घर में कैद हुआ इंसान तो जीव जंतुओं ने प्रकृति से जोड़ा साथ, गंगा में अठखेलियां करते डॉल्फिन का वीडियो वायरल
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लॉकडाउन में लोग एक महीने से घर में बंद हैं। फैक्ट्रियां बंद होने और वाहनों के कम होने के कारण ध्वनि प्रदूषण भी न के बराबर है। ऐसे में जानवरों-पंछियों का मूवमेंट सड़कों और शहरों में बढ़ गया है। डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कुछ लोग सोशल साइट पर पंछियों के फोटो डालकर लिख रहे हैं कि देखिए प्रदूषण घटने पर कितने पक्षी बढ़ गए हैं।
वे बताती हैं कि एक महीने में कोई जीव-जंतु या पंछी नहीं बढ़ा है। लोगों के घरों में रहने के कारण इनका मूवमेंट बढ़ गया है। इसी तरह से गंगा में डॉल्फिन हों या फिर घड़ियाल, कछुए या अन्य जीव। इनके मूवमेंट पर लॉकडाउन का कोई असर नहीं है। गंगा का पानी इनके लिए पहले से ही अच्छा है।
डीएफओ ने बताया कि जो वीडियो वायरल हुआ है वह पिछले साल आईएफएस आकाश बधावन ने टीम के साथ बनाया था। गंगा में बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक साल 2005 से डॉल्फिन के संरक्षण का काम चल रहा है।
इस समय गंगा के इस सौ किलोमीटर के क्षेत्र में 35 डॉल्फिन हैं। हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा में डब्लूडब्लूएफ की टीम द्वारा कछुओं और घड़ियाल के संरक्षण का काम चल रहा है। हर साल किसानों की मदद से सैकड़ों कछुए गंगा में छोड़े जाते हैं।
डॉल्फिन के बारे में खास
- डॉल्फिन की उम्र 30 साल के करीब होती है।
- 10 साल की उम्र में डॉल्फिन व्यस्क होती है।
- डॉल्फिन दो से तीन साल में एक शावक को जन्म देती है।
- डॉल्फिन हर तीन मिनट में एक बार पानी से बाहर आती है। इसी आधार पर इसकी गणना होती है।
- डॉल्फिन के बारे में माना जाता है कि वो अपने रहने के स्थान से कभी ज्यादा दूर नहीं जाती है।
वर्षवार डॉल्फिन गणना
2015 - बिजनौर से नरोरा बैराज तक - 22
2016- बिजनौर से नरोरा बैराज तक - 30
2017- बिजनौर से नरोरा बैराज तक - 32
2018 - बिजनौर से नरोरा बैराज तक -33
2019- बिजनौर से नरोरा बैराज तक - 35