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कर्नल की कोठी में ‘वीआईपी’ लोगों की आवाजाही   

Thu, 04 May 2017 11:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 04 May 2017 11:26 AM IST
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vip entry in colonel house
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

रिटायर्ड कर्नल की कोठी में बुधवार दिनभर ‘वीआईपी’ लोगों की आवाजाही लगी रही। वीआईपी नंबर की लग्जरी गाड़ियों से लोग रिटायर्ड कर्नल की कोठी में आए और कुछ देर बाद लौट गए। एक पुलिसकर्मी कोठी के बाहर खड़ा है, जिसकी ड्यूटी सिर्फ कानून व्यवस्था बनाने के लिए लगी हैं। ताकि कोई बाहरी लोग अंदर न घुस सके, लेकिन किसी जानकार के आने जाने पर पूछताछ करने की इजाजत उसको नहीं है। सवाल उठ रहा है कि मेरठ पुलिस इस प्रकरण से दूरी बनाए हुए है। रिटायर्ड कर्नल ने पल्ला झाड़ा है कि इस तस्करी उनका कुछ लेना देना नही है। जबकि इस कोठी में कर्नल का पूरा परिवार रहता है। कोठी में अपराध हो रहा था और परिवार इससे अछूता हो, ऐसा होना नामुकिन है। विदेशी हथियारों से लेकर वन्य जीवों के मांस तक कोठी में मिले है, बावजूद मेरठ पुलिस गंभीर नहीं है। कोठी में रहने वालों को इस अपराध से दूर क्यों माना जा रहा है। शूटर भी नहीं पकड़ा गया है।

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इतनी छूट क्यों, जांच प्रभावित होगी 
सवाल है कि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के मामले में पुलिस ने उनको इतनी छूट क्यों दी। पुलिस ने कोठी पर एक पुलिसकर्मी लगाया हुआ है, वह भी कोठी के बाहर बैठा है। लोगों को कोठी में आना जाना लगा है, कोठी में आने वाले लोग प्रशांत से जुडे़ भी हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि इतनी छूट दी है तो कहां से विवेचना सही होगी। 
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पुलिस की दूरी से जांच हो रही प्रभावित 
मामले से पुलिस की दूरी बनाने से डीआरआई की जांच भी प्रभावित होने लगी है। एसएसपी मेरठ जे. रविंदर गौड़ कहते है कि केंद्र की एजेंसी इस प्रकरण में लगी है। इस एजेंसी के पास शूटर प्रशांत के खिलाफ तमाम सुबूत है। मुख्यालय से कोई दिशा निर्देश नहीं मिले है। सवाल उठता है कि कोठी में किस किस का मूवमेंट है, इस पर पुलिस की नजर होनी चाहिए। क्योंकि वह लोग डीआरआई की जांच को प्रभावित कर सकते है। पुलिस को केवल कानून व्यवस्था के बनाने के लिए ही नहीं, अपराध करने वाले शख्स को गिरफ्तार कराने में भी डीआरआई की मदद करनी चाहिए।  

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