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पिठलोकर को वार्ड 12 में ही रखने की ग्रामीणों ने की मांग
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सरधना। जिला पंचायत के आगामी वार्ड निर्धारण को लेकर सरूरपुर खुर्द विकास खंड की ग्राम पंचायत पिठलोकर के ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वार्डों के पुनर्निर्धारण में गांव पिठलोकर को पूर्ण रूप से वार्ड 12 में ही शामिल किया जाए। इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विगत पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत पिठलोकर को दो हिस्सों में बांटकर वार्ड 11 व 12 में कर दिया था। इससे न केवल मतदाताओं की लोकतांत्रिक भावना को ठेस पहुंची, बल्कि गांव के विकास कार्य भी प्रभावित हुए। कई क्षेत्रों में योजनाएं अधूरी रह गईं और दो अलग-अलग प्रतिनिधियों के कारण समन्वय का अभाव बना रहा। ग्रामीणों ने ज्ञापन देते हुए कहा कि यह स्थिति गांव के हित में नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से निवेदन किया कि इस बार जब नए सिरे से वार्ड निर्धारण किया जाए तो गांव पिठलोकर को एकीकृत करते हुए उसे पूरी तरह वार्ड 12 में ही रखा जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना देने अथवा जनसुनवाई में अपनी बात रखने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि दो वार्डाें में विभाजन के कारण न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ, बल्कि गांव का विकास भी प्रभावित हुआ। दो हिस्सों में बंटने से पंचायत प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी रही। इससे कई मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, जल निकासी, शौचालय निर्माण आदि कार्य अधूरे रह गए।
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ग्रामीणों का कहना है कि एक गांव, एक प्रतिनिधि के सिद्धांत के अनुरूप ही वार्ड निर्धारण होना चाहिए, ताकि गांव को एकसमान योजनाओं का लाभ मिल सके। ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान सन्नो, मारूफ, इस्तियाक, शाकिर, शराफ, दीपक, रियासत, राजकुमार, विनोद, सीताराम, आसिफ, परवेज, सुनील आदि शामिल रहे।
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ग्रामीणों का कहना है कि विगत पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत पिठलोकर को दो हिस्सों में बांटकर वार्ड 11 व 12 में कर दिया था। इससे न केवल मतदाताओं की लोकतांत्रिक भावना को ठेस पहुंची, बल्कि गांव के विकास कार्य भी प्रभावित हुए। कई क्षेत्रों में योजनाएं अधूरी रह गईं और दो अलग-अलग प्रतिनिधियों के कारण समन्वय का अभाव बना रहा। ग्रामीणों ने ज्ञापन देते हुए कहा कि यह स्थिति गांव के हित में नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से निवेदन किया कि इस बार जब नए सिरे से वार्ड निर्धारण किया जाए तो गांव पिठलोकर को एकीकृत करते हुए उसे पूरी तरह वार्ड 12 में ही रखा जाए।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना देने अथवा जनसुनवाई में अपनी बात रखने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि दो वार्डाें में विभाजन के कारण न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ, बल्कि गांव का विकास भी प्रभावित हुआ। दो हिस्सों में बंटने से पंचायत प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी रही। इससे कई मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, जल निकासी, शौचालय निर्माण आदि कार्य अधूरे रह गए।
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ग्रामीणों का कहना है कि एक गांव, एक प्रतिनिधि के सिद्धांत के अनुरूप ही वार्ड निर्धारण होना चाहिए, ताकि गांव को एकसमान योजनाओं का लाभ मिल सके। ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान सन्नो, मारूफ, इस्तियाक, शाकिर, शराफ, दीपक, रियासत, राजकुमार, विनोद, सीताराम, आसिफ, परवेज, सुनील आदि शामिल रहे।