वामियों ने एमडीए ने दावा पेश किया वह शमन शुल्क जमा कर संशोधित नक्शा पास कराने को तैयार हैं। इस बाबत एमडीए ने एडवांस शुल्क के रूप में दस लाख रुपये जमा करा लिये। साथ ही कुल शमन शुल्क का आंकलन शुरू कर दिया। यह आंकलन लगभग 93 लाख रुपये बन रहा है, जिसे वसूलकर एमडीए नया नक्शा पास करने की तैयारी में था।
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एनओसी मांगी तो खुल गई पोल
इस बाबत एमडीए ने प्रशासन से एनओसी मांगी। यह जानने के लिए जहां यह जमीन वहां किसी तरह की कोई सरकारी, परिषद अथवा नजूल भूमि तो नहीं है। इस पर प्रशासन ने जांच कराई तो कुछ और ही मामला निकला। यह जमीन आवास विकास परिषद के नाम है। एसडीएम ने डीएम को जो रिपोर्ट भेजी उसके मुताबिक विशाल मेगा मार्ट खसरा नंबर 5863 पर बना है। इसका समस्त क्षेत्रफल 0.898 हेक्टेयर है। यह समस्त खसरा नंबर ही भू अभिलेखों में अकृषि भूमी की श्रेणी में आवास विकास परिषद लखनऊ के नाम दर्ज है। साथ ही लेखपालों ने रिपोर्ट लगाई यह खसरा नंबर आवास विकास केनाम दर्ज है और यहां विशाल मेगा मार्ट में व्यवसायिक गतिविधियां चल रही है। आवासीय गतिविधियां भी यहां संचालित हैँ।
अब कैसे होगा शमन
इस रिपोर्ट के बाद अब साफ हो गया है कि विशाल मेगा मार्ट पर अब शमन की कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे में जहां एमडीए को 93 लाख रुपये का फटका लगेगा तो वहीं इस पर अब एक्शन लेना होगा। हालांकि ध्वस्तीकरण या सीलिंग जैसी कार्रवाई तो एमडीए को ही करनी होगी पर आवास विकास परिषद भी इस पर अब अलर्ट है।
आवास विकास में भी जांच शुरू
यह रिपोर्ट आवास विकास में जाने के बाद आवास विकास अधिकारियों ने भी अपने दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। दरअसल, आवास विकास अधिकारी अभी तक जानबूझकर अनजान ही बने थे। अब यहां कार्रवाई की तैयारी है।